माँ की सीख : हिंदी कहानी Maa Ki seekh short hindi story for kids
माँ की सीख वाली हिंदी कहानी maa ki seekh short hindi story for kids
रेनू और पालू के घर के बाहर एक बड़ा सा पेड़ थे | दोनों के कमरे की खिड़की पेड़ के पास ही थी| कुछ दिनों से एक चिड़िया और एक चिड़ा उस पेड़ पर घोंसला बना रहे थे | वे दोनों उस चिड़ा -चिड़िया को रोज अपनी चोंच में तिनके लाते देखते तो सोचते कि ये तिनके क्यों ला रहे ? एक दिन माँ से पूछ ही लिया तो माँ ने बताया कि वो अब अपना घर बना रहे है |
कुछ दिन के बाद पेड़ की एक डाली पर एक सुंदर घोंसला बन चूका था , और अब वे दोनों उसमें बैठे रहते |
एक दिन पालू पेड़ के उपर चढ़ गया, पालू को पेड़ पर देख दोनों चिड़ा -चिड़िया उड़ कर दूर चले गए और पालू पास जाकर देखता है कि उस घोंसले में दो गोल -गोल छोटे -छोटे सफ़ेद अंडे पड़े है | पालू के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा वो जोर से चिलाया ” ओह रेनू ! देख तो ये क्या पड़ा है घोंसले में ?”
रेनू दौड़ कर पेड़ के नीचे आई पर वो उपर नह्ही चढ़ सकी और अपने भाई से पेड़ पर चढाने का बार बार आग्रह करती रही पर वो खुद ही नीचे आ गया |
रेनू रोने लगी पर उसने माँ का डर दिखा उसे शांत करा दिया | थोड़ी देर बाद चिड़ा-चिड़िया वापिस अपने घोंसले में आ गये वो काफी देर तक बहार बैठे रहे |
थोड़ी देर में जब माँ आई तो रेनू ने बहुत ही भोलेपन से पूछा “माँ उस चिड़िया के घोंसले में गोल-गोल क्या है ?
माँ ने अचानक उसकी तरफ देखा और बोली ” अरे !तुमको उसके अंदर का क्या पता? तुम लोग पेड़ पर चढ़े थे क्या ?
रेनू ने तुरंत बोल दिया मै तो नहीं पर भाई पेड़ पर चढ़ा था उसी ने मुझे बताया |
माँ ने पालू को समझाते हुवा कहा , आज से कभी पेड़ पर नहीं चढोगे और उस घोंसले के हाथ भी नहीं लगाना |
थोड़े दिन के बाद एक दिन रेनू और पालू को ननिहाल जाना था तो माँ ने आज जल्दी उठा दिया था, वे दोनों अपने कमरे की खिड़की के पास बैठे थे | माँ पक्षियों को दाने डाल रही थी इतने में चिड़ा-चिड़िया उड़ कर दाने चुगने आ गये |
रेनू का ध्यान पेड़ के घोंसले की तरफ था , उसे लगा कि घोंसले के अन्दर चिं-चिं की आवाज आ रही है , उसने अपने भाई को बताया , उसने भी उधर अपना कान लगाया | दोनों को अब लगा कि घोंसले के अंदर वो दोनों अंडे बोल रहे है या कोई तो और चिड़िया है जो बोल रही है | पर आज तो उनको ननिहाल जाना था तो वे देख नहीं सके |
आठ बजे वाली बस से वे अपनी माँ के साथ ननिहाल चले गए , मामा की शादी थी तो पूरा पांच दिन रुकना था | ननिहाल पहुँच कर बच्चे मामा की शादी का आनंद लेने लग गये, पर कभी कभी उनको उस घोंसले की याद आ जाती |
शादी के बाद अब वे वापिस अपने घर आ गये , आते ही उन्होंने घोंसले की तरफ देखा तो चिड़ा-चिड़िया अपनी चोंच से कुछ दाने ला रहे और अपनी चोंच उस घोंसले में डालते है और फिर उड़ कर और दाने लाते है | जब चिड़ा-चिड़िया दाना लेकर आते तो चिं-चिं की आवाज तेज हो जाती थी
माँ की सीख वाली हिंदी कहानी short hindi story for kids
दोनों बच्चों के मन में बार बार सवाल आ रहा था कि वो अंडे बोल रहे है |
पांच-सात दिन बाद शाम के समय रेनू ने देखा कि घोंसले के पास दो छोटे-छोटे चिड़िया के जैसे ही बच्चे बैठे है | वो दौड़ी-दौड़ी अपनी माँ को खींच कर ले आई , साथ में पालू भी आया |
घोंसले की तरफ अपनी छोटी से अंगुली से इशारा करते हुए बोली, ” वो देखो , वो क्या है ?
पालू ने देखा तो उसका तो मुंह फटा का फटा ही रह गया | उसने पहली बार इतने छोटे बच्चे देखे थे |
माँ ने दोनों को समझाते हुवे कहा ” हाँ , ये दोनों बच्चे उसी चिड़ा-चिड़िया के है , वे दोनों मत्ता-पिता है और ये इनकी संतान , अभी तक ये छोटे है , इनके पंख अच्छे से खुले नहीं है , धीरे- धीरे ये उड़ना सीख जायेंगे तो फिर ये घोंसला छोड़ देंगे| ये तुम्हारी तरह अभी अपने माता-पिता पर आश्रित है , जब बड़े हो जायेंगे तो कहीं दूर चले जायेंगे |
रेनू बीच में बोल उठी “अपने मम्मी पापा को छोड़ कर के “
माँ ने कहा , हाँ |
“पर हम तो बड़े हो कर इनकी तरह आपको छोड़ कर नहीं जायेंगे” रेनू ने कहा |
माँ ने कहा ” हाँ , अपने माता-पिता के बुढ़ापे का सहारा संतान ही होती है पर इन पक्षियों में ये विवेक और भावना मनुष्य की तरह नहीं होती है | पर तुम विवेकशील प्राणी हो , इस लिए तुमको अपने माता-पिता की हमेशा सेवा करनी चाहिए और उनके साथ ही रहना चाहिए , इससे तुम्हारा संस्कार समृद्ध होते है
दोनों ने माँ की बात को गौर से सुना और बड़े हो कर हमेशा माता-पिता की बुढ़ापे में सेवा करने का वचन दिया |
कुछ दिन बाद चिड़िया का घोंसला खाली पड़ा था , ना वंहा चिड़ा -चिड़िया थे , न ही उनके बच्चे थे , पर रेनू और पालू आज भी अपने माता-पिता के साथ ही रह रहे थे |
माँ की सीख वाली हिंदी कहानी short hindi story for kids
moral शिक्षा :- यह कहानी हमें सिखातीं है कि हम चाहे कितने ही बड़े हो जाये पर अपने माता-पिता के साथ रहना चाहिए और उनकी बुढ़ापे में सेवा करनी चाहिए |
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