🙏🏻इसे अपने परिवार, दोस्तों और बच्चों के साथ व्हाट्सऐप व फ़ेसबुक पर शेयर करना बिल्कुल न भूलें |

मित्र हो तो ऐसा:
जब अमीर बनते ही दोस्त भूल गया पुराना अहसान,
जानिए राजा के दरबार में मिली क्या अनोखी सज़ा (Mitra Ho To Aisa Kahani)

भूमिका (Introduction)

मुख्य कंटेंट/कहानी (Main Content Structure)

द्वारिका के सेठ राजाराम पर संकट और सच्चे मित्र का सहारा

गंगाधर सेठ की दरियादिली बनाम राजाराम की कृतघ्नता

जब राजाराम फटेहाल हालत में धार नगरी पहुँचा, तो गंगाधर सेठ ने उसकी दीन-दशा देखकर उससे जरा भी घृणा नहीं की। इसके विपरीत, उसने अपने मित्र और उसके पूरे परिवार का राजसी सम्मान के साथ स्वागत किया, उन्हें अच्छा भोजन कराया और ठहरने की उत्तम व्यवस्था की। राजाराम ने रोते हुए अपनी सारी रामकहानी सुनाई। गंगाधर ने उसे ढाढ़स बंधाते हुए कहा, मित्र, चिंता मत करो! मैं अभी जिंदा हूँ। मुझसे तुम्हारी जो भी सहायता बन पड़ेगी, मैं जी-जान से करूँगा।”

कई दिनों तक अपने घर मेहमान की तरह रखने के बाद, गंगाधर ने राजाराम को व्यापार फिर से शुरू करने के लिए ढेर सारे रुपये दिए और विदा किया। राजाराम अपने मित्र की इस महानता से गदगद हो गया और द्वारिका लौट आया। गंगाधर के दिए पैसों से उसने दोबारा व्यापार शुरू किया, और इस बार उसका भाग्य ऐसा चमका कि वह पहले से भी ज्यादा अमीर और वैभवशाली बन गया।

वक्त ने एक बार फिर करवट बदली और अब मुसीबत के बादल गंगाधर सेठ पर आ गिरे। कुछ ही समय में गंगाधर का सारा कारोबार ठप हो गया और वह पूरी तरह कंगाल हो गया। संकट के इस समय में उसे अपने द्वारिका वाले मित्र राजाराम की याद आई। गंगाधर अपनी पत्नी को साथ लेकर द्वारिका पहुँचा। शहर के बाहर पहुँचकर स्वाभिमानी गंगाधर ने अपनी पत्नी से कहा, “तुम यहाँ विश्राम करो, तुम्हारा मेरे साथ भटकना शोभा नहीं देता। मैं राजाराम के पास जाता हूँ, वह तुम्हारे लिए सम्मानपूर्वक रथ भेजेगा, फिर तुम ठाट से हवेली चलना।”

थोड़े से दाल-चावल और एक अमीर दोस्त का रूखापन

गंगाधर सेठ जब राजाराम की आलीशान हवेली पहुँचा और अपने आने की सूचना भिजवाई, तो अमीर हो चुके राजाराम ने बड़े घमंड और लापरवाही से उसे भीतर बुलाने को कहा। गंगाधर ने सोचा था कि उसका मित्र उसे देखते ही गले से लगा लेगा और उसकी आँखों में खुशी के आँसू आ जाएँगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। राजाराम ने बेहद रूखेपन और बेरुखी से पूछा, कहो मित्र! कैसे आना हुआ?”

