कंजूस सेठ की कहानी हिंदी में | Kanjoosi Ki Keemat Moral Story

कंजूस सेठ की कहानी हिंदी में | Kanjoosi Ki Keemat Moral Story
📖 पूरी कहानी
कंजूस सेठ की चौंकाने वाली कहानी हिंदी में | Kanjoosi Ki Keemat Moral Story
प्राचीन समय में एक गाँव में दामोदर नाम का कंजूस सेठ रहता था , सेठ का पास के शहर में अच्छा व्यापर चलता था, सुबह अपनी दुकान जाते और शाम को घर लौट आते थे, लक्ष्मी की बड़ी मेहरबानी थी| पर सेठ बहुत ही कंजूस थे , कंजूस भी इतने कि गुड़ पर मक्खी बैठ जाये तो उसे पकड़ कर चुस कर बाहर उड़ा कर आते|
सेठ की पत्नी बड़ी ही नेम धर्म वाली थी , उसने सेठ को कहा कि ग्यारस आने वाली है और ब्राह्मणों को घर बुला कर भोजन करना है |
सेठ ने ना चाहते हुवे भी हामी भर दी कि वो गाँव के किसी एक ब्राह्मण को न्योता दे आएगा|
खैर अगले दो चार दिन में सेठ ने अनेक ब्राह्मणों से बात की और उनसे पूछा कि वो कितना खाते हैं?
सारे ब्राहमण अपने आप को ज्यादा खाने वाला बताते , आखिर एक ब्राह्मण ने कहा कि वो बीमार है इस कारण वो सिर्फ एक सिक्के के ऊपर जितना अनाज आये उतना ही खाता है|
सेठ को इस ब्राह्मण वाली बात ठीक लगी, ग्यारस के दिन सुबह सेठ अपने घर वाली को कह कर गया कि आज सोमदेव ब्राह्मण घर आएगा उनको भोजन करा देना और दक्षिणा दे देना”
ऐसा कह वह उस ब्राहमण के घर गया और उसको अपने घर भोजन करने का न्योता दिया और कहा कि वो तो अपनी दुकान जा रहा शाम को आएगा , आप दिन में जाकर भोजन कर आना और दक्षिणा ले आना |
दिन को ब्राह्मण देवता सेठ के घर गये , सेठानी ने स्वादिष्ट भोजन बनाया , भोजन किया और अब अंत में दक्षिणा की बात आई तो सेठानी ने पूछा कि ब्राह्मण देवता! बोलो, दक्षिणा क्या दूँ ?
ब्राह्मण सेठ से भी ज्यादा लालची था उसने कहा , सवा मन आटा, पांच मन चावल, एक मन शक्कर , बीस किलो घी , पाञ्च सेर नमक और सवा दो सौ रूपया दे दो बस |
सेठानी ने जैसा कहा वैसा दे दिया और ब्राहमण देवता माल लेकर घर चले गये |
ब्राह्मण को पता था कि सेठ बड़ा कंजूस है शाम को घर आएगा तो दक्षिणा का पूछेगा , इतनी दक्षिणा का पता चलने पर वो वापिस लेने जरुर घर आएगा , इसलिए उसने अपनी घरवाली से कह दिया कि सेठ आये तो तुम रोने बैठ जाना कहना आप के घर भोजन कर के आये और आते ही सोये जो अभी तक नहीं उठे, वो तो मर गये |
शाम को सेठ अपने घर गया , सेठानी ने सारी बात सेठ को बताई अब सेठ तो कंजूस स्वभाव के कारण पहले सेठानी को लड़ा फिर दौड़ा ब्राह्मण के घर की ओर वो सामान वापिस लाने|
सेठ ने जैसे ही ब्राह्मण के घर के आगे जा आवाज लगाई, वैसे ही ब्राह्मण की घरवाली आँगन के बीच चारपाई पर सो रहे ब्राहमण के पास बैठी जोर जोर से रोने लग गई | सेठ आये तो थे क्रोध में पर अब क्रोध चिंता में बदल गया , अंदर जाकर पूछा “क्या हो गया”
ब्राह्मणी कहने लगी “आज आपके घर गये तब तक राजी ख़ुशी थे , वापिस आये तब से सो ही रहे है , साँस भी अटक अटक कर चल रही है पता नहीं क्या खिलाया , अब ये तो नहीं मर जायेंगे ”
सेठ के तो अब बात उलटी पड़ गई, अगर मर गया तो गाँव इसकी मौत का जिम्मेदार मुझे मानेंगे और फिर पता नही कितना दंड देना पड़े |
सेठ ने ब्राहमण की पत्नी को ढाढस बंधाते हुवे कहा “मैं तो पूर्णिमा के लिए और भोजन का न्योता देने आया था पर अब तबियत ठीक नहीं है तो कोई बात नहीं , ये लो 100 रुपये , इनका इलाज करा दो ,मैं कल फिर आऊंगा” इतना कहा कर सेठ तो ललाट का पसीना पोंछते हुवे घर की तरफ रवाना होगये |
सेठ के जाते ही ब्राह्मण देवता चारपाई से उठ खड़े हुवे और सौ रूपये लेकर उनकी पत्नी अपनी तिजोरी में रखने चली गई |
कंजूस सेठ की चौंकाने वाली कहानी हिंदी में | Kanjoosi Ki Keemat Moral Story
कहानी का सार (Summary)
कंजूस सेठ की कहानी हिंदी में | Kanjoosi Ki Keemat Moral Story
यह चौंकाने वाली कहानी एक कंजूस सेठ की है, जो अपनी कंजूसी के कारण एक चालाक ब्राह्मण के जाल में फंस जाता है और अंत में उसे नुकसान उठाना पड़ता है।
🌟 इस कहानी से सीख
- ✔️इस चौंकाने वाली कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि अत्यधिक कंजूसी और लालच हमेशा नुकसान का कारण बनते हैं। हमें संतुलित जीवन जीना चाहिए और जरूरत के अनुसार खर्च करना ही चाहिए|
- कंजूस सेठ की कहानी हिंदी में | Kanjoosi Ki Keemat Moral Story, यह कहानी हमें पंचतंत्र की कहानियों की तरह सीख देती है |
🌟 मनोवैज्ञानिक कथन
“कंजूस व्यक्ति अक्सर इस सोच में डूबा रहता है कि उसके संसाधन अपर्याप्त हैं, जिसके कारण वह अपने पास मौजूद हर चीज को जमा करके रखता है“