जैसा बोवोगे , वैसा ही काटोगे |
प्राचीन ज़माने के पांचाल राज्य में सम्राट ब्रह्मदत्त का शासन था , पांचाल राज्य की राजधानी काम्पिल्य नगर में थी | एक बार ब्रह्मदत्त के पुत्र के पक्षाघात (लकवा) की बीमारी हो गई | पक्षाघात का इलाज करने के लिए जाने माने वैद्य आने बुलाये गए , सभी वैद्यों ने आपनी अपनी क्षमता के अनुसार इलाज करने का प्रयास किया पर राजकुमार को कोई लाभ नहीं हुवा |

इसी समय सम्राट ब्रम्हादत्त के महल में एक चिड़िया ने घोसला बनाया , कुछ दिन बाद उसने अण्डों में से दो बच्चे निकले | उसमे से एक बच्चे के भी पक्षाघात हो गया | ये चिड़िया का बच्चा और राजकुमार पिछले जन्म में अच्छे मित्र थे और दोनों ने मिलकर एक बार हरिन के बच्चे को अपने बाणों से एक तरफ से क्षत विक्षत कर दिया था इसलिए दोनों को एक ही समय पक्षाघात हुवा |
इस बात का रहस्य उस चिड़िया को पता था इस कारण वो चिड़िया अपने बच्चे का पक्षाघात का इलाज करने के लिए जंगल में गई और दो फल ले कर आई | एक फल उसने अपने बच्चे को दे दिया और एक फल उस राजा के बच्चे को दे दिया | फल खाने से राजकुमार और चिड़िया का बच्चा दोनों ही ठीक हो गये |
जब राजकुमार ठीक हो गया तो कुछ दिन बाद उसने खेलते खेलते उस चिड़िया के बच्चे को मार डाला | अपने बच्चे की मौत से चिड़िया बहुत दुखी हुई | राजा ब्रह्मदत्त को भी ये पता चला तो वो भी बहुत दुखी हुवे , वो उस चिड़िया का अहसान मानते थे क्योंकि उसकी वजह से ही राजकुमार की बीमारी का इलाज हुवा था |
अब चिड़िया अपने एक बचे हुवे बच्चे को लेकर राजा का महल छोड़ने की तैयारी कर दी तब राजा ने आकर उस से क्षमा माँगी और महल ने ही रुकने की प्रार्थना की |
चिड़िया ने कहा कि आपका पुत्र दुष्ट है, वह मेरे दुसरे बच्चे को मार डालेगा , मुझे अपने परिवार का सर्वनाश नहीं कराना है| ऐसा कह कर चिड़िया अपने बच्चे को लेकर उड़ गई और फिर कभी महल में नहीं आई |
शिक्षा :- आप जैसा कर्म करोगे उसका फल आप को देर सवेर भोगना ही पड़ेगा
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