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अकबर पहलवान और तीतर की कहानी | चोरी का फल और ईमानदारी की सीख
सारा गाँव उसे पहलवान के नाम से ही पुकारता था पर नाम था उसका अकबर | खूब खाता और सुबह शाम कसरत करता था | एक दिन उसको अपने खेत में एक तीतर का बच्चा मिल गया वह उसे अपने घर ले आया | उसे अपने हाथ से दाना देता और उसकी रखवाली करता , उसके लिए उसने एक पिंजरा भी बनाया |
उसके घर से दूर एक सरदार जी का बाग था , और उसके पास उन्होंने गाँव वालों के घुमने के लिए भी जगह छोड़ रखी थी , गाँव के बच्चे-बुजुर्ग वहां आते रहते थे| अकबर भी वहां आता था , साथ में अपना तीतर वाला पिंजरा लाता था , उसे पास में रख कर वह कसरत करता और फिर घर चला जाता था |

एक दिन शाम के समय वह रोज की तरह कसरत करने आया , अपना तीतर वाला पिंजरा पास में रखा , कसरत करी और फिर इधर-उधर घुमने लगा| अकबर को लगा कि आज सरदार जी अपने बाग़ में नहीं है और अनार के फल पके हुवे है कुछ तोड़ दूँ , अब शाम के समय कोई देख भी नहीं रहा है , ऐसा सोच वह अपना तीतर वाला पिंजरा बाग के अंदर की तरफ रख फटाफट अनार के पौधों से अनार तोड़-कर अपनी धोती में ही लेने लगा |
सरदार जी दूर बैठे देख रहे थे पर वो बोले नहीं , चुपचाप आये और तीतर का पिंजरा ले कर वापिस आगये |
थोड़ी देर में जब अकबर ने अपनी धोती अनार से भर ली तो पिंजरे की तरफ आया , पर उसने देखा कि पिंजरा तो वहां ही नहीं |
वह अनार वाली धोती नीचे रख इधर -उधर देखने लगा, आस पास के सारे पेड़-झाड़ी देख ली , पर उसे तीतर का पिंजरा कहीं नहीं दिखा , उसने अच्छी तरह से याद किया कि रखा तो यहीं था पर गया कहाँ फिर ?
उधर सरदार जी छिप कर ये सब देख ही रहे थे , जब अकबर तीतर वाले पिंजरे को खोजने में लगा था , उसी समय मौका देखकर वे गए और अनार से भरी वो धोती भी उठा कर अपने घर चले गये |
जब काफी देर बाद अकबर को अपना तीतर नहीं मिला तो अनार वाली धोती की तरफ आया , पर धोती भी अपनी जगह पर नहीं थी , अब अकबर डरने लगा और भागता हुवा अपने घर आ गया |
कई दिन तक वह घर से बाहर ही नहीं निकला , न किसी से बात भी करी, पर उसे अपने तीतर की याद आती तो एक बार उस जगह आता और देखकर जाता पर निराश ही लौट जाता |
कुछ दिन बाद अकबर सुबह-सुबह उस बाग की तरफ घूमने निकला , बहुत सारे लोग घूम रहे थे , इतने में उसने देखा सरदार जी हाथ में पिंजरा लिए आ रहे है , वो उत्सुक हो कर उनकी तरफ गया , पिंजरा और तीतर को देख कर रहा नहीं गया और बोला “तीतर बड़ा अच्छा है ,कहाँ से लिया ? |
सरदार जी तो जानते थे कि तीतर इसका ही है, वे बोले हाँ , तीतर बहुत अच्छा है , एक दिन मेरे बगीचे में कोई आदमी आया था वो उसको छोड़ गया, मैं भी उसको जानता नहीं , अगर वो मिल जाये तो उसको वापिस देना है |
अकबर ने सरदार जी के पाँव पकड़ लिए और बोला कि अब आगे कुछ मत बोलना , मैं उसे जानता हूँ , उसकी धोती भी जानता हूँ , मेरी बहुत बड़ी गलती हो गई जो आपके बाग में अनार चोरी करे , आगे से कभी चोरी नहीं करूँगा , अब आप मेरी धोती और तीतर दे दीजिये |
सरदार जी ने अकबर से कहा कि पहलवानी करना अच्छी बात है पर इस ताकत को चोरी करने में नहीं लगाते , तुम खुद अपने खेत में ऐसा बाग लगा सकते थे |
अकबर शर्मिंदा होकर सरदार जी के पैरों की तरफ देखता रहा और अंत में अपना तीतर लेकर घर चला गया |
Moral of this story:
हमें शारीरिक बल का प्रयोग गलत कार्यों में नहीं करना चाहिए , उसे अच्छे कार्यों में करना चाहिए |