


Rajkavi ka Chunav_Hindi story for kids
राजकवि का चुनाव
Rajkavi ka Chunav_Hindi story for kids
प्राचीन समय की बात है धार नगरी का राजा भोज अपने राज्य में एक राजकवि का चयन करना चाहता था राजा भोज ने अपने सभी मंत्रियों को आदेश दिया कि राज्य के लिए नया राजकवि चुनने के लिए तैयारी की जाए और सभी कवियों को इस आयोजन के लिए बुलावा भेजा जाए।
मंत्रियों ने राजा भोज के आदेश के अनुसार राज्य में इस बात का एलान करवा दिया कि अगले महीने की पूर्णिमा की रात्रि को एक कवि सम्मेलन का आयोजन होगा और उसने जो भी राजा और अन्य सभी प्रजा को अपनी कविता के माध्यम से प्रभावित करेगा उसे राजकवि चुना जाएगा।
राजा का यह आदेश सुनकर बहुत सारे वृद्ध, युवा कवि अपनी तैयारी में लग गए। राजा के दिए हुए दिन और समय के अनुसार सभी वहाँ पर उपस्थित हो गए।
राजकवि चयन के सम्मेलन का आगाज हुआ, एक-एक करके कभी मंच पर आने लगे, राजा भोज और नगरी की जनता के सामने अपनी अपनी कविताएं सुनाने लगे , कोई कवि श्रृंगार रस से भरपूर कविता, तो कोई कवि वीर रस की कविता, कोई कवि हास्य रस से परिपूर्ण तो कुछ कवि नीति परक कविताएं सुना कर अपना अपना प्रभाव छोड़ने में लगे थे।
धीरे-धीरे सभी कवियों ने अपनी अपनी काव्य कला को प्रस्तुत कर दिया और राजा भोज के आदेश का इंतजार करने लगे कि किस को राजकवि का पद मिलेगा?
राजा भोज ने अगले दो दिन का समय मांगकर सभी कवियों को वहीं रुकने का आदेश दिया।
दूसरे दिन की रात को राजा भोज वेश बदलकर अपने राज्य में अपनी प्रजा की खबर लेने निकले जब वे वहां से जा रहे थे तो देखा की रात को एक युवक कवि बैठा कुछ लिख रहा है उन्होंने जाकर उनसे पूछा कि इतनी रात गई अभी तक आप क्या लिख रहे हैं ? और क्यों लिख रहे हैं ?
उस कवि ने उत्तर दिया कि आप भी इतनी रात को क्यों जाग रहे हैं ? और जागकर क्या देखना चाहते हैं?
राजा भोज ने उत्तर दिया कि मैं राजा हूं और राजा का यह कर्तव्य है कि वह अपनी प्रजा की भलाई के लिए समय-समय पर देखभाल करता रहे इसलिए मैं जाग रहा हूं और इसीलिए यहां हूं।
उस कवि ने उत्तर दिया कि जब राजा अपनी प्रजा के लिए जाग रहा है तो मैं अपने राजा के लिए क्यों नहीं जागूं ? मैं भी अपने राजा को उचित सलाह देने और उसे नीतिगत बातें बताने के लिए ही कुछ काव्य का सृजन कर रहा हूं राजन ।
राजा भोज कवि की बात से प्रभावित हुए और सुबह होने पर सभी कवियों को बुलाकर उस युवा कवि को अपना राजकवि चुन लिया।
शिक्षा : इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि किसी कार्य की जिम्मेदारी मिलने से पहले ही उसको करने की जिम्मेदारी खुद तय कर लेनी चाहिए ताकि उस कार्य से आपकी जिम्मेदारी पूर्ण हो सके।