गंगाधर ने बुझे हुए मन से कहा कि वह बस उसे देखने चला आया था। जब राजाराम ने पूछा कि कहाँ ठहरे हो, तो गंगाधर ने बताया कि पत्नी को एक धर्मशाला में बैठाकर आया हूँ। इस पर कृतघ्न (अहसानफरामोश) राजाराम ने कहा, देखो, मेरे पास तुम्हारे ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं है। मैं आजकल व्यापार में बहुत व्यस्त हूँ। तुम ऐसा करो, भंडारघर से थोड़े से दाल-चावल ले जाओ और कहीं पकाकर खा लो। इसके बाद दोबारा मेरे पास आने का कष्ट मत करना, क्योंकि मैं काम से बाहर जा रहा हूँ।”

मित्र के इस अपमानजनक व्यवहार से गंगाधर का दिल टूट गया। वह उदास मन से सोचने लगा कि जिस व्यक्ति की बदौलत आज यह इस मुकाम पर है, वह इस उपकार का बदला थोड़े से दाल-चावल देकर चुका रहा है। खैर, उसका मान रखने के लिए गंगाधर ने पोटली में दाल-चावल लिए और रोते हुए बाहर आ गया। जब उसकी पत्नी ने पोटली देखी, तो वह फूट-फूटकर रोने लगी और बोली, “तुमने यह क्यों लिया? क्या हमारे अहसान की यही कीमत थी?” गंगाधर ने धैर्य से कहा, “रो मत, उसकी नीचता उसके साथ रहेगी, हम अपने शहर लौट चलते हैं।”

राजा का न्याय और घमंडी राजाराम को सबक

रास्ते में लौटते समय भाग्यवश उनकी मुलाकात अपने एक वफादार पुराने नौकर से हो गई। गंगाधर सेठ की यह दुर्दशा देखकर नौकर के आँखों में आँसू आ गए। वह उन्हें आदरपूर्वक अपने घर ले गया, नए कपड़े दिए, भोजन कराया और जब उसने राजाराम की इस धोखेबाज़ी की कहानी सुनी, तो उसका खून खौल उठा।

द्वारिका का राजा बेहद न्यायप्रिय और प्रजापालक था। अगले ही दिन वह वफादार नौकर गंगाधर सेठ को लेकर सीधे राजदरबार पहुँचा और राजा के सामने पूरी दास्तान बयां कर दी। राजा ने क्रोधित होकर तुरंत सिपाहियों को आदेश दिया और राजाराम को दरबार में हाजिर होने का हुक्म सुनाया।

कुछ ही देर में ठाट-बाट के साथ राजाराम दरबार में हाजिर हुआ, लेकिन सामने अपने मित्र गंगाधर को देखकर उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई और वह डर से कांपने लगा। राजा ने कड़कती आवाज़ में पूछा, “क्या यह सच है कि तुम्हारी कंगाली के दिनों में गंगाधर सेठ ने तुम्हारी मदद की थी और आज तुम जो कुछ भी हो, इन्हीं की बदौलत हो?” राजाराम ने झिझकते हुए सिर झुकाकर कहा, “हाँ, महाराज!”

राजा ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा, तुम बेहद कृतघ्न और मतलबी इंसान हो। जो अपने मित्र के अहसानों का आदर नहीं कर सकता, वह धन रखने के योग्य नहीं है। इसलिए मैं आदेश देता हूँ कि आज से तुम्हारा सारा धन और वैभव गंगाधर सेठ का हुआ, और तुम आज से इनके यहाँ एक मामूली नौकर के रूप में रहोगे!”

राजा का यह कठोर न्याय सुनकर राजाराम का चेहरा सफेद पड़ गया, उसके मुँह से शब्द नहीं निकल रहे थे। लेकिन तभी सच्चे और दरियादिल मित्र गंगाधर सेठ से अपने दोस्त की यह हालत देखी नहीं गई। वह तुरंत हाथ जोड़कर राजा से बोले, नहीं महाराज! मुझे इसका धन या साम्राज्य नहीं चाहिए। मैंने मुसीबत में इसे जितना धन दिया था, मुझे बस उतना ही वापस दिलवा दीजिए, ताकि मैं अपना जीवन चला सकूँ।”

गंगाधर सेठ की यह निश्छल और महान बात सुनकर राजाराम की आँखें खुल गईं और वह फूट-फूटकर रोने लगा। उसे अपने किए पर बेहद पछतावा हो रहा था और वह गंगाधर के पैरों में गिरकर अपने गलत व्यवहार के लिए क्षमा माँगने लगा। इस तरह सच्चे मित्र ने न केवल अपनी दोस्ती निभाई, बल्कि राजाराम के घमंड को भी हमेशा के लिए मिटा दिया।

मुख्य सीख/निष्कर्ष (Moral / Key Takeaway)

यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा मित्र वही है जो विपत्ति के समय काम आए, और सबसे बड़ा पाप है किसी के किए गए उपकार को भूल जाना (कृतघ्नता)। धन-दौलत और समय हमेशा बदलता रहता है, इसलिए कभी भी अपने अच्छे वक्त पर घमंड करके किसी गरीब या अपने पुराने शुभचिंतक का अपमान नहीं करना चाहिए।

पाठकों के लिए सवाल (Engagement Questions)

  1. दोस्तों, यदि आप राजा की जगह होते, तो क्या स्वार्थी राजाराम को इससे भी कड़ी सजा देते या गंगाधर सेठ की तरह उसे माफ कर देते? कमेंट में बताएं!
  2. क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसा ‘गंगाधर सेठ’ जैसा सच्चा मित्र है जिसने बुरे वक्त में आपका साथ दिया हो? अपने उस प्यारे दोस्त को कमेंट बॉक्स में टैग करें या उसका नाम लिखें!

FAQ Schema (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

  • प्रश्न 1: मुसीबत आने पर राजाराम की मदद गंगाधर सेठ ने किस प्रकार की थी?
    • उत्तर: कंगाली की हालत में जब राजाराम धार पहुँचा, तो गंगाधर सेठ ने उसका आदर-सत्कार किया और व्यापार को दोबारा खड़ा करने के लिए उसे ढेर सारे रुपये और संसाधन दिए।
  • प्रश्न 2: जब गंगाधर सेठ गरीब होकर द्वारिका आए, तो राजाराम ने उनके साथ कैसा व्यवहार किया?
    • उत्तर: राजाराम ने अत्यधिक लापरवाही और रूखापन दिखाया। उसने गंगाधर को हवेली में ठहराने से मना कर दिया और अपमानजनक तरीके से केवल थोड़े से दाल-चावल देकर वहाँ से चले जाने को कहा।
  • प्रश्न 3: राजा ने राजाराम की कृतघ्नता की शिकायत मिलने पर क्या फैसला सुनाया?
    • उत्तर: न्यायप्रिय राजा ने आदेश दिया कि राजाराम की सारी संपत्ति और धन-दौलत गंगाधर सेठ को सौंप दी जाए और राजाराम को गंगाधर के यहाँ नौकर बनकर रहना पड़ेगा।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Request to you :

दोस्ती की इस बेमिसाल और भावुक कर देने वाली पौराणिक कहानी को अपने सभी प्यारे मित्रों के साथ व्हाट्सएप, फेसबुक और टेलीग्राम पर ज़रूर शेयर करें ताकि हर कोई सच्चे मित्र की अहमियत समझ सके! ऐसी ही और दिल छू लेने वाली कहानियों के लिए हमारे ब्लॉग को तुरंत सब्सक्राइब करें। धन्यवाद!”

