C.V. Raman: A short Hindi moral story for kids सी.वी. रमण : प्रेरणादायक हिंदी कहानी
आप पढ़ रहे है भारत के सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉक्टर C.V. RAMAN के बचपन से जुडी एक घटना जिसने उनको किसी भी कार्य के प्रति एकाग्र होना सिखाया और वे एक महान व्यक्ति बने |
आइये जानते है कि क्या थी वो ऐसी बात जिसका प्रभाव उन पर पड़ा और उन्होंने अपने जीवन में उसे उतारा | क्या ये हमें भी अपने जीवन में कुछ सीख दे पायेगी | जानते है पूरी बात …
C.V. Raman: A short Hindi moral story for kids सी.वी. रमण : प्रेरणादायक हिंदी कहानी
बात है C.V. RAMAN के बचपन की , वे किसी भी काम को शुरू तो बड़े ही उत्साह से करते थे पर कुछ दिन बाद वो उसको अधुरा छोड़ कर किसी दुसरे काम को करते दिखते , कहने का मतलब ये है कि कोई भी नया काम शुरू तो कर देते पर उसको पूरा नहीं करते , इस कारण वे खुद भी अंत में निरुत्साहित दिखते साथ ही उसके पिता भी चिंतित रहते थे |
एक दिन C.V. RAMAN के पिता ने दोपहर के समय उनको आवाज दी ” अरे ! रमण इधर आना, आज तुमको एक जादू दिखाता हूँ |”
पिता की आवाज सुन कर रमण दौड़ कर आये क्योंकि उनको इससे काम में बड़ा मजा आता था | रमण ने देखा कि पिताजी के हाथ में एक पुराना समाचार-पत्र है, रमण के आते ही उन्होंने अपना नजर का चश्मा उतारा और सूरज की किरणों की सामने रखते हुवे काफी देर हाथ से इधर-उधर करते रहे , जब कुछ भी नहीं हुवा तो रमण हँसने लगा , उसको लगा पिताजी यूँही मजाक कर रहे |
पर पिताजी ने अब अपना चश्मा बिलकुल समाचार-पत्र के उपर जमा कर रखा , सूरज की किरणें चश्मे से होकर समाचार-पत्र पर पड़ रही थी , थोड़ी ही देर में देखा , जहाँ किरणें पड़ रही थी , वो भाग हल्का भूरा होने लगा और अगले ही कुछ क्षणों में वहां से धुवाँ उठने लगा और वो भाग जल गया , वहां एक छेद हो गया |

रमण को ये चमत्कार बड़ा अच्छा लगा , उसने खुद अपने हाथ से कर के देखा तो फिर वैसा ही हुवा |
मण के पिताजी ने उससे पूछा, ” रमण, क्या सीखा तूने इस छोटे से चमत्कार से? ”
रमण चुपचाप खड़ा था |
पिता ने कहा ” देखो रमण , तुम देख रहे थे कि शुरू शुरू में मेरा हाथ हिल रहा था और कागज पर चश्मे के कांच से किरणें एक जगह नहीं पड़ रही थी , तो कागज नहीं जला , और तुम हँसने लगे , पर बाद में मैंने उस चश्मे को एक जगह स्थिर किया और जब तक कागज जला नहीं तब तक हाथ हिलने नहीं दिया , और फिर चमत्कार दिखा , तुमने खुद भी कर के देखा |
तुम भी हमेशा किसी भी कार्य को शुरू तो कर देते हो पर उस पर अपना मन एकाग्र नहीं करते हो , और वो कार्य अधुरा छोड़ कर कोई नया काम करते हो और वो भी ऐसे ही होता, जब तक तुम तुम्हारे मन को एकाग्र नहीं रखोगे तब तक तुम किसी भी कार्य में सफल नहीं हो पाओगे | इसलिए आज से अपने आप से ये संकल्प करो कि तुम भी किसी भी कार्य को एकाग्र मन से और धैर्य के साथ उसको पूर्ण करोगे , तुम देखोगे कि उसका परिणाम तुम्हारी सोच से बेहतर ही मिलेगा |
रमण ने अपनी पिता की दी इस चमत्कार वाली सीख को अपने जीवन में लागू किया और वो भारत के महान वैज्ञानिक बने |
आइए और कुछ जानते हैं C.V. RAMAN के बारे में :-
भारत के महान वैज्ञानिक – सी. वी. रमण
C.V. Raman: A short Hindi moral story for kids
परिचय
भारत ने विश्व को अनेक महान वैज्ञानिक दिए हैं, जिनमें सी. वी. रमण का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। उनका पूरा नाम चंद्रशेखर वेंकट रमण था। वे एक महान भौतिक वैज्ञानिक थे जिन्होंने प्रकाश के क्षेत्र में महत्वपूर्ण खोज की। उनकी खोज “रमण प्रभाव” के कारण उन्हें विश्वभर में प्रसिद्धि मिली। वे पहले भारतीय वैज्ञानिक थे जिन्हें विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ। उनका जीवन मेहनत, लगन और ज्ञान का अद्भुत उदाहरण है।
बचपन
सी. वी. रमण का जन्म 7 नवंबर 1888 को तिरुचिरापल्ली में हुआ था। उनके पिता गणित और भौतिक विज्ञान के अध्यापक थे। बचपन से ही रमण बहुत बुद्धिमान और जिज्ञासु थे। उन्हें विज्ञान विषय में विशेष रुचि थी। वे छोटी उम्र से ही किताबें पढ़ना और नई-नई बातें सीखना पसंद करते थे। परिवार का वातावरण भी शिक्षा और ज्ञान से भरा हुआ था, जिससे उनके व्यक्तित्व का अच्छा विकास हुआ।
शिक्षा
सी. वी. रमण ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा अपने नगर में प्राप्त की। वे पढ़ाई में हमेशा प्रथम आते थे। उन्होंने बहुत कम आयु में दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएँ उत्तीर्ण कर लीं। बाद में उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज से बी.ए. और एम.ए. की शिक्षा प्राप्त की। भौतिक विज्ञान उनका प्रिय विषय था। उन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत से सभी शिक्षकों को प्रभावित किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सरकारी नौकरी भी की, लेकिन उनका मन हमेशा वैज्ञानिक अनुसंधान में लगा रहता था।
उपलब्धियाँ
सी. वी. रमण की सबसे बड़ी उपलब्धि “रमण प्रभाव” की खोज थी। उन्होंने यह सिद्ध किया कि जब प्रकाश किसी पारदर्शी पदार्थ से गुजरता है, तो उसके रंग और दिशा में परिवर्तन हो सकता है। इस महान खोज के लिए उन्हें वर्ष 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह भारत के लिए गर्व की बात थी। इसके अतिरिक्त उन्हें “भारत रत्न” से भी सम्मानित किया गया। उनकी उपलब्धियों ने भारतीय विज्ञान को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई।
योगदान
सी. वी. रमण ने विज्ञान के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा दिया और अनेक विद्यार्थियों को प्रेरित किया। उन्होंने वैज्ञानिक संस्थानों की स्थापना और विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका मानना था कि भारत के युवाओं में अपार प्रतिभा है और सही मार्गदर्शन मिलने पर वे विश्व में नाम रोशन कर सकते हैं। आज भी उनके कार्य वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
उपसंहार
सी. वी. रमण महान वैज्ञानिक होने के साथ-साथ एक सच्चे देशभक्त भी थे। उन्होंने अपने ज्ञान और मेहनत से भारत का नाम पूरी दुनिया में ऊँचा किया। उनका जीवन हमें सिखाता है कि कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। इसलिए हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेकर शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए