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जब साधुओं ने महात्मा को गलत समझा |
एक प्रेरणादायक कहानी
Sadhu Mahatma Ki Hindi Kahani for kids
Sadhu Mahatma Ki Hindi Kahani for kids
किसी राजा के राजधानी नगर क्षेत्र में एक महात्मा रहते थे , उनकी भक्ति और चमत्कारों की चर्चा आस-पास के सभी राज्यों में होती थी | एक बार दो साधू उन महात्मा के दर्शन करने उनके आश्रम आये, परन्तु जब वे वहां पहुंचे तो महात्माजी आश्रम में नहीं थे , उनके शिष्यों ने बताया कि वे राजा के दरबार गये और शाम तक आयेंगे |

साधू इन महात्मा जी के बारे में जो सोच कर आये थे वो उनको सच नहीं लगा , उनकी अब इनके प्रति धारणा बदल गई वे सोचने लगे कि उनका राज दरबार आना जाना है तो फिर वे तो संसारी सुखों का भोग कर रहे होंगे |
दर्शन करने आए साधुओं ने सोचा कि शाम तक बैठे क्या करेंगे? चलो बाजार में लंगोट सिला कर ले आते है| वे दोनों एक दर्जी की दुकान पर गये , लंगोट का कपड़ा और उसका माप देकर वे रवाना होने लगे ही थी कि दर्जी ने कहा कि “मेरे रूपये खो गये और आपने ही लिए और कोई था भी नहीं आपके सिवाय”|

साधुओं ने रुपये नहीं लेने की बात की पर दर्जी नहीं माना और वो राजा के पास गया और शिकायत की |
थोड़ी देर में राजा के सिपाही उन दोनों साधुओं को पकड़ कर ले आई और राजा के सामने उपस्थित किया और उनको ही राजा ने चोर ठहराया |
राजा ने दोनों साधुओं को सजा सुना दी | सिपाही उनके हथकड़ी लगा कर जेल में ले जाने लगे |
ये देख वो जो महात्मा सुबह दरबार आए हुए थे वे बोले “ठहरो ! महाराज ये चोर नहीं है , ये दोनों साधू तो सुबह मेरे आश्रम गये थे पर मुझे वंहा न पाकर मेरे प्रति गलत धारणा बना बाजार आये थे और इस दर्जी के रूपये तो इसीकी जेब में ही रखे है इसने ढंग से देखे ही नहीं|”
Sadhu Mahatma Ki Hindi Kahani for kids
ये सुन सारा दरबार सन्न रह गया |
जब उन दोनों साधुओं से पूछा गया तो उन्होंने भी बताया कि ये सच है कि हमने इनको स्वार्थी और संसारी समझने की भूल की |
दर्जी ने जब अपनी जेब देखी तो रूपये उसमें ही पड़े थे , ये जान कर राजा ने उसे दंड दिया |
राजा ने दोनों साधुओं को छोड़ दिया| अब वे साधू और महात्मा तीनों आश्रम की ओर रवाना हो गये | रास्ते में महात्मा ने कहा कि अब समझ आया कि मैं क्यों राज दरबार जाता हूँ | ताकि तुम जैसे बेगुनाह लोग अन्याय का शिकार ना हो , और दर्जी जैसे बेईमान लोग गलत फायदा ना उठा सके |साधुओं का अब उन महात्मा के प्रति अपार श्रद्धा का भाव था|
शिक्षा :- बिना सच जाने किसी के बारे में अपनी अवधारणा नहीं बना लेनी चाहिए |
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