आसमान पर बालगीत: अम्मा देखो आसमान (Aasman Par Kavita) – बच्चों की बेहद प्यारी और शिक्षाप्रद कविता
“क्या आपका बच्चा भी रात को छत पर बैठकर आसमान के तारों और चंदा मामा को देखकर हज़ारों मासूम सवाल पूछता है? प्रकृति की सुंदरता और बच्चों की कल्पनाशीलता से भरी यह जादुई कविता ‘अम्मा देखो आसमान’ न केवल बच्चों का मन मोह लेगी, बल्कि उनके बाल-मन में उठने वाले अनगिनत रहस्यों के जवाब भी देगी! इस कविता को पूरा पढ़ें और अपने बच्चों को ज़रूर सुनाएं।”
बच्चों का मन एक कोरी स्लेट की तरह होता है, जहाँ आसमान की असीमित ऊंचाइयों को देखकर नए-नए विचार उमड़ते हैं। कभी वे बादलों में हिरण के बच्चे ढूंढते हैं, तो कभी टिमटिमाते तारों को मोती समझ बैठते हैं। आज के इस बालगीत में हम एक ऐसे ही मासूम बच्चे और उसकी माँ (अम्मा) के बीच की खूबसूरत बातचीत को कविता के माध्यम से जानेंगे, जो बच्चों को प्रकृति से जुड़ना सिखाती है।
अम्मा, देखो आसमान में
हुलस-हुलस सूरज मुसकाया,
लाल हुई पूरब की खिड़की
धरती का कण-कण बौराया।
आसमान में अम्मा, देखो
चाँद चमकता प्यारा-प्यारा,
शीतल-शीतल नन्हीं किरणें
डाल रहा हर ओर दुलारा।
अम्मा, बतलाओ ये लाखों
चमक रहे क्यों चम-चम मोती?
लहर लहर कर नभ की गङ्गा
कभी इन्हें क्या मल-मल धोती?
हंस, कबूतर, चकवे-चकवी
फर-फर फुर-फुर उड़ते जाते,
वन-वन, उपवन, पर्वत, नाले,
लांघ रहे पल-पल हर्षाते।
दूर-दूर तक फैल रहा सा
बोलो, क्या है नीला-नीला?
समझ न पाया राज सकल में
समझ न पाया प्रभु की लीला!
बोलो, नभ का आदि कहां है
अन्त कहां है, बोलो, बोलो?
शून्य इधर क्यों, शून्य उधर क्यों
इस रहस्य की घुण्डी खोलो।
अम्मा, देखो आसमान यह
पृथ्वी से क्यों मिलने जाता -
दूर क्षितिज पर, दूर क्षितिज पर
कानों में क्या कह-कह जाता?
कभी सलोने, मृगछौने से
दीख रहे ये कैसे बादल?
मचल-मचल छाती पर नभ की
विहंस रहे क्यों कुल-कुल खल-खल?
घू-धू-धू-धू शोर मचाता
वायुयान यह कैसा आया?
चीर-चीर कर कोना-कोना
इसने नभ मण्डल सिहराया।
अम्मा, किस पर टिका हुआ है
तीन लोक से अम्बर न्यारा?
हार गए शत वीर बांकुरे
लेकिन यह तो कभी न हारा!
इसे निहारा कल मैंने था
और आज भी इसे निहारा,
नहीं रहा बढ़, नहीं रहा घट
देता इसको कौन सहारा?
अम्मा, मेरी चाह यही है
आसमान में उड़-उड़ जाऊँ,
आसमान से बातें कर लू
आसमान को गीत सुनाऊँ!
कविता का सरल अर्थ (Simple Summary)
इस कविता में एक छोटा बच्चा अपनी माँ से आसमान के अनगिनत रहस्यों के बारे में पूछ रहा है। वह सुबह सूरज के मुस्कुराने, रात को चांद की शीतलता और आसमान में चमकते मोतियों जैसे तारों को देखकर अचंभित है। वह बादलों में जानवरों की आकृतियां देखता है और हवाई जहाज की उड़ान देखकर रोमांचित हो जाता है। अंत में, बच्चे की केवल यही इच्छा है कि वह भी पंख फैलाकर इस नीले आसमान में उड़ जाए और बादलों को अपना गीत सुनाए।
बच्चों के लिए मज़ेदार एक्टिविटी / सवाल (Kids Engagement Questions)
- प्यारे बच्चों, जब आप आसमान की तरफ देखते हैं, तो आपको बादलों में किस जानवर का चेहरा दिखाई देता है? जल्दी से कमेंट में बताओ!
- क्या आपकी भी इच्छा इस कविता के बच्चे की तरह आसमान में उड़कर चंदा मामा से बातें करने की होती है
FAQ Schema (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
- प्रश्न 1: ‘अम्मा देखो आसमान’ कविता में बच्चा अपनी माँ से क्या-क्या सवाल पूछ रहा है?
- उत्तर: बच्चा अपनी माँ से पूछता है कि सुबह सूरज क्यों मुस्कुराता है, रात में चांद क्यों चमकता है, ये लाखों तारे आसमान में किसने बिखेर दिए हैं और यह विशाल आसमान बिना किसी सहारे के किस पर टिका हुआ है।
- प्रश्न 2: कविता में बादलों की तुलना किससे की गई है?
- उत्तर: कविता में आसमान में तैरते हुए सलोने और सुंदर बादलों की तुलना हिरण के छोटे और प्यारे बच्चों (मृगछौने) से की गई है।
- प्रश्न 3: इस कविता के अंत में बच्चे की क्या इच्छा या चाहत है?
- उत्तर: बच्चे की यह चाहत है कि वह भी पंख लगाकर दूर आसमान में उड़ जाए, वहां जाकर आसमान से ढेर सारी बातें करे और उसे अपना सुंदर गीत सुनाए।
एक निवेदन :
“छोटे बच्चों के मन को छू लेने वाला यह बालगीत अगर आपको पसंद आया हो, तो इसे अपने स्कूल ग्रुप्स, पेरेंट्स और छोटे बच्चों के साथ व्हाट्सएप पर ज़रूर शेयर करें! इस कविता का शानदार एनिमेटेड वीडियो जल्द ही हमारे YouTube चैनल पर आने वाला है, इसलिए हमारे ब्लॉग को अभी सब्सक्राइब करें और सपोर्ट करें। धन्यवाद!”
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