Mil kar pakai garm garm khichadi hindi story with a moral
सब ने मिल कर जब पकाई गर्म गर्म खिचड़ी हिंदी कहानी (HINDI KAHANI)
आइये , आपको आज एक सुंदर कहानी वो भी हिंदी भाषा में सुनाता हूँ, वो भी Short story in Hindi
गर्म गर्म खिचड़ी garm-garm-khichadi-hindi-story
Hindi story for kids
राजस्थान (भारत के एक राज्य) के एक गाँव में ओरण (पशुओं के लिए छोड़ी गई भूमि ) के अंदर एक बड़ा सा खेजड़ी(राज्य वृक्ष) का पेड़ था , उस पेड़ के ऊपर बहुत सारे पक्षी रहते थे , और उसी पेड़ के नीचे दोपहर में बहुत सारे पशु आराम करने आते थे |
उसी पेड़ पर एक रहती थी चिड़िया जिसका नाम था चुन्नी , चुन्नी सुबह से शाम तक चार बार पास के गाँव के बाजार जा आती, अपना पेट भर आती और आते समय अलग अलग तरह के दाने ले आती और अपने घोंसले में जमा कर देती ताकि कभी ख़राब मौसम या बुरे वक्त में काम आये |
पेड़ पर एक कौवे ने भी अपना घर बना रखा था , वह भी दिन भर खेतों में जाता और अपना पेट बार कर चिड़िया की तरह दो चार दाने अपने परिवर के लिए ले आता |
सावन महीने के दिन थे , बरसात का मौसम था, कल रात से बरसात की झड़ी लग गई थी, ऐसे में बाहर आना जाना कम था , कुछ ठंडी हवा भी चल रही थी , कुछ और पक्षी भी पत्तों की ओट में डालियों पर सिकुड़ कर बैठे थे , पेड़ के नीचे गाय थी, बकरी थी ,भेड़ थी , एक कुत्ता भी था , पेड़ के थोड़ा ऊपर एक शाखा पर एक गोगड़ बिल्ला (जंगली बिल्ली ) भी भीगा हुवा बैठा था | थोड़ी दूर एक बिल में पानी हर जाने से उसमें से एक चूहे का परिवार भी जड़ों में आकर छिप गया था
बच्चों , आप पढ़ रहे है hindi story for kids जो मिलझूल कर रहने की सीख देगी |
अचानक कौवे ने अपने पंख फड़-फड़ाये और चिड़िया को कहा “ आज मौसम गजब का बना है , कुछ पार्टी हो जाये, अगर गर्म गर्म हो कुछ तो मज़ा आ जाये”
चिड़िया भी यही सोच रही थी , तुरंत बोल पड़ी “ तुमने मेरे मन की बात छीन ली , चलो ! फिर चलते है बाजार”
“पर बाजार तो बंद है, दिख नहीं रहा बरसात जो हो रही है,” कौवे ने कहा। “अरे हाँ ! तो फिर क्या किया जाये “ चिड़िया बोली |
आज तो घर पर ही कुछ हो जाए तो कैसा रहेगा ? कौए ने अपनी बात कही |
चिड़िया ने कहा मेरे पास बहुत सारी दाल पड़ी है और वो भी भीगी हुई|
और मेरे पास चावल पड़े है , वो भी भीगे हुवे , कौवे ने कहा |
तो बना लेते है खिचड़ी पार्टी | दोनों एक साथ जोर से बोले |
पेड़ के आस पास और ऊपर नीचे जितने जीव जंतु थे , सब ने सुना तो सब की आँखों में चमक आई और अपनी भाषा में सबने अपनी सहमती और भागीदारी भी तय कर दी |
चूहा फुदका और जोर से बोला , “ चूल्हा बनाने का काम मेरा , अभी खोद देता हूँ” , ऐसा कह कर पूरा परिवार तो अपने काम में लग गया |
कौवे ने कहा कि कोई बर्तन भी हो बड़ा सा जिसमें दाल-चावल डाल कर पकाए |
बागड़ बिल्ले ने नीचे जम्प लगाया और सीधा भागा खेत की तरफ , कल उसने खेत में एक किसान के घर के बाहर एक हांड़ी पड़ी देखी थी, वो गया और उसको ले आया |
चूल्हे पर हांड़ी रख दी , चिड़िया और कौवे में अपने जमा किये दाल और चावल के दाने सब उसमें डाले|
इतने में गिलहरी बहुत सारी लकड़ियाँ इकट्ठी करने लगी और फिर आग जलाई |थोड़ी ही देर में अनाज के पकाने की महक आने लगी , सारी ओरण में खिचड़ी की सुगंध फैलने लगी |
गाय ने कुछ ताजे मखन का इंतजाम किया , बकरी ले आई दूध |
जब खिचड़ी पक गई तो सब बैठ गये खाने | परोसने का जिम्मा लिया गिलहरी ने | पहले छोटों को खिलाया और फिर बारी आई बकरी और गाय की |सब खिचड़ी खा कर खुश थे और मिल कर मस्ती कर रहे थे
तो देखा आपने इस हिंदी कहानी में कैसे सब ने मिल-झूल कर अपना काम भी किया और मस्ती भी |
HINDI की ये story आपको अपने दोस्तों के साथ मिल- झूल कर रहना और काम में हाथ बटाने का संदेश देती है |