udarata ki kahani hindi story for kids
जब राजा ने खुद को बंदी बना लिया – उदारता की अद्भुत कहानी
Udarata ki kahani Hindi story for kids
Udarata ki kahani Hindi story for kids
राजा कीउदारता
पुराने जमाने की बात है एक बार काशी के राजा ने अपने पडौसी राज्य कौशल पर आक्रमण कर दिया , इस औचक आक्रमण का सामना करते हुवे कौशल राज्य की सेना ने