“सनन-सनन का मधुर गीत गाकर पहाड़ों और बागों में झूमने वाली नटखट हवा कहाँ से आती है और कहाँ चली जाती है? कभी बांसों के झुरमुट में सीटी बजाती, तो कभी बादलों को खींच लाती—प्रकृति के इस जादुई और अदृश्य साथी से बच्चों को मिलवाने वाली संपूर्ण कविता ‘हवा, कहाँ से आती हो तुम’!”
सनन-सनन बहती हवा बालगीत:
हवा कहाँ से आती हो तुम?
बच्चों की सबसे मजेदार जादुई कविता
(Hawa Ki Kavita Hindi Mein)
हवा को कोई देख नहीं सकता, लेकिन उसकी छुअन को हर बच्चा महसूस कर सकता है। कभी वह ठंडी बनकर हमें कँपकँपी छुड़ाती है, तो कभी बादलों को लाकर बारिश कराती है। यह कविता बच्चों की उसी उत्सुकता को दर्शाती है जहाँ वे हवा के अलग-अलग रूपों—जैसे सूखी, गीली, गर्म और ठंडी हवा—को देखकर हैरान और खुश होते हैं।
हवा, कहाँ से आती हो तुम
और कहाँ यों जाती हो ?
सनन-सनन-सन, सनन-सनन-सन,
गीत कहो, क्यों गाती हो ?
इधर-उधर फिरती-फिरती-सी
टेकरियों पर घूम रही;
थिरक-थिरक पड़ती ये फलियाँ
यह अमराई झूम रही,
खींच रही लहरों का अंचल
नव श्रृंगार निखरता-सा;
अरी चंचले, इस मस्ती में
मधुर पराग बिखरता-सा !
बच्चों को भी, बूढ़ों को भी
बहुत-बहुत तुम भाती हो !
कभी-कभी चलती हो सूखी
और कभी चलती गीली,
धोती, कुर्ता और कमीजें
हो जातीं नानी-सी सीली;
कभी हिमालय की शीतलता
ले चलती मैदानों में,
कँप-कँप पड़ता कोना-कोना
ठण्ड पड़ी खलिहानों में,
बाँसों के झुरमुट में घुस-घुस
सीटी कभी बजाती हो ;
गरम-गरम सी साँसे भर-भर
कहो किसे कर याद रही ?
तुमसे ही तो इस अग-जग की
हर बस्ती आबाद रही;
फू-फू-फू-फू धूल उड़ाती
साथ कभी लाती बादल,
गगन ठगा-सा, चित्रलिखा-सा
तुम्हें निरखता चुप पल-पल ।
स्वच्छ चाँदनी, रात अँधेरी,
पर नित तुम हुलसाती हो !
कभी चिढ़ाती और खिझाती
पर न कभी देिखलाई;
हिला-हिला मस्तूल तरीका
नाच रही ता-ता थाई;
ठहरो तनिक, जरा सुस्ताओ
जादू-सा क्या खेल चली ?
दिशा-दिशा से नवजीवन का
भार अनोखा झेल चली !
उठा-उठा कर झोंके नन्हे
मधुर-मधुर बहलाती हो
कविता का सरल अर्थ (Simple Summary)
यह कविता बच्चों को हवा के जादुई और अदृश्य रूप से रूबरू कराती है। हवा जब ‘सनन-सनन’ करके चलती है, तो बाग झूम उठते हैं और कलियाँ थिरकने लगती हैं। हवा कभी सूखी होती है तो कभी गीली होकर कपड़े गीले कर देती है। जब यह हिमालय से आती है तो मैदानों में ठंड ले आती है और बाँसों के बीच से सीटी बजाती हुई गुज़रती है। यह धूल उड़ाकर बादल भी लाती है और अपनी मस्ती से सबको नया जीवन देती है।
बच्चों के लिए एक्टिविटी / सवाल (Kids Engagement Questions)
- प्यारे बच्चों, जब हवा बाँस के झुरमुट (पेड़ों) के बीच से निकलती है, तो वह क्या बजाती है? (संकेत: स से नाम है!)
- क्या आपने कभी हवा को देखा है? या सिर्फ महसूस किया है? कमेंट में बताएं!
FAQ Schema (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
- प्रश्न 1: हवा जब चलती है तो कैसी आवाज़ आती है?
- उत्तर: कविता के अनुसार जब हवा चलती है तो ‘सनन-सनन-सन’ और ‘फू-फू-फू-फू’ जैसी मजेदार आवाज़ें आती हैं।
- प्रश्न 2: हवा मैदानों में ठंडक और कँपकँपी कैसे लाती है?
- उत्तर: जब हवा ऊंचे और बर्फ़ीले हिमालय पर्वत की शीतलता (ठंडक) को अपने साथ समेटकर मैदानों की तरफ बहती है, तो हर कोना ठंड से कँपकँपा उठता है।
- प्रश्न 3: कविता में हवा को ‘चंचले’ और जादुई क्यों कहा गया है?
- उत्तर: हवा को चंचले इसलिए कहा गया है क्योंकि वह एक जगह नहीं टिकती; वह कभी बादलों को खींच लाती है, कभी नदी की लहरों को नचाती है, तो कभी बिना दिखे ही नाव के मस्तूल को ‘ता-ता थाई’ करवा देती है।
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