कर्मों का फल karma ka fal crow story ( Rebirth of a crow)
Karma ka fal crow story
सारा नाम की एक जर्मन महिला अपने परिवार के साथ रह रही थी , अपने पति और एक पुत्र के साथ उसका जीवन सुख से व्यतीत हो रहा था | पुत्र बड़ा हो रहा था पर भाग्य को कुछ और ही मंजूर था उसके पति की मृत्यु हो गई और गरीबी ने घर कर दिया, पुत्र और खुद को पालने के लिए उसने एक अमरीकी नागरिक से विवाह कर लिया और कुछ समय के बाद वह उसके साथ अमेरिका चली आई |
उसका पुत्र जर्मनी में ही रह रहा था, उसके फोग नाम का एक लड़का था , वह अपने पुत्र फोग को उसकी दादी यानि सारा के बारे में बताता रहता था |
फोग बड़ा होने पर धन कमाने के लिए अमेरिका चला आया और रोजगार की तलाश में भटकने लगा | एक दिन एक किसान के घर पर उसे खेत में काम करने का रोजगार मिल गया |
फोग अब अमेरिका में उस किसान के घर पर ही रहने लग गया तथा खेत का काम करता और छोटा मोटा घर का काम भी कर लेता | उस किसान के कोई संतान नहीं थी इस कारण वो उसका ख्याल रखते और उसको स्नेह से रखते थे| धीरे धीरे किसान की पत्नी ने अपने अमेरिका आने की कहानी बताई और जर्मनी की बात भी बताई| फोग ने अपने जर्मनी में पिता द्वारा सुनी कहानी जब बताई तो वे दोनों बहुत ही खुश हुवे और अब दादी पोता स्नेह से रहने लगे |
एक दिन फोग शिकार करने के लिए अपनी पिस्तौल लेकर किसी पक्षी की तलाश कर रहा था , उसी समय उसे एक बुढा सा कौवा पेड़ के उपर दिखाई दिया | फोग ने अपनी पिस्तौल से उस कौवे पर निशाना साधने का सोचा , इतने में सारा के पति आ गए , उन्होंनेह फोग की पिस्तौल नीचे करते हुवे कहा कि “ अरे ये क्या कर रहे हो , ये तुम्हारी दादी का प्रिय कौवा है इसे मारना नहीं है”|

फोग ने जब दादी से उस कौवे के बारे में पूछा तो दादी ने कहा कि “हाँ ! जब से मैं यहाँ आई हूँ तब से ये कौवा यंही रह रहा है और रोज आता है मेरे हाथ से खाना खाता , कुछ देर पास बैठा रहता है फिर इसी पेड़ पर बैठा रहता है |
थोड़े वर्षों बाद फोग अमरीकी सेना में सैनिक बन गया और ड्यूटी पर दादी से 200 किलोमीटर दूर रहने लगा , पर उसको अपनी दादी और वो कौवा याद आता रहता था |
एक दिन फोग अपने कमरे की बालकोनी में बैठा था इतने में वो ही कौवा कांच की खिड़की के बाहर की तरफ दिखाई दिया , फोग ने खिड़की खोली और कौवे को पहचान कर बहुत खुश हुवा | फोग ने उसे खाने को ब्रेड दी पर उसने खाई नहीं और चुपचाप फोग को देखता रहा , कुछ ही देर बाद में उसकी सांसे टूट गई | कौवे का इस तरह अचानक आना और फिर वहां आकर प्राण त्याग देना फोग के लिए रहस्य बन गया |
कुछ दिन बाद उसकी दादी के पति का लिखा हुवा एक पत्र मिला , उन्होंने लिखा कि तुम्हारी दादी का निधन हो गया और दादी के निधन के बाद वो कौवा भी यहाँ से चला गया है |
फोग को अब समझ आ गया कि वो कौवा यहाँ तक आ कर क्या कहना चाहता था , वो शायद दादी के निधन की खबर ही लेकर आया था पर अपना दुःख बताने से पहले वो भी दादी के पास परलोक चला गया |
फोग ने जान लिया कि ये साधारण कौवा नहीं बल्कि ये मेरे दादा ही है जो पुनर्जन्म ले कर फिर से दादी के पास रहे और अब फिर उस से मिलने चले गये |
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