जब एक राज्य में थी अराजकता और दूसरे में थी शांति – जानिए कारण Neeti se raj Hindi story for kids
राज्य की सफलता का रहस्य: एक प्रेरणादायक कहानी
Neeti se raj Hindi story for kids
नीति से राज
जब एक राज्य में थी अराजकता और दूसरे में थी शांति – जानिए कारण
प्राचीन समय में भारत में एक राज्य था जिसका नाम था पंचनन्द|
पचनंद राज्य की प्रजा में बहुत ही असंतोष दिखाई दे रहा था, आपस में लड़ाई झगड़े हो रहे थे, अव्यवस्था सब जगह दिखाई दे रह थी, कोई किसी के ऊपर भरोसा नहीं कर रहा था, ना कोई किसी का सहयोग कर रहा था, यंहा तक की राजा के दरबार की भी सारी व्यवस्थाएं भी चोपट थी, इसी बात की चिंता से राजा बहुत दुखी रहता था |
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पचनंद के पास ही सीमा से लगता एक राज्य और था कुरु| कुरु में राजकुमार चंद्रसेन का शासन था | कुरु की प्रजा और राजा बड़े ही सुख से अपना जीवन यापन कर रहे थे| पंचनन्द के राजा ने अपने पुरोहित देवघर को कुरु राज्य स्थिति का अध्ययन करने के लिए भेजा |

आचार्य देवघर कुरु पहुंचे और वंहा के पुरोहित नंदराज से मिले और उनसे कुरु राज्य के सफल सञ्चालन का कारण जानना चाहा तो नन्द ने कहा “मैं कुरु का राजस्व मंत्री हूँ , मेरे सामने एक बार बड़ी भारी विप्पति आ गई , एक बार मेरे राज्य में एक किसान की भूमि का नाप करने गया , भूमि नापते समय समतल जगह पर एक गड्ढा आ गया जिसमें एक जीव अपने बच्चे सहित बैठा था,
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अब अगर गड्ढे को समतल करूँ तो जीव हत्या का पाप लगता है और उस जगह को छोड़ दूँ तो किसान की भूमि का नाप कम होता, मेरा मन बहुत दुखी हुवा, अब और अधिक जानना हो तो आप मेरे रथ के सारथि से पूछ लीजिये |
देवरथ उस सारथि के पास गया गये, उस सारथि ने अपनी बात सुनाते हुवे कहा कि मैं उस दिन जब वापिस आ रहा था तो घोड़ा अड़ गया तो मैंने उसके दो चाबुक लगा दिए , घोड़ा तो दौड़ने लगा पर मुझे बाद में उसे चाबुक मारने के कारण बहुत दुख हुवा| अब और अधिक जानना हो तो आप नगर सेठ सारिपुत्र से पता कीजिये |
देवरथ नगर सेठ सारिपुत्र के पास पहुँचा, वो ही प्रश्न जो नन्द से किया वो ही पूछा, वह बोला उस दिन मैंने एक किसान से अनाज ख़रीदा था, तौल के दौरान मैं एक तौल जोड़ना भूल गया और वो किसान जल्दी में चला गया पर मुझे आज भी अपनी गलती का पछतावा और उसका नुकसान भूला नहीं जा रहा हैं | अब और अधिक जानना हो तो द्वारपाल पुष्पक से जान लीजिये |
देवरथ द्वारपाल पुष्पक के पास गये तो उसने बताया कि एक रात जब मैं द्वार पर खड़ा था तभी एक युवक और युवती नगर में घुसने लगे तो मैंने उनसे कह दिया कि इतनी रात कहाँ रमणक्रीडा कर रहे थे? मेरे ऐसा कहने पर वह युवक बोला ये तो मेरी बहिन है, मैं तो ग्लानि से भर गया, मैंने बिना जाने उनके बारे में गलत सोचा, अब और अधिक जानना हो तो इस नगर की नगरवधू (वैश्या) उतप्लवर्णा से पता कर लो | देवरथ अब उतप्लवर्णा के पास पहुंचें और अपने आने का कारण बताया तो वैश्या उतप्लवर्णा बोली “एक बार राजकुमार तनु से मैंने वायदा किया कि जब तक वो तीन वर्ष युद्धविद्या सीखकर वापिस नहीं आएंगे तब तक मैं किसी अन्य पुरुष से बात तक नहीं करूँगी |

तीन वर्ष अंत में एक दिन मैं किसी पुरुष से बात कर रह थी इतने में राजकुमार तनु वहां आ गये और मुझे अन्य पुरुष से बात करते देख लिया, और वे लौट कर चले गये आज दिन तक वापिस मेरे घर की तरफ नहीं आये , तभी से मैं इतनी दुखी हूँ और एकेले जीवन व्यतीत कर रही हूँ |
सारी बातें जानने के बाद वो अपने राजा के पास पहुंचे और बताया कि महाराज उस राज्य के सब लोग चाहे वो राजकुमार हो, राजा का मंत्री हो , सेवक हो, नगरसेठ हो, द्वारपाल हो, और चाहे वैश्या हो सब अपनी नीति के अनुसार चल रहे, यही कारण है , अगर हम भी अपनी नीति के अनुसार चलेंगे तो अपना राज्य भी वैसा ही प्रसिद्ध होगा |
शिक्षा :- जहाँ लोग अपने कर्तव्य और नीति का पालन करते है वंहा संतोष से जीवनयापन होता है |
इंडिकस्टोरिज
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