“वसंत ऋतु के आते ही आम के पेड़ों पर बैठकर अपनी सुरीली आवाज़ से मिश्री घोलने वाली काली कोयल रानी बच्चों को क्या संदेश दे रही है? आइए बच्चों को प्रकृति के इस सबसे सुरीले गायक से मिलवाएं और पढ़ें कोयल की मस्ती और चतुराई से भरी यह जादुई कविता ‘कू-कू बोल रही है, गाँठें मन की खोल रही है’!”
कोयल रानी का बालगीत
कू-कू बोल रही है कोयल
बच्चों की सबसे मीठी और चंचल कविता
(Koyal Ki Kavita Hindi Mein)
बच्चों को पक्षियों की दुनिया हमेशा आकर्षित करती है, और जब बात कोयल की मीठी तान की हो, तो बाल-मन खुशी से झूम उठता है। यह कविता ‘कोयल’ बच्चों को न सिर्फ कोयल के रंग-रूप और उसकी मधुर आवाज़ से परिचित कराती है, बल्कि वसंत ऋतु के साथ उसके गहरे नाते को भी बेहद खूबसूरती से दर्शाती है।
काजल-सी है काली कोयल । मधुर-मधुर रसवाली कोयल । कुछ अपनी मस्ती में ऐंठी आम की फुनगी पर बैठी-
कू-कू- बोल रही है,
गाँठें मन की खोल रही है,
गूंज उठे वन के पथ सारे,
झाड़ो, बाग-बगीचे प्यारे; -
बरस रहीं मिश्री की डलियाँ,
स्वर की चलती ये रंगरलियाँ;
है वसंत से इसका नाता,
वहीं इसे, बस गाना भाता; -
सदा काम से बचती है यह,
चतुर, सभी को ठगती है यह;
है अमृत की प्याली कोयल ।
-भागो, मतवाली कोयल ।
कविता का सरल अर्थ (Simple Summary)
यह कविता बच्चों को वसंत की दूत ‘कोयल’ के बारे में बताती है। कोयल का रंग भले ही काजल जैसा काला होता है, पर उसकी बोली में गजब की मिठास होती है। वसंत ऋतु आते ही वह आम के पेड़ की सबसे ऊंची डाली पर बैठकर अपनी ‘कू-कू’ की तान से पूरे जंगल और बाग-बगीचों को मंत्रमुग्ध कर देती है। वह स्वभाव से थोड़ी नटखट और चतुर होती है, लेकिन अपनी अमृत जैसी मीठी वाणी से सबका दिल जीत लेती है।
बच्चों के लिए एक्टिविटी / सवाल (Kids Engagement Questions)
- प्यारे बच्चों, कोयल का रंग कैसा होता है? सफेद, हरा या काजल जैसा काला?
- कोयल को किस ऋतु (मौसम) में गाना सबसे ज़्यादा पसंद है? जल्दी से कमेंट में बताओ!
FAQ Schema (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
- प्रश्न 1: ‘कोयल’ कविता में कोयल कहाँ बैठकर गा रही है?
- उत्तर: कविता में कोयल अपनी ही मस्ती में झूमती हुई आम के पेड़ की सबसे ऊँची टहनी (फुनगी) पर बैठकर गा रही है।
- प्रश्न 2: कोयल की आवाज़ सुनकर बाग-बगीचों में क्या बदलाव आता है?
- उत्तर: कोयल की सुरीली आवाज़ से ऐसा लगता है जैसे मिश्री की डलियाँ बरस रही हों, और उसकी तान से वन के सारे रास्ते और बाग-बगीचे गूंज उठते हैं।
- प्रश्न 3: कोयल का नाता किस ऋतु से है और उसे चतुर क्यों कहा गया है?
- उत्तर: कोयल का गहरा नाता वसंत ऋतु से है। उसे चतुर इसलिए कहा गया है क्योंकि वह मेहनत के काम से बचती है और बड़ी होशियारी से दूसरों (जैसे कौवे) को ठगकर अपने अंडे उनके घोंसले में छोड़ देती है।
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