Tanu ka Tota – Hindi story for kids|
तनु का तोता – हिंदी प्रेरणादायक कहानी
आप पढ़ रहे है तनु के तोते की एक प्रेरणादायक अद्भत हिंदी कहानी | Tanu ka tota Hindi story for kids | hindi kahani
प्राचीन समय में पड़ौसी देशों से बहुत से व्यापारी भारत आते थे और अपना सामान बेचते जाते समय भारत से कोई न कोई सुंदर और आकर्षक वस्तु अपने देश ले जाते थे |
ऐसा ही एक व्यपारी भारत आया , उसने अपना सब लाया हुवा सामान बेचा और फिर अपने देश वापिस जाने की तैयारी करने लगा , तो उसे अपने घर पर रह रही छोटी बेटी तानिया की याद आई , उसने कहा भी था कि भारत में मधुर बोलने वाले तोते होते है , मेरे लिए भी कोई ऐसा तोता ले आना |
व्यापारी इधर -उधर बाजारों में घुमा आखिर उसे यमुना नदी के किनारे एक बोलने वाला तोता मिल गया , उसने उसे खरीद लिया और फिर उसके लिए सुंदर सा पिंजरा ले लिया , उसमें रखा और अपने देश चला गया |
घर पहुँचते ही जब तानिया ने हरियल तोते को देखा तो वह बहुत ही प्रसन्न हुई , तोता बहुत ही सुंदर था , चतुर भी था, बोलता भी था , उसकी बातें सुनकर सब घर वाले खुश हो जाते थे|
तानिया अब तोते के साथ रहने लगी , वह उसे बहुत प्यार करती थी, समय पर उसका पसंद का भोजन देती , पानी पिलाती , उस से खूब बातें करती लेकिन तोता बहतु ही उदास रहता था |
तोते को अपना देश याद आता था , वो यमुना नदी का तट , वो उसके सब संगी-साथी , वो बाग-बगीचे में लगे अमरुद , जामुन , बेर , और उनके फल तोड़ कर खाना, माली आने पर उड़ कर टें-टें कर के चक्कर लगाना आदि आदि |
सब कुछ याद आने के कारण उसका मन खुले में उड़ने को करता पर वह पिंजरें में बंद था , हमेशा मन ही मन सोचता रहता कि इस गुलामी से कैसे छूटकरा मिले और फिर अपने देश को लौट जाऊंगा|
छ: महीने बाद व्यापारी ने बहुत सारा सामान लिया और फिर भारत की यात्रा पर जाने के लिए जाने की तैयारी करने लगा , रवाना होने वाले दिन उसने तानिया से पूछ लिया कि अबकी बार क्या लाना है?|
पिता के सवाल पूरा होने से पहले ही हरियल तोता बोल पड़ा ” सुनो ! इसके लिए जो भी लाना पर मेरा एक सन्देश जमुना किनारे पेड़ पर तोतों को सुना देना”
व्यापारी ने आश्चर्य से पूछा, “ज़रूर सुना दूँगा, बोलो क्या संदेश है?”
तोता बोला , उनको मेरी चार पंक्तियाँ सुना देना
एक तुम्हारा साथी है दूर देश |
सुदूर घने पहाड़ और न कुछ विशेष|
तड़फ रहा हूँ दिन-रात, व्यर्थ सब उपाय |
देना कोई सन्देश , साथी देश आ जाय ||
व्यापारी तोते का सन्देश लेकर भारत आ गया , उसने अपना सारा सामान कुछ दिनों में बेच दिया , और फिर जहाँ से तोता ख़रीदा था वहां पहुंचा , वहां बहुत सारे तोते एक करील के पेड़ पर बैठे थे | उसने उपर देखा और जोर से तोते का सन्देश कहने लगा |
सुनो , हरियल तोतों तुम्हारे लिए एक सन्देश लाया हूँ |
एक तुम्हारा साथी है दूर देश |
सुदूर घने पहाड़ और न कुछ विशेष|
तड़फ रहा हूँ दिन-रात, व्यर्थ सब उपाय |
देना कोई सन्देश , साथी देश आ जाय ||
क्या अब तुम भी उसके लिए कुछ सन्देश भेजना चाहते हो तो बोलो मैं उसे सुना दूंगा |
युवा तोतों ने तो ध्यान नहीं दिया पर एक बुढा तोता ध्यान से उस व्यापरी की सन्देश सुन रहा था | उसने गौर किया कि आखिर उस साथी के लिए क्या किया जाये |
और अचानक वह बुढा तोता पेड़ से नीचे उस व्यापारी के पास आकर गिर गया , अपनी आंखे तरेर ली , जैसे की वह मर गया |
व्यापारी ने बूढ़े तोते को हाथ में लिया , ऊपर थोडा पानी डाला पर तोते ने आंख न खोली , उसने सोचा शायद तोता मर गया है , तो उसने तोते को एक झाड़ी के पास रख दिया |
व्यापरी बहुत उदास हुवा , सोचने लगा कि ऐसा उस तोते के सन्देश में क्या था जो इसके सुनते ही ये मर गया |
व्यापारी अपने देश लौट आया , आते ही तोते ने अपने सन्देश का पुछा , व्यापारी ने उसके सन्देश सुनाने के बाद पूरी घटना सुनाई |
कहानी सुनने के बाद थोड़ी देर में तोता तो पिंजरे में वैसे ही अचेत हो कर गिर पड़ा जैसे वह बुढा तोता पड़ा था , व्यापरी ने पिंजरा खोला , उसे अच्छे से देखा , ऊपर थोडा पानी छिड़का पर तोते ने आंख तक न झपकी |
व्यापारी को यकिन हो गया कि ये तोता भी मर गया , तो उसने उसको घर के बाहर झाड़ी के पास रख दिया|
तानिया और व्यापारी सब उदास बैठे थे , समझ नहीं आ रहा था , कि इसका सन्देश सुन कर वो तोता मर गया और उसकी बात इसको सुनाई तो ये मर गया , आखिर क्या बात थी ऐसी ?
कुछ देर बाद तोता व्यापारी के घर की मुंडेर पर आकर गाने लगा |
सुनो, मियांजी सुनो तानिया जी
खुद घुमो अंदर बाहर ,
और हम पिन्जरिया में जी |
साथी ने भेजा जो एक आइडिया जी
हमरे को जिसने जिन्दा कर दिया जी |
इतना सुना कर तोता तो फुर्र से उड़ गया |
व्यापारी और उसकी बेटी तानिया अब समझे कि आजादी पक्षी को कितनी प्यारी होती है |