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राजा ब्रह्मदत्त की प्रेरणादायक कहानी | नारी सम्मान और सुरक्षा की सच्ची सीख |
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📖 पूरी कहानी
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राजा ब्रह्मदत्त की प्रेरणादायक कहानी | नारी सम्मान और सुरक्षा की सच्ची सीख |
|| मुझे भाई चाहिए ||
काशी नगरी के नरेश ब्रह्मदत्त (Raja Brahmadatta) एक बार सिंहलद्वीप की यात्रा पर जाकर वापिस लौट रहे था तो उनको अपने साथ ही चले रहे जहाज में स्त्री का करूण स्वर सुनाई दिया, पास जाकर पता लगाया तो देखा कि कुछ लुटेरे एक स्त्री को बुरी तरह पीट रहे है |
ब्रह्मदत्त अपने जहाज से पास वाले जहाज में गए और क्रोध से फटकारने पर लुटेरे तो अपनी छोटी नाव से भाग गये| ब्रह्मदत्त ने उस स्त्री को उसके बारे में पूछा तो उसने बताया कि राजन ! मैं एक भारतीय नारी हूँ , इन्हीं लुटेरों ने मेरे पति को मार दिया है, और अगर इस समय आप नहीं आते तो ये मेरा शीलहरण करने पर उतारू थे |

मेरे दो पुत्र है पर वो अपने परिवार के साथ अलग रहते है, अब मैं मेरा जीवन यापन कैसे और किसके भरोसे करुँगी”?
ब्रह्मदत्त ने उस स्त्री से कहा “बहन आप चिंता न करो , आपकी पूरी मदद करी जाएगी, आप मेरे साथ मेरे वाले जहाज में चलो”
कुछ दिन में ब्रह्मदत्त का जहाज भारतीय समुद्र के तट पर पहुंचा , वहां पहले से हजारों स्त्री-पुरुष अपने राजा के आगमन का स्वागत के लिए खड़े थे, स्वागत के बाद राजा ने उस स्त्री से कहा कि “देखो यहां जितने लोग खड़े है ये सब मेरी प्रजा है इनमें से तुम जिसे चाहो उस से विवाह कर उसके साथ सुख से रह सकती हो”
राजा की बात सुन कुछ नवयुवकों ने अपनी आशा भरी नज़रों से उसे अपनी पत्नी ही स्वीकार कर लिया|
उस स्त्री ने कहा कि “विवाह से तो राजा पति मिलेगा , उस से पहले भी कोई सुख नहीं मिला, उसके लिए तो मैं सिर्फ वासना का साधन मात्र बनूँगी , मुझे पति नहीं चाहिए”
राजा ने कहा कि फिर “तुम किसी नवयुवक को अपना पुत्र बना लो और उसके साथ रह लो”
उस स्त्री ने कहा कि “दो पुत्र तो राजा मैंने खुद अपनी कोख में पाल कर बड़े किये पर वो सुख नहीं दे पाए, अपने बाल-बच्चों के साथ अलग रहने लग गये , इसलिए पुत्र नहीं चाहिए”
अब राजा की उत्सुकता बढ़ गई और अनायास मुँह से निकल गया “फिर तुम्हें क्या चाहिए?”
उस स्त्री ने कहा कि “राजन मुझे तो भाई चाहिए जो मेरे शील और धर्म की रक्षा कर सके”|
राजा ने अपनी प्रजा की ओर देखा पर सभी अपनी नजरें नीचे किये खड़े थे , राजा समझ गये कि कोई भी इसको अपनी बहन नहीं बनाना चाहता है तो राजा ने कहा “आओ, फिर आज से मैं ही तुम्हारा भाई ,अब तुम मेरे ही घर चलो”
राजा ब्रह्मदत्त उस स्त्री को अपनी बहन बना कर घर ले गये और उस स्त्री को अपने धर्म और शील की रक्षा करने वाला एक भाई मिल गया|
👍 इस कहानी से सीख
- 👍 नारी को धन, पति या पुत्र से पहले सुरक्षा और सम्मान की आवश्यकता होती है।
- 👍सच्चे रिश्ते वही होते हैं जो उनकी रक्षा और मर्यादा को बनाए रखते हैं।