karm se koi heen nahi hota story

श्री कृष्ण की सीख, कर्म से कोई हीन नहीं होता|

shree krishan with rishi  uttak
Shree Krishan with Rishi Uttang
rishi uttak उत्तक remember krishna

ऐसा आशीर्वाद दे कर श्री कृष्ण द्वारिका चले गये | कुछ दिन बाद मुनि को एक दिन किसी सुनसान रास्ते में जाते समय प्यास लगी पर आसपास कंही पानी नहीं था | मुनि उत्तक को श्री कृष्ण का वचन याद आया | उन्होंने अपनी ऑंखें बंद कर श्री कृष्ण का स्मरण किया | कुछ ही समय में एक चंडाल हाथ में पानी का पात्र लिए उनके सामने खड़ा है और वो कहने लगा “ मुनिवर ! आपको शायद प्यास लगी है मेरे पास जल है आप चाहे तो अपनी प्यास तृप्त कर सकते है |
चंडाल को देख कर वो पानी का आग्रह करने पर मुनि तो बौखल्ला गए , उसको दुत्कार दिया और वंहा से भगा दिया |
चंडाल के वंहा से जाने के बाद श्री कृष्ण प्रगट हुवे तो मुनि क्रोध में कहने लगे कि ये आपने क्या कर दिया?, पानी देकर किसे भेज दिया? मेरा तो सारा जीवन ही दूषित हो जाता |
श्री कृष्ण ने कहा “मुनिवर आपके लिए इंद्र स्वयं पानी ले कर आये थे , पर आपने उनको दुत्कार दिया, आपके लिए तो सब मनुष्य एक समान है , किसी को कर्म के आधार पर आपने दुत्कार दिया , ये आपको शोभा नहीं देता, मनुष्य को अपने कर्म से ऊँचा नीचा नहीं माना जाना चाहिए, कर्म से कोई हीन नहीं होता है|
श्री कृष्ण की बात सुन कर मुनि उत्तक को अपने किये व्यव्हार पर बहुत पछतावा होने लगा |

शिक्षा :- मनुष्य की पात्रता का आधार उसका कर्म नहीं उसका व्यवहार होता है|

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