कुसंगत का फल
kusangat ka fal_short hindi story for kids
कुसंगत का फल
कुसंगत का फल kusangat ka fal_short hindi story for kids
चमूपति नाम का राजा अपने राज्य में सुख से राज कर रहा था। उसके एक पुत्र हुआ जिसका नाम रखा, श्रावस्त ।

श्रावस्त जब बड़ा हुआ तो वह बहुत ही शरारतें करने लगा और राजा के पास उसकी हमेशा कोई न कोई शिकायत आने लगी। राजा दुखी हो गए तो किसी ने सलाह दी कि श्रावस्त का विवाह कर देना चाहिए।
राजा ने श्रावस्त का विवाह भी कर दिया पर उसकी शरारतें नहीं रूकी, वह तो पहले से ज्यादा परेशान करने लगा।

उनके राज्य में शस्य नाम के एक ऋषि दूर जंगल में अपने आश्रम में रहा करते थे । एक बार ऋषि ने किसी यज्ञ का आयोजन किया और उसमें राजा को भी आमंत्रित किया।
राजा के रुकने की व्यवस्था आश्रम से दूर जंगल में की गई।
रात को राजा वहां पहुंचे और विश्राम करने लगे। वहां एक पेड़ पर एक तोता बार बार बोल रहा था, “ आज अच्छा शिकार आया है, आज अच्छा शिकार आया है”।
राजा ने जब ये सुना तो रात भर नींद नहीं आई।
सुबह जल्दी वे ऋषि के आश्रम पहुंचे।
जैसे ही राजा ने आश्रम में कदम रखा कि एक तोता बोला, “राम राम राजन, आपका स्वागत है”
राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ और फिर ऋषि को रात की सारी घटना बताई।

राजा की बात सुनकर वह तोता बोला, “वो तोता तो मेरा सगा भाई है, पर वह एक डाकू के वहां चला गया और उसके संगति में रह कर वो ऐसे शब्द सीख गया। यह सब संगत का फल है |
राजा को तुरंत अपने पुत्र का विचार आया और सोचा कि अवश्य मेरा पुत्र भी किसी कुसंगति के कारण ऐसा व्यवहार कर रहा है ।
यज्ञ समाप्ति के बाद राजा ने अपने पुत्र के मित्रों के बारे में पता किया और उनसे उनकी संगति छुड़ा दी। कुछ समय बाद राजकुमार का स्वभाव बदल गया। अब राजा फिर सुख से जीवन व्यापन करने लगे।
शिक्षा : कुसंगत का फल बुरा ही होता है |
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