विवाह से मोक्ष
Vivah se moksha_hindi story for kids
Vivah se moksha_hindi story for kids
वैदिक काल के एक महान ऋषि याज्ञवल्क्य थे, जिन्हें शुक्ल यजुर्वेद का द्रष्टा माना जाता है, उनके आश्रम में कई बालक शिक्षा ग्रहण करने आते थे | उसी समय धनाढ्य परिवार का बालक धर्मकीर्ति भी आश्रम में शिक्षा गृहण करने आया , और शिक्षा पूर्ण होने के बाद वह पुनः अपने घर चला गया |
धर्मकीर्ति के गाँव में उसके जितना कोई भी पढ़ा लिखा नहीं था , समय के साथ उसके पिता ने विवाह करने का प्रस्ताव रखा तो धर्मकीर्ति ने मना कर दिया | धर्मकीर्ति अपने पिता और परिवार से कहता कि “ ये शरीर और संसार तो नश्वर है , मैं तो मोक्ष की प्राप्ति करूँगा”

असमय वियोग की बातें सुन परिवार दुखी रहने लगा , उसे विवाह के लिए मनाने का प्रयास किया पर बहुत प्रयास के बाद जब वह नहीं माना तो उसके पिता ने गुरु याज्ञवल्क्य के पास सन्देश पहुँचाया |
गुरु याज्ञवल्क्य ने जब यह जाना तो उन्होंने धर्मकीर्ति को पुनः अपने आश्रम बुला लिया , अब धर्मकीर्ति वहीँ रहने लग गया |
एक दिन गुरु याज्ञवल्क्य ने धर्मकीर्ति को आसपास से फूल लाने के लिए भेज दिया , वह फूलों की खोज में इधर उधर भटका तो उसे एक बगीचा दिखाई दिया | बिना किसी को पूछे वो उसमें घुस गया और फूल तोड़ने लगा | इतने में उस बगीचे माली वंहा आ गया और किसी अनजान को बगीचे में देख लाठी ले कर उसको मारने को भागा |
लाट्ठी और माली के भय से धर्मकीर्ति वंहा से भागा और हांफता हुवा आश्रम में पहुंचा और गुरु याज्ञवल्क्य को बताया कि माली आ रहा है वो मुझे मार ही देगा |

गुरु याज्ञवल्क्य ने कहा कि तुम तो कहते हो कि शरीर तो नश्वर है तो फिर इसके नाश होने से क्या डरना है ? माली आएगा तो वो तुम्हारे शरीर को ही तो नष्ट करेगा |
गुरु याज्ञवल्क्य के प्रश्न का धर्मकीर्ति के पास कोई उत्तर नहीं था वह चुपचाप खड़ा सुनने लगा
गुरु ने आगे कहा कि जिस प्रकार आत्मा सत्य है उसी प्रकार ये शरीर भी सत्य है , शरीर को साध कर ही आत्मा को साधा जा सकता है , शरीर को साधने के लिए विवाह भी आवश्यक है और विवाह से ही संसार की बहुत सारी बातों को जाना जा सकता है , संसार को जाने बिना मोक्ष प्राप्ति की कामना व्यर्थ है | विवाह से मोक्ष की प्राप्ति का रास्ता जाना जा सकता है |
धर्मकीर्ति को अब अहसास हुवा कि उसने जो सीखा था वो व्यव्हार में नहीं है, उसने पुनः अपने घर जा कर विवाह कर लिया और गृहस्थ जीवन में रहते हुवे सुखी जीवन व्यतीत किया |
शिक्षा :- सीखने से ज्यादा सीखे हुवे ज्ञान को अपने व्यवहार में लाना जरुरी है | vivah se moksha
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