कहानी का परिचय

धैर्य का फल मीठा होता है कहानी

दिनेश और दयाल बहुत ही अच्छे मित्र थे और वे अपने गाँव में ही रहते थे, दोनों ने पढाई तो पूरी कर ली पर रोजगार के बारे में कभी सोचते भी नहीं थे , दिन भर पूरे गाँव में घूमते रहते, दूसरों के बारे में इधर -उधर की बातें करते रहते थे |
एक दिन वे गाँव की गली में कहीं से आ रहे थे तो सामने उनको एक भिखारी मिला , भिखारी ने बहुत ही दयनीय भाव से उनसे कुछ भीख मांगी | दोनों मित्रो के पास देने को तो कुछ था ही नहीं , दोनों एक साथ बोल पड़े “हमारे पास तो कुछ भी नहीं है , हम तो कोई काम भी नहीं करते”|

भिखारी की सीख ने बदली सोच

भिखारी ने कहा, इतने बड़े हो गये हो अभी तक कोई काम नहीं करते हो , ये तो बड़ी ही गलत बात है , आखिर कब तक माता-पिता के कमाए पर पलते रहोगे |

भिखारी की बात सुन कर दोनों एक दुसरे की तरफ देख कर शर्मिंदा हुवे| रात को खाना खा कर सो गये पर दिनेश को भिखारी की कही बात अभी भी कानों में गूंज रही थी, “ आखिर कब तक माता-पिता के कमाए पर पलते रहोगे | दिनेश सोचने लगा भिखारी सही ही कह रहा था, हमें भी कोई कारोबार करना चाहिए और यह बात वह दयाल को बताएगा और दोनों मिल कर कोई काम शुरू करेंगे |

जूतों की दुकान की शुरुआत

अगले सुबह वह जल्दी तैयार होकर दयाल के घर गया। दिनेश को आया देख दयाल तपाक से बोला “अरे भाई ! इतने जल्दी कैसे आ गये , मैं तो अभी नहाया भी नहीं”|
दिनेश ने कहा “तू आज जल्दी तैयार हो जा , आज कोई जरुरी बात करनी है”|
दयाल फटाफट नहा कर तैयार हो गया और अब वो दिनेश से पूछने लगा , हाँ अब बता क्या कह रहा था वो जरुरी बात”?

दिनेश ने कहा “मैंने सोचा है कि अब हम मिलकर कोई काम शुरू करेंगे और कुछ कमाई करेंगे , अब हम दिन भर बिना काम गाँव में नहीं घूमेंगे”|
दिनेश की बात सुनकर दयाल को बहुत ख़ुशी हुई। उसने तुरंत कहा, “पर हम क्या काम करेंगे?”
दोनों दिनभर सोचते रहे कि वे क्या काम शुरू करें अंत में तय हुवा कि उनके गाँव में हाथों से बनाये हुवे जूतों की दुकान खोलेंगे |
दोनों मित्रों ने कुछ रुपयों की व्यवस्था करी और फिर गाँव में एक दुकान किराये ली और बहुत सारे जूतों से दुकान भर कर शुरू कर दी |


दोनों मित्र सब रोजाना दुकान आते , दिनभर बैठे रहते पर आशा के अनुरूप दुकान में जूतों की बिक्री नहीं हो रही थी |
दयाल सोच रहा था , कुछ ही दिनों में हम अमीर बन जायेंगे, हमारे पास गाड़ी होगी , लोग हमें देखते ही पहचान लेंगे , हम बड़े सेठ है | पर दयाल के अनुरूप कुछ भी नहीं हुवा , दो चार महीने बीत गये , पर दिन को कोई इका दुक्का ग्राहक आता , जिस से दुकान का किराया भी देना मुश्किल हो रहा था |

दयाल ने क्यों छोड़ा कारोबार?


थोड़े दिन बाद दयाल ने दिनेश से कहा कि वो अब इस दुकान पर नहीं बैठेगा वो तो शहर जाकर कोई नौकरी करेगा |
दिनेश ने कहा , मित्र धैर्य रख , धीरे धीरे अपनी पहचान बढ़ेगी तो ग्राहकी भी बढ़ेगी |
दयाल को दिनेश की बात पर यकिन नहीं हुवा और वो शहर में नौकरी करने चला गया |
अब दिनेश अकेला दुकान चलाने लगा , कई महीने बीते पर कमाई अभी भी नहीं हो रही, धीरे धीरे उसका भी धेर्य टूटने लगा | वह सोचने लगा दयाल शहर जाकर कोई अच्छी नौकरी कर रहा होगा |

दिनेश का धैर्य और संघर्ष


दो-चार दिन वो ऐसे विचारों में खोया रहा और अंत में एक दिन तय किया कि कल अगर कोई अच्छा मुनाफा नहीं हुवा तो फिर दुकान बंद कर दूँगा और दयाल के पास शहर नौकरी करने चला जाऊंगा |

विदेशी ग्राहक से मिला बड़ा अवसर

अगले दिन वह दिन भर दुकान पर बैठा रहा पर कोई ग्राहक नहीं आया और वो निराश हो कर शाम को दुकान बंद करने की सोच रहा था इतने में एक विदेशी नागरिक जूतें खरीदने आया , उस विदेशी को बहुत सारे जूते पसंद आए और उसने सभी जूतों को खरीद लिया , वो वास्तव में एक दुकानदार था जो अपने देश में भारतीय जूतों की दुकान खोलना चाहता था उसे बहुत सारा माल चाहिये था | और आगे के लिए हमेशा दिनेश से माल खरीदने का वायदा कर के चला गया |
दिनेश को आज अपने धैर्य का ईनाम मिला , आज उसे बहुत मुनाफा भी हुवा, अब वो बहुत सारा और माल ले आया , हर महीने विदेश ऑर्डर भेजने लगा और उसका काम चल पड़ा , कुछ महीने बाद उसने बड़ी दुकान ले ली |

दयाल की वापसी

कई महीने शहर में नौकरी करने के बाद दयाल गाँव लौटा , वह दिनेश से मिलने उसकी दुकान आया, दयाल का अब रूखा -सूखा चेहरा और दुबला-पतला शरीर दिनेश पहचान नहीं पाया | जब दयाल ने कहा कि मैं दयाल ही हूँ , शहर में जाकर गाँव का खाना-पीना और शुद्ध वातावरण नहीं मिलने के कारण उसकी ये हालत हो गयी |

दिनेश ने कहा , मित्र तुममें धैर्य नहीं था , मैं कई महीने धैर्य धरे रहा और आखिर मेरा काम चल पड़ा , खैर कोई बात नहीं , अब तुम कल से मेरे साथ दुकान पर ही काम करोगे , शहर जितना यहीं कमा लोगे| और फिर दोनों मित्र उसी दुकान पर मिल कर काम करने लगे |

कहानी से मिलने वाली शिक्षा

“सफलता अक्सर उन लोगों को मिलती है जो कठिन समय में भी धैर्य बनाए रखते हैं। जल्दबाजी में हार मान लेने वाले अवसर खो देते हैं, जबकि धैर्यवान व्यक्ति अंततः सफलता प्राप्त करता है।”

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