“क्या आपने कभी लकड़ी के खिलौने वाले घोड़े पर बैठकर पूरी दुनिया, चांद-तारों और परिलोक की सैर की है? आज के स्मार्टफोन और वीडियो गेम्स के दौर में, बच्चों की कल्पनाओं को पंख देने वाली यह जादुई कविता ‘बढ़ चल अरे! काठ के घोड़े’ बच्चों को एक ऐसे रोमांचक सफर पर ले जाएगी, जहां उनका खिलौना चेतक बनकर उड़ने लगता है! वीडियो बनाने और ब्लॉग पर पढ़ने के लिए बेस्ट बालगीत!”
बढ़ चल अरे! काठ के घोड़े, देख न लग पाए ये कोड़े |
बच्चों की सबसे जादुई और संपूर्ण कविता (Kath Ke Ghode Ki Kavita)
बचपन में एक साधारण सा लकड़ी का घोड़ा (काठ का घोड़ा) भी किसी बच्चे के लिए असली और दुनिया के सबसे ताकतवर घोड़े जैसा होता है। बच्चे उस पर बैठकर राजा-महाराजा बन जाते हैं और पूरी दुनिया की सैर कर आते हैं। यह कविता बच्चों की उसी मासूम और असीमित कल्पनाशीलता को दर्शाती है, जहां उनका प्यारा खिलौना देश-विदेश, पहाड़ों, और अंतरिक्ष की सैर कराता है।
बढ़ चल, अरे ! काठ के घोड़े !
देख, न लग पाए ये कोड़े !
कदम मिलाता जा तू ठक-ठक,
कदम उठाता जा तू ठक-ठक,
कान सटाए, शीश उठाए,
ढापें भरता जा तू ठक-ठक,
तू है मेरा घोड़ा बाँका,
तू है घोड़ा बड़ा लड़ाका,
मैदानों में, खलिहानों में,
देता उचक-उचक कर डाका;
कदम-कदम में जीवन तेरा,
कदम-कदम में यौवन तेरा,
आन-बान से, मधुर शान से,
पूरित पिछला बचपन तेरा;
मुन्ने की तू सहज सवारी;
मुन्नी की तू सहज सवारी;
चंचल टीनू, जगमोहन के
बस्ते तुझ पर भारी-भारी;
चाल बदल ले दुलकी-दुलकी
नन्ही-नन्ही हलकी-फुलकी.
जगर-मगर तू अरे ! रोशनी
इन गुड्ड-गुड़ियों के कुल की;
हरी घास में जम जाना तू,
किन्तु न इसमें रम जाना तू,
तेरे साथी तुझे हेरते
अरे ! न किंचित थम जाना तू;
तेरे पथ में फूल बनेंगे नतमस्तक होकर ये रोड़े !
बढ़ चल अरे ! काठ के घोड़े, देख न लग पाए ये कोड़े !
अहा ! रश्मि यह नीली-पीली
लगती है कितनी चमकीली !
धूप-चाँदनी में हिल-डुल कर
ऐंठ रही-सी छैल छबीली;
जिधर मुड़े यह, मुड़ जाना तू,
तनिक न रह-रह सकुचाना तू,
हाँफेंगे ये दोनों नथुने
पीठ न लेकिन दिखलाना तू;
अरे ! सामने नन्ही शाला,
दूर तलक फैला उजियाला,
ले चल हौले वीर-बहादुर
करता क्या यों बैठा ठाला ?
