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very funny joke in Hindi

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घनी दाढ़ी-मूँछ वाला हर आदमी सिख नहीं होता। इसी तरह एम. ए. पास या पी.एच.डी. किया हुवा कोई महाशय बुद्धिमान ही हो , यह कतई जरुरी नहीं है | गणित के प्रख्यात अध्यापक रामूराम जी को तो आप अवश्य ही जानते होंगे , गणित की अनेक किताबे उन्होंने लिखी जो देश-विदेश में प्रसिद्ध और प्रचलित है पर सब्जी खरीदते समय यदि आलू सत्रह रुपये किलो है तो तीन सौ ग्राम आलुओं के कितने रूपये देने , ये हिसाब लगाना उनके वश का रोग नहीं था| एक बार गाँव में एक गाड़ी वाला सात रूपये किलो तरबूज दे रहा था किन्तु रामू जी ने भाव कुछ कम करने को कहा| काफी देर बहस करने के बाद गाड़ी वाले ने कहा “गुरूजी , आपके लिए सात किलो के सौ रुपये लगा दूंगा , अब आपकी मर्जी है तो लो |रामू जी खुश हुवे और और सौ रुपये देकर सात किलो खरबूज घर ले आये , लगभग डेढ़ गुना ज्यादा मोल चूका कर भी वे खुद को शातिर समझ रहे थे |

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आशाराम जी मास्टर को पता नही किसी ने कह दिया कि गेंहूँ का वृक्ष नीम के पेड़ के बराबर होता है , उसके गेंहूँ झड़ते रहते है | आशाराम जी ने उसकी बात को मानते हुवे सहमति में सिर हिला दिया |

ये तो कुछ नहीं , स्वरूप जी मास्टर तो बाहर से कृषि में ट्रेनिंग कर के आये , एक बार वे ग्रामीण क्षेत्र में खेत देखने निकले तो एक किसान खेत में अनावश्यक झाड़ी-पौधे काट रहा था , स्वरुप जी उसके पास जाकर बोले, ये इतने हरे-भरे फल लगे आम के पेड़ क्यों काट रहे हो ? किसान ने कहा , आप सही कह रहे हो , आम होता तो नहीं काटता , पर ये आक का पौधा है महाशय , मारवाड़ में आम कहाँ?

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दर्शन शास्त्र के गुरूजी भवानी सिंह एक बार घड़ा लेने गये , कुम्हार ने एक उलटे रखे घड़े की ओर इशारा करके बताया , भवानी जी ने जैसे रखा था वैसे ही हाथ में लिया, बजाया और कहा “कुम्हार भाई , पहली बात तो इस घड़े के मुख ही नहीं , पानी कैसे भरा जायेगा ? और मान लो मुख बना दिया तुमने, तो भी ये नीचे से फूटा हुवा , पानी तो रहेगा भी नहीं |

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एक बार प्राणिशास्त्र के व्याख्याता मांगीलाल जी ट्रेन से जयपुर जा रहे थे , फलोदी स्टेशन पर ट्रेन रुकते ही खिड़की से सीट पर थैला फेंक ट्रेन में चढ़े , देखा सामने वाली सीट पर कोई गँवार आदमी किताब पढ़ रहा है | कुछ देर बाद मांगीलाल जी ने उस गँवार से कहा ” अगर आप बुरा नहीं माने तो एक प्रश्न पूछूं , जवाब सही दिया तो दस रूपये आपको , अगर ना दिया तो आप मुझे दस देंगे ” गँवार ने कहा “जी, वो तो बात ठीक है , पर आप पढ़े लिखे व्याख्याता और मैं तो चौथी क्लास पास , सवाल पहले मैं पूछूँगा , और सही जवाब दिया तो दस रूपये दूंगा , और अगर ना दिया तो बीस लूँगा”| मांगीलाल जी ने गँवार समझ उसकी शर्त स्वीकार कर ली |
गँवार ने पहला सवाल पूछा ” ऐसा प्राणी जिसके दो सिर , चार तीन आंख और छह पैर होते है | डिब्बे में मौजूद सब सिर और आँखें अब गँवार पर फोकस हो गई , बीच बीच में वो मांगीलाल जी को भी देख रही है
मांगीलाल जी प्राणिशास्त्र के व्याख्याता थे पर ऐसा प्राणी उन्होंने पढ़ा ही नहीं|
काफी देर दिमाग के घोड़े दौड़ाये, अंत में हार मान ली और बीस रुपये दे दिए , पर गँवार से पूछा “तुम तो बताओ “?
गंवार ने कहा , मुझे भी उत्तर पता नहीं , ये लो आपके दस रुपये | पूरा डिब्बा हँस रहा था , गँवार अब समझदार और व्याख्याता साहब गँवार बन चुके थे |

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