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ऐसे थे अशोक मौर्य Aise the Ashok maurya Hindi story for kids
ऐसे थे अशोक मौर्य aise the ashok maurya Hindi story for kids
ऐसे थे अशोक मौर्य
मौर्य वंश के तीसरे शासक सम्राट अशोक मौर्य का शासनकाल लगभग 268 ईसा पूर्व से 232 ईसा पूर्व तक था, और उन्होंने लगभग 42 वर्षों तक शासन किया। लगभग 260 ईसा पूर्व कलिंग के युद्ध में अशोक की सेना द्वारा लाखों लोगों की निर्मम हत्या करी गई , इस युद्ध के नरसंहार के बाद अशोक का हृदय परिवर्तन हो गया और वे शांति और सेवा के रास्ते पर चलने लगे |
इस युद्ध के दो तीन वर्ष बाद कलिंग में भयंकर अकाल पड़े और अन्न की भारी कमी हो गई | लोग अनाज के लिए जगह जगह भटकने लगे, कई स्त्री, पुरुष, बच्चे भूख से मरने लगे |
ऐसे हालात में अशोक ने अपने खजाने में से जगह जगह अनाज वितरण का कार्य शुरू किया , जिस पर बहुत सारे लोगों को अनाज वितरण किया जाने लगा |

राज्य के सेवक दिन रात काम करते थक जाते पर अनाज लेने वाले आते ही रहते , लम्बी लम्बी कतारें लग जाती |
एक दिन अशोक वेश बदल कर अनाज वितरण का जायजा लेने निकला, वो जिस जगह गया वंहा सुबह से सेवक लोगों को अनाज बाँट रहे थे, दिन अब पूरा होने को था, वे भी थक चुके थे, थोड़े से लोग रहे थे उनमें सबसे अंत में एक बुढा आदमी खड़ा था उसकी बारी आती इससे पहले सेवकों से अनाज बांटना बंद कर दिया|
वो बुजुर्ग उन सेवकों के पास आया और अपना दुःख सुनाने लगा पर सेवकों ने उसको दुत्कार कर भगा दिया |
ये सब अशोक वहां खड़े खड़े देख रहा था, पर उसे किसी ने नहीं पहचाना | वो उन सेवकों के पास गया और उनसे कहा कि देखो ना कितना बुढा आदमी है सुबह से खड़ा है , सभी धक्का देकर आगे निकल जाते है और ये सबसे पीछे रह गया, किसी तरह इस बुजुर्ग को अनाज दिया जाये नहीं तो मैं तुम्हारी शिकायत राजा से कर दूंगा |
राजा से शिकायत के भय से उन सेवकों ने उस बुजुर्ग को अनाज की पोटली भरा दी , पोटली भारी हो गई तो अब उससे उठाई नहीं जाये | अशोक ने वो पोटली अपने कंधे पर ले ली और कहा चलो बाबा आपको अपने घर पहुंचा दूँ |

अब बुजुर्ग के आगे आगे अशोक वो अनाज की पोटली लिए चलने लगे , उसके घर से थोड़ा सा पहले सैनिकों की एक टुकड़ी सामने आई , सैनिकों ने अशोक को अभिवादन किया पर अशोक ने इशारा कर के उनको वंहा से रवाना कर दिया |
बुजुर्ग को अब समझ आया कि ये कोई साधारण युवक तो नहीं है , बुजुर्ग वहीँ रुक गया और पूछने लगा कि आप कौन है ? अशोक ने बात को टालने की कोशिश की और कहा कि बाबा मैं तो साधारण नवयुवक हूँ बस आपकी मदद करने के लिए आपके साथ आया हूँ , बताइए आपका घर कितना दूर है |
पर वो तो जिद्द पर आ गया कि अगर आप सच नहीं बताएँगे तो मैं यंही बैठा रहूँगा|
अशोक ने फिर कहा कि बाबा मैं तो सिर्फ आपका सेवक है आप घर चलो |
अब बुजुर्ग को विश्वाश हो गया और वो बोला “ राजन आप तो प्रजापालक है और आज आपने मेरे से बहुत बड़ा गुनाह करवा दिया , मुझे माफ़ करे , अब ये पोटली मुझे दे दो ”
अशोक ने उसको गले लगा कर कहा कि आप मेरे राज्य के बुजुर्ग हो , और आपकी सेवा कर कोई गुनाह नहीं किया, ये तो मेरा कृतव्य है |
ऐसे थे अशोक मौर्य Aise the Ashok maurya Hindi story for kids
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