राजकुमार की मृत्यु किसने की? बहेलिया, मृत्यु या कर्म |
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जब कर्म ने दिया जवाब – राजकुमार की रहस्यमयी मृत्यु की कहानी
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एक बार एक राजा का कुमार जंगल में आखेट खेलने गया| धूप तेज होने के कारण राजकुमार एक पेड़ के नीचे पैर पर पैर चढ़ा कर लेटे हुवे थे | संयोग से एक बहेलिया (Hunter) आखेट (शिकार) की खोज में भटक रहा था , उसने राजकुमार के पैर को किसी हरिण का सिर समझ कर अपना तीर चलाया और राजकुमार की मृत्यु हो गई |

राजकुमार के साथी , सेवक राजकुमार के शव को लेकर राजमहल गये, राजपरिवार बहुत ही गहरे दुःख में डूब गये , दाह संस्कार किया| शोक से उबरने के बाद उस बहेलिये को राजा के सामने लाया गया , राजा ने पूछा “बता बहेलिये! तूने मेरे राजकुमार को क्यों मारा? क्यों न इस अपराध के लिए तुझे भी मौत की सजा दी जाये”|
बहेलिये ने हाथ जोड़ कर राजा के प्रधानमंत्री की ओर देखते हुवे कहा कि “महाराज इसमें मेरा कोई दोष नहीं है ये काम तो मृत्यु ने किया है , मैं तो बस इसका माध्यम हूँ , आप चाहे तो प्रधानमंत्री से पूछ सकते है”|
राजा ने बहेलिये की बात पर हैरत करते हुवे प्रधानमंत्री की ओर देखा|

प्रधानमंत्री ने तुरंत मृत्यु के देवता को बुला लिया और तब राजा ने मृत्यु के देवता से राजकुमार की मौत का कारण पूछा तो मृत्युदेव बोला “महाराज ये काम तो काल ने किया”
काल को बुलाया गया तो काल ने कहा कि “इसमें मेरा कोई दोष नहीं है ये तो राजकुमार के कर्मों का फल है”|
अब कर्म को बुलाया गया , कर्म ने कहा “महाराज मैं तो चाहे अच्छा होऊं या बूरा , मैं तो जड़ हूँ, आप आत्मा को पूछिए वो बता सकती है इसका कारण”
अब बहुत यत्न करके राजकुमार की आत्मा का आह्वान किया गया , आत्मा हाजिर हुई तो आत्मा ने कहा कि पिछले जन्म में मुझे हिरन खाने का मन हुवा था और एक हिरन का आखेट किया था, ये बहेलिया हिरन था और राजकुमार आखेटक , बस ये उस जन्म का कर्म जिसका फल अब उसी हिरन ने बहेलिया बन कर दिया|
अब राजा को समझ आ गया कि कर्मों का हिसाब चुकाना ही पड़ता है |