दादा जी की चाबी वाली हिंदी कहानी
Dada jee Ki chabi wali hindi story for kids
दादा जी की चाबी वाली हिंदी कहानी
लकी के दादा अपनी अलमारी की चाबी बहुत संभल कर रखते थे , वो चाबी रखते थे अपने सेविंग बॉक्स में | यह बॉक्स पुराना था और कांच के पास ही एक टेबल के कोने में रखा रहता था , उसमें और भी कुछ सामान था उनका , पर साथ में चाबी भी रहती थी |
एक दिन जाने कैसे दादाजी की चाबी खो गई , देखा तो सेविंग बॉक्स की चेन खुली पड़ी थी , बाकि सब उनकी चीजें थी पर चाबी नहीं थी |
दादा जी ने चाबी बहुत खोजी , सब जगह खोजी , बिस्तर के उपर , बिस्तर के नीचे , अलमारी के उपर , अलमारी के नीचे , टेबल के कपड़े के नीचे , ऊपर सब जगह यहाँ तक लकी ने तो सारा कमरा ही खंगाल डाला पर चाबी नहीं मिली तो नहीं मिली |
सब को एक एक करके पूछा भी , घर में सबसे छोटी थी चुटकी , वो इस समय अपनी दोस्त रूमी के साथ अपने खिलोने वाला बॉक्स लेकर गई हुई थी |
चुटकी का आज जन्मदिन था और दादा अपनी अलमारी में से कुछ पैसे निकल कर चुटकी के लिए एक नई ड्रेस लाने बाजार जाने वाले थे |
दोपहर होने आई , लकी के छोटे भाई बहिन भी स्कुल से आ गये , चुटकी तो पहले ही आ गई थी , पर ममी ने खाने खिला कर उसे सुला दिया था |
बच्चों के आते ही दादा ने उनसे पुछा “बेटा , मेरी चाबी नहीं मिल रही , तुमने किसी ने ली हो या देखी हो तो बताना जरा”
हमनें देखी तो नहीं दादा जी , पर अभी खोजते है | दोनों ने जवाब दिया |
Hindi Story for kids Dada jee ki chabi wali hindi kahani
चीकू और नरु चाबी खोजने लगे , कपड़ों को उलटा-पलटा, जूतों को झटका , कोट जैकेट के सब पॉकेट देखे , हर चीज देख डाली जो उनके कमरे में थी |
शाम हो गई , लकी के पापा भी अब अपने दफ्तर से आ गये , लकी की ममी ने उनके लिए गर्म गर्म चाय बनाई, इतने में चुटकी दौड़ी आई और अपने हाथ से बनी चाय पीने की जिद करने लगी|
पापा ने उसका मन रखते हुए कहा, “हाँ , भाई , आपकी चाय तो पहले पियेंगे , लाइए , मसालेदार चाय !
चुटकी दौड़ी , अपने खिलौने वाली पेटी उठा ले कर आई जिसमे उसके सब बर्तन-भांडे थे , खड़-खड़-खड़-खड़ बजती हुई उसकी वो पेटी जादू भरा संगीत पैदा कर रही थी |
पास आकर उसने अपना किचन सेट निकाला और चाय करने लगी तैयार , कुछ ही देर में उसने चाय परोसने के लिए कप वाला बॉक्स खोला तो उसमें से अचानक दादा जी की अलमारी वाली चाबी नीचे गिरी |
पास में बैठे लकी ने जब चाबी देखी तो झट से उठा कर दादा जी को सौंपी | अब हुई पूछताछ शुरू चुटकी से |
चुटकी को लगा कुछ गलत हुवा है सब एक साथ सवाल दागने लगे |
अपनी भोली सी सूरत के साथ वो बोली , ये वाली चाबी तो मेरी रसोई के ताले की है , वो दादा वाले दाढ़ी वाले बॉक्स में युहीं पड़ी रहती है , दादा के क्या काम की ?
सब हँसने लगे | वो फिर बोल पड़ी ” सारी काम की चाबियाँ तो दादी लटकाए फिरती है कमर में , कल मुझे बिस्किट खाने की मन हुवा था , पर दादी अम्मा तो घर पर ही नहीं थी |
चुटकी की बात में दम था पर मम्मी ने डाँटते हुवे कहा , नहीं चुटकी ऐसे नहीं बोलते , वो इसलिए कि तुम दिन भर बिस्किट ही खाती रहती हो तो, उसको ताले में रखना ही पड़ेगा ना “|
दादी ने चुटकी को उठा कर अपने गले से लगा दिया और अपनी चाबियों का गुच्छा उसे सौंप दिया|
तो देखा आपने चुटकी की ये कहानी , कैसे उसे घर के खजाने की मालकिन बना दी |
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