Jhandu talamatol Hindi story for Kids
झंडू टालमटोल हिंदी कहानी मजेदार
Hindi kahani
हिंदी कहानी जीतू की गन्दी आदत को कैसे महसूस करवाया |
Hindi story for kids Jhandu talamatol
एक गाँव में एक जीतू नाम का लड़का अपने माता-पिता , भाई-बहिन के साथ रहता था , जीतू की एक गन्दी आदत थी , उसको नहाना पसंद नहीं था , नहाने के अलावा भी उसको पानी कम ही काम में लेने की आदत थी , वो कुछ भी खा पीकर मुंह नहीं धोता , भोजन के बाद अच्छे से कुल्ला भी नहीं करता , रात को दूध पीने के बाद भी मुंह में पानी से कुल्ला करने में उसे बहुत जोर पड़ता था |
घर के सभी सदस्य उसे दिन में दो चार बार तो डांट ही देती , नहाने के समय तो उसे पकड़ कर लाना पड़ता , जबकि वह अब बड़ा था , खुद भी नहा सकता था , पर उसे कोई भी काम कहने पर टालमटोल करने की आदत थी | हर काम टालने के कारण और मुंह हमेशा गन्दा रखने के कारण उसे सब ‘झंडू टालमटोल’ कहने लगे |
माँ जीतू से ज्यादा परेशान रहती थी , ना तो वो उसका कहना मानता था , एक दिन माँ ने सोचा कि आज से वह जीतू को कभी नहाने , मुंह धोने का नहीं कहूँगी , चाहे वो गन्दा दिखे तो दिखे |
अगले दिन इतवार का अवकाश था , सुबह उठते ही जीतू नाश्ता करने रसोई में आया , उसने उठने के बाद मुंह तक नहीं धोया और सीधा खाने लग गया | आज माँ ने कुछ भी नहीं कहा तो उसे थोडा अजीब तो लगा पर मन में खुश था |
आप पढ़ रहे है बहुत ही भावुक करने वाली हिंदी कहानी: झंडू टालमटोल
Hindi story for kids

नाश्ता करने के बाद जीतू दिन भर घर के बाहर मिट्टी में खेला , फिर अपने दोस्त के साथ खेत में गया , वहां वो दोनों आपस में एक दुसरे पर मिट्टी फेंक फेंक कर खेल खेले |
दोपहर को वह घर देर से आया , उसे याद था कि घर अभी गया तो माँ आज रगड़-रगड़ कर मैल उतारेगी और खूब मालिश करेगी , इसलिए चुपके से आया , ना हाथ धोये , ना पैर , ना मुंह , सीधा गया रसोई में , गंदे हाथों से भोजन लिया और खाने के बाद फिर खेलने | पर अब भी माँ ने उसे कुछ नहीं बोला , उसे अजीब लगा पर कुछ चिंता भी हुई |
शाम जो जब वो घर आया तो किसी ने भी हाथ -मुंह धोने आदि का कुछ भी नहीं कहा , उसने भोजन किया और सो गया |
सुबह उसका दोस्त रिंकू नहा-धो स्कुल तैयार हो कर आ गया और घर के अंदर आकर आवाज देने लगा ” ओ जीतू ! ओ जीतु ! जल्दी चल , बस आने वाली है, तुम तो अभी तक सो रहे हो” जीतू को लगा कि आज वो स्कुल नहीं चलेगा और वो वपिस आ गया और सड़क पर बस का इंतजार करने लगा |
जीतू को नींद में कुछ कुछ आवाज सुनाई दी तो वह अचानक जगा , झट से बिस्तर छोड़ , रसोई में गया, दूध पिया, जल्दी- जल्दी स्कुल ड्रेस पहनी, जूते हाथ में लिए , थैला लटकाए बस की तरफ आ गया |
जीतू को देखते ही रिंकू ने कहा ‘ अरे तू इतना जल्दी कैसे तैयार हो गया , और ये तेरा मुंह तो मैला ही पड़ा है , धोया नहीं क्या ? बाल भी सब बिखरे हुवे, समझा क्या झंडू कहीं का “
खुद को झंडू सुन कर जीतू ने रिंकू पर हाथ उठाते हुवे कहा ” तू होगा झंडू”| पर रिंकू चुप रहा , इतने में बस आ गई और दोनों स्कुल पहुँच गये |
स्कुल की प्रार्थना सभा हो रही थी , ये दोनों अपनी अपनी कक्षा की लाइन में बैठ गए | सभी बच्चों की आज शरीर की साफ-सफाई देखने का दिन था , एक-एक कर सभी को देखा जा रहा था , जीतू अब मन ही मन बहुत डर रहा था , कुछ देर बाद जब उसके क्लास टीचर उसके पास आये तो देखते ही कहा ” ये इतना गन्दा बालक” इसको बाहर निकालो” जीतू को सबसे अलग खड़ा कर दिया , सभी बच्चे और अध्यापक उसको देख रहे थे , कुछ बच्चे हँस रहे थे , कुछ इशारे से चिढ़ा भी रहे थे, जीतू मन ही मन बहुत शर्मिंदा हो रहा था|
आज जीतू को कक्षा के अंदर नहीं बैठने दिया गया , सज्जा मिली दिन भर खड़ा रहने की कक्षा के बाहर | घंटे भर तक वो खड़ा रहा तो उसे भूख लग गई , उसने अपना बस्ता देखा तो उसमें तो आज टिफ़िन भी नहीं था | आज माँ ने टिफिन नहीं डाला था |
अब उसे कल की सारी बातें एक एक कर याद लगी कि आखिर मुझे कल से कोई कुछ भी क्यों नहीं कह रहा था , उसे अपनी माँ की सब बातें याद आने लगी जो उसको हमेशा साफ-सुथरा रहने के लिए कहती रहती थी, उसे रिंकू ने सुबह झंडू बोला उसका भी कारण समझ आ गया|
उसे अब लगा कि मै अगर अपने ही शरीर की साफ-सफाई नहीं रख सकता तो झंडू हो हुवा फिर तो |
वह सीधा अपने गुरूजी के पास गया और माफ़ी मागंते हुवे कहा कि आज से मैं जीवन में कभी भी अपने आप को गन्दा नहीं रखूँगा और हमेशा समय पर स्नान आदि कर लूँगा , भोजन करने से पहले और बाद में अपने हाथ -मुंह-दांत अच्छे से साफ धो लूँगा |
गुरूजी ने जीतू को स्वस्थ तन तो स्वस्थ मन के बारे में और भी समझाया , सभी बच्चों ने सुना |
जीतू छुट्टी के बाद घर आया , आते ही अपना तौलिया लिया और सबसे पहले अच्छे से नहा कर आया और फिर माँ से आज स्कुल में हुई सारी घटना सुनाई , ,माँ ने जब जीतू के मुंह से अपने किये वादे के बारे में सुना तो उसकी आँख में आंसू आ गये |
जीतू ने अपनी माँ के गोद में सर रख दिया और बोला , आज से माँ मैं तेरी हर बात मानूंगा , माँ तू रो मत , अब तुझे कभी नहीं रुलाऊंगा |
माँ ने बड़े प्यार से जीतू को भोजन परोसा और फिर भोजन के बाद उसने अपने किये वादे को याद रखा , अच्छे से हाथ धोये |