घण्टी बजती टनन-टनन-टन,
डण्डा पड़ता सनन-सनन-सन,
जान बचाकर चुपके-चुपके
होता नौ-दो ग्यारह कुन्दन;
साँपिन-सी यह सड़क निराली
टेढ़ी-मेढ़ी औ मतवाली,
द्रुम की दोनों ओर कतारें
जगह-जगह फैली खुशहाली
पुलकित-पुलकित कोना-कोना;
तब सम्मुख वह मृग का छोना,
तेरी मृदुल कुलाँचों में ही
जादू, जन्तर-मन्तर, टोना;
हिलते तेरे बाल सुनहरे,
पल-पल गिर-गिर उठ-उठ लहरे,
मालाओं से ढका सजा तू
विजय-पताका तेरा फहरे;
यातायात ठना अलबेला,
पों-पों-पों-पों एक झमेला,
अरे! सजग रह, हिनहिन कर कुछ
बिखर पड़े सम्मुख यह मेला;
तू तो अपने मन का राजा,
पलटूराम बजाता बाजा
सभी खड़े स्वागत में तेरे
आजा, बाँके, आजा, आजा;
यों न रूस, मत चटक-मटक तू
इधर-उधर मत अटक-भटक तू,
आँख, नाक क्यों यों छितराता,
बीच-बीच मत ग्रास सटक तू;
कितनी बार, हठीले तूने
कह दे अपने बन्धन तोड़े ?
बढ़ चल अरे ! काठ के घोड़े
देख, न लग पाए ये कोड़े !
कविता का सरल अर्थ (Simple Summary)
यह कविता बच्चों के एक लकड़ी के घोड़े (काठ के घोड़े) के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जो अपनी कल्पना में उसे दुनिया का सबसे फुर्तीला, वफादार और जादुई घोड़ा मान लेते हैं। बच्चे इस पर मुन्ना-मुन्नी और दोस्तों (टीनू, सोहन, मोहन आदि) को बिठाकर स्कूल, सड़कों और ट्रैफिक के मेलों को पार करते हैं। अंत में, यह काठ का घोड़ा अपनी जादुई कल्पना के पंख फैलाकर बच्चों को विंध्याचल पर्वत, चांद-तारे, परिलोक, अलकापुर और दुनिया के सात अजूबों (जैसे चीन की दीवार, पिरामिड, नील नदी, लंदन, वाशिंगटन और रोम) की सैर करा लाता है और मुरझाए दिलों को खुशियों से जोड़ देता है।
बच्चों के लिए एक्टिविटी / सवाल (Kids Engagement Questions)
- प्यारे बच्चों, कविता में लकड़ी के घोड़े को किस महान और वीर घोड़े की तरह बहादुर बताया गया है? (संकेत: च से नाम शुरू होता है)
- घोड़ा सैर करते हुए दुनिया के कौन-कौन से प्रसिद्ध शहरों और अजूबों को देखने जाता है? कमेंट में उनके नाम बताओ!
FAQ Schema (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
- प्रश्न 1: ‘काठ के घोड़े’ कविता में बच्चों के कौन-कौन से मित्रों के नाम आए हैं?
- उत्तर: कविता में मुन्ना, मुन्नी, टीनू, जगमोहन, कुन्दन, सोहन, मोहन, श्यामू, धीरू और कल्लू जैसे बच्चों के नाम आए हैं जो इस घोड़े की सवारी और खेल का आनंद लेते हैं।
- प्रश्न 2: कविता में घोड़ा दुनिया के कौन से प्रसिद्ध स्मारकों और नदियों को देखने जाता है?
- उत्तर: घोड़ा मिस्र के ऊंचे पिरामिड, चीन की विशाल दीवार और नील नदी के मुहाने को देखने जाता है।
- प्रश्न 3: इस बालगीत से बच्चों को क्या सीख मिलती है?
- उत्तर: यह बालगीत बच्चों के मानसिक विकास और कल्पनाशीलता को बढ़ाता है। यह सिखाता है कि खिलौने सिर्फ खेलने के लिए नहीं, बल्कि हमें आत्मनिर्भर, साहसी और नई चीज़ों को जानने के लिए उत्सुक बनाने का माध्यम हैं।
दोस्तों, बचपन की यादों को ताज़ा करने वाला और बच्चों की कल्पनाओं को उड़ान देने वाला यह जादुई बालगीत आपको कैसा लगा? इसे अपने व्हाट्सएप और फेसबुक पर छोटे बच्चों के पेरेंट्स के साथ ज़रूर शेयर करें! इस कविता का पूरा 3D एनिमेटेड वीडियो हमारे यूट्यूब चैनल पर आ रहा है, तो अपडेट रहने के लिए हमारे ब्लॉग को आज ही सब्सक्राइब करें। धन्यवाद!”