सम्राट अशोक की कहानी: श्रेष्ठ शासक कौन? | Best Hindi Moral Story
क्या केवल खजाना भरना और दुश्मनों को कुचलना ही एक अच्छे राजा की पहचान है? जानिए महान सम्राट अशोक ने किसे चुना देश का सबसे श्रेष्ठ शासक!”
श्रेष्ठ शासक और उसकी पहचान
Samrat Ashok aur shreshtha shasak story
मौर्य साम्राज्य के शासक अशोक मोर्य के शासन के समय की बात है एक बार उन्होंने अपने समस्त प्रान्तों के मुख्य मंत्रियों के द्वारा अपने प्रान्तों में किये जा रहे कार्यों की समीक्षा कर उनको समान्नित करने की सोची | अगले महीने में उनका जन्मदिन था अतः उन्हें यही अवसर उचित लगा, अगले महीने अशोक ने अपने जन्मदिन के अवसर पर अपने सभी प्रान्तों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया और इसका समारोह का आयोजन राजधानी पाटलिपुत्र (पटना) में रखा गया |
सम्राट अशोक का पुरस्कार
अशोक में घोषणा करवा दी कि जन्म उत्सव पर देश के सबसे अच्छे मुख्यमंत्री को पुरस्कार दिया जायेगा |
जन्मोत्सव के दिन देश भर के शासक इकट्ठे हुए , समारोह शुरू हुवा , अशोक सिहांसन पर आकर बैठे , दरबार के समस्त मंत्री और विभिन्न प्रान्तों से आये उनके शासक भी मौजूद थे|
अशोक ने अपने प्रान्तों के शासकों से प्रश्न किया कि आप सभी अपने प्रान्त में आपके द्वारा किये गये कार्यों को सबके सामने प्रस्तुत करे |
सबसे पहले उतर दिशा की तरफ वाले प्रान्तों के शासक थे , उनमें से एक शासक खड़े हुवे पर कहा कि “महाराज, हमारे प्रान्त में आमदनी पहले की तुलना में तीन गुना बढ़ गयी है”
फिर दक्षिण के तरफ एक शासक खड़े हुवे और उन्होंने कहा कि “महाराज , हमने हमारे प्रान्तों में सोने का खजाना दस गुना अधिक कर दिया है”
अगली बारी पश्चिम के तरफ के शासकों की थी , उहोंने कहा कि “हमने अपने शस्त्र बल से अपने सभी शत्रुओं को कुचल दिया है”
और फिर पूर्व के प्रांताध्यक्ष खड़े हुवे और बड़े ही घमंड के साथ कहा कि “महाराज, मैंने कर्मचारियों के वेतन कम कर दिए, राज्य खर्च को कम करने के बहुत सारे नियम लागू किए , इससे मेरे राज्यों की आमदनी में बढ़ोतरी हुई है |
मगध का सच्चा राजा
सबसे अंत में मुख्य प्रान्त मगध के शासक खड़े हुवे और वे बोले “महाराज, मेरे राज्य की आमदनी में कुछ कमी आई है, मैंने जन हित में कुछ कर बंद कर दिए थे, कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी की गई , ताकि वे आर्थिक परेशानी के कारण अपना काम ईमानदारी से करे , बहुत से नये चिकित्सालय, विद्यालय , धर्मशालाएं , और सड़कें कुवें और तालाब बनवाए है”|
सबकी बातें सुनाने के बाद सम्राट अशोक खड़े हुवे और उन्होंने अपना सर्व श्रेष्ठ शासक की पहचान बताते हुवे कहा कि “श्रेष्ठ शासक वाही होता है जो देश और उसकी प्रजा की भलाई के लिए कार्य करता है , मगध के शासक ने वाही कार्य किया जो एक अच्छे शासक को करना चाहिए अतः इस वर्ष का श्रेष्ठ शासक का पुरस्कार मगध के शासक को दिया जाता है”|
प्रजा और देश की भलाई को श्रेष्ठ बताने वाले सम्राट अशोक सचमुच अपने समय के महान शासक थे, इसी कारण उसे सभी प्रियदर्शी के नाम से पुकारते थे |
. कहानी की सीख (Moral of the Story)
- सीख: “सच्ची महानता और श्रेष्ठता केवल धन, संपत्ति या बल बढ़ाने में नहीं है, बल्कि अपनों की सेवा, प्रजा की भलाई और ईमानदारी को बढ़ावा देने में निहित है।”
और कुछ सवाल आप से :
- प्यारे दोस्तों, यदि आप सम्राट अशोक की जगह होते, तो क्या आप भी मगध के शासक को ही पुरस्कार देते? अपने विचार कमेंट में बताएं।
- आपके अनुसार एक अच्छे लीडर या नेता में सबसे बड़ा गुण क्या होना चाहिए – धन बढ़ाना या जनता की सेवा करना?
- इस कहानी में आपको मगध के शासक का कौन सा कार्य सबसे अच्छा लगा?