Gyan ka ahankar_hindi story for Kids

ज्ञान का अहंकार

Gyan ka ahankar_hindi story for Kids

पंडित जी ने कहा कि प्रश्न था “ पाप की जड़ क्या है?

उस महिला ने कहा कि वो उनका आतिथ्य स्वीकार करे और उनके यहां पधारे।

पंडित जी उस महिला के घर चले गए, भोजन किया और फिर रात्रि विश्राम के लिए किसी मंदिर में चले गए।

जाते समय उस महिला ने पंडितजी को दस सोने के सिक्के दिए, और कहा कि अगर रोज मेरे यहां भोजन करेंगे तो उनको दस सिक्के रोज देगी।

सोने के सिक्के
वैशया के कोठों पर नाच गान


समय पाकर एक दिन पंडितजी ने अपने मन की बात उस महिला से कह दी।

महिला ने पंडित को कहा कि ये ही आपके उस प्रश्न ‘पाप की जड़ क्या है?’ का उत्तर है।

पंडित जी ने कहा , कैसे?
आपने लोभ किया , पहले दस सिक्कों के लोभ से आप मेरे घर आने लगे, फिर आपको मेरे वहां हो रहे नृत्य गान से लोभ हुआ और फिर मेरे शरीर से।
लोभ के कारण ही आपके मन में वासना उत्पन्न हुई , और वासना के कारण आप पाप करने को तैयार हो गए। तो पाप की जड़ लोभ है।

मनुष्य को कभी भी अपने ज्ञान का अहंकार नहीं करना चाहिए |

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