बुढ़िया की सीख: चंद्रगुप्त मौर्य की प्रेरणादायक कहानी
Chandragupta maurya Hindi story for Kids
प्राचीन भारत के मौर्य साम्राज्य के संस्थापक और पहले सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य (शासनकाल: लगभग 321–297 ईसा पूर्व) ने अपने गुरु चाणक्य के साथ मिलकर नन्द वंश को समूल नष्ट करने का इरादा कर लिया था | अब दोनों गुरु शिष्य घनानंद के राज्य को किसी न किसी तरह जीतने के प्रयास में लगे हुवे थे | घनानंद के गुप्तचर दिन-रात इनके बारे में पता लगाने में लगे थे |

चंद्रगुप्त और चाणक्य की रणनीति
एक दिन चन्द्रगुप्त इन गुप्तचरों से अपने को किसी तरह बचा कर घनानंद की राजधानी में प्रवेश कर गया | लम्बे समय से घोड़े पर चलते चलते वह थक चुका था, रात हो चुकी थी और कहीं न कहीं विश्राम करने का कोई सुरक्षित ठिकाना खोज रहा था | अंत में उसे जंगल में एक झोंपड़ी में हल्का हल्का उजाला दिखाई दिया था वह झोंपड़ी के आगे पहुंचा , अपने घोड़े से उतरा और धीरे से आवाज दी | उस झोंपड़ी में से एक बुढ़िया ने उत्तर देते हुवे कहा कि “जो भी हो अन्दर आ जाओ”|
जंगल में बुढ़िया से मुलाकात
चन्द्रगुप्त झोपड़ी के अन्दर गया और कहा कि वह रास्ता भटक गया और रात विश्राम करना चाहता है, सुबह होने पर चला जायेगा |
रात बहुत हो चुकी थी और बुढ़िया के पास एक चारपाई खाली पड़ी थी , चन्द्रगुप्त उस पर लेटा और उसको नींद आ गई | सुबह होने पर बुढ़िया जल्दी उठी और उसने चावल मूंग की खिचड़ी पकाई और फिर चन्द्रगुप्त को जगाया |
सूरज चढ़ा देख चन्द्रगुप्त जाने को उतावला होने लगा तो बुढ़िया ने पुत्र की तरह दुलारते हुवे कहा कि “बेटा, तू भूखा है, रात को भी बिना कुछ खाए सो गया, और मेरे घर पर आया और फिर बिना अन्न लिए कैसे जाने दूँ?”|
खिचड़ी से मिली अनोखी सीख

उस बुढ़िया की ममता देख चन्द्रगुप्त का ह्रदय पिघल गया| चन्द्रगुप्त ने कहा कि माँ तुमने इतना कष्ट क्यों किया? मुझे तो बहुत जरुरी काम है, जाना होगा”|
उस बुढ़िया ने कहा कि अन्न का आदर कर , खिचड़ी बनी हुई है थोड़ी खा ले फिर चले जाना”|
बुढ़िया गर्म खिचड़ी ले आई, पास बैठ गई और चन्द्रगुप्त खिचड़ी खाने लगा| खिचड़ी गर्म होने के कारण चन्द्रगुप्त बीच में हाथ डालता , अंगुली जल जाती , फूंक मारता और फिर बीच में अंगुली , फिर जलती , फिर फूंक मारता |
सीख जिसने बदल दी इतिहास की दिशा
बुढ़िया ये सब देख रही थी और वो चन्द्रगुप्त को बोली “ बेटा तू भी चन्द्रगुप्त की तरह बहुत उतावला पड़ रहा है बीच में हाथ डाल रहा , अगर खिचड़ी को किनारे की तरफ से खाना शुरू करे तो जल्दी ही सब खा लेगा”
चन्द्रगुप्त ने किनारे से खिचड़ी खाना शुरू की और जल्दी ही सब खा गया | उस बुढ़िया को अपना परिचय दिए बिना निकल गया और फिर उस बुढिया की दी सीख के अनुसार अपने सीमा क्षेत्रों को जीतता हुवा वह राजधानी की ओर बढ़ा , घनानंद को हरा कर स्वयं राजा बना |
शिक्षा 👍:- सीख किसी से भी मिल जाएगी पर उसे अपने जीवन-व्यव्हार में लाना ही वास्तविक सीख है | चन्द्रगुप्त ने बुढ़िया के बताये गर्म खिचड़ी खाने के तरीके से सीख लिया कि किसी बड़े साम्राज्य को जीतना है तो सीधा उसकी राजधानी पर आकर्मण नहीं करना है , पहले उसके सीमावर्ती क्षेत्रों को जीता जाये |