👇इस साईट पर अन्य हिंदी कहानियाँ पढने के लिए क्लिक करे 👇

  • A Symbol of Human Love: Napoleon Bonaparte
    A Symbol of Human Love: Napoleon Bonaparte नेपोलियन ने अपने सेनापतियों की बात को नजरंदाज करते हुवे कहा ” ये सच है कि हमारी जीत होने वाली है , और उस जगह गोले गिराने भी बंद नहीं करने है पर मानवता नाम की भी कुछ भावना होती है , और इस समय मानवता की भावना ये कह रही कि बीमार राजकुमारी की रक्षा की जाये”|
  • Abraham Lincoln, USA president_Inspiring Real-Life Story
    Abraham Lincoln, USA president_Inspiring Real-Life Story आज आपके लिए एक सत्य प्रसंग को प्रस्तुत कर रहा हूँ , ये प्रसंग इतिहास प्रसिद्ध व्यक्तित्व और इरादे के धनी , अमेरिका के 16 वें राष्टपति Abraham Lincoln अब्राहम लिंकन के जीवन से जुड़ा हुवा है |
  • akbar-pahalwan-aur-teetar-ki-kahani अकबर पहलवान और तीतर की कहानी | चोरी का फल और ईमानदारी की सीख
    akbar-pahalwan-aur-teetar-ki-kahani “अकबर पहलवान, तीतर और सरदार जी की यह रोचक हिंदी नैतिक कहानी बच्चों को ईमानदारी, मेहनत और चोरी से दूर रहने की प्रेरणा देती है।”
  • Albert Einstein  ki mahanata अलबर्ट आइन्स्टाइन की महानता
    Albert Einstein के जीवन से जुड़ा एक ऐसा दिलचस्प उदाहरण मिलता है जब एक छोटी बच्ची ने महान वैज्ञानिक Albert Einstein को चिट्ठी लिखी थी और फिर उस महान व्यक्ति ने क्या जवाब दिया पढ़े पूरी कहानी । 
  • Bejuban maa ki kuku ko seekh wali kahani 
    इस कहानी का सार ये है कि हमें अपने बच्चों को हर जीव के प्रति दया भाव रखने की सीख देनी चाहिए और अपने मनोरंजन के लिए किसी भी जीव को पिंजरे में पकड़ कर नहीं रखे , जीवों के लिए भोजन ,पानी , आवास की जिम्मेदारी ले |
  • C.V. Raman : A short Hindi moral story for kids सी.वी. रमण : प्रेरणादायक हिंदी कहानी
    C.V. raman a short Hindi moral story for kids मन की एकाग्रता और धैर्य के कारण किसी के जीवन को कितना उच्च स्थान प्रदान करा देता है , सी. वी रमण के जीवन की ये छोटी सी घटना आप भी जानिए |
  • Chal mere charakhe charmar chu hindi story for kids चल मेरे चरखे चरमर चूं हिंदी कहानी for kids
    chal mere charakhe charmar chu hindi story for kids चल मेरे चरखे चरमर चूं हिंदी कहानी for kids
  • Dada jee ki chabi wali hindi story for kids हिंदी कहानी
    हिंदी कहानी – Hindi story for kids चुटकी को जब बिस्किट खाने को नहीं मिले तो उसे लगा कि सब बिस्किट चाबी जिसके पास ही आते होंगे , और वो भी अपने पास एक चाबी रखने लगी , पढ़िए मजेदार हिंदी कहानी , hindi kahani
  • Dusht Sangati Kabhi Na Kije: जब गिरगिट की गद्दारी से सुलग उठा पूरा बरगद का पेड़
    शिक्षाप्रद लोककथा ‘दुष्ट संगति कभी न कीजे’ पढ़ें। जानिए कैसे पिता की सीख न मानकर गिरगिट से यारी करने वाले कबूतर के कारण पूरा कबीला आग की लपटों में घिर गया। Dusht Sangati Kabhi Na Kije: जब गिरगिट की गद्दारी से सुलग उठा पूरा बरगद का पेड़
  • Ekta mein shakti motivational kahani एकता में शक्ति – कबूतर और चूहे की प्रेरणादायक कहानी
    “यह एकता में शक्ति की प्रेरणादायक कहानी है, जिसमें कबूतरों का दल मिलकर शिकारी के जाल से निकलता है और एक छोटे चूहे की मदद से आज़ादी पाता है। यह कहानी हमें सिखाती है कि मिलकर काम करने से हर मुश्किल आसान हो जाती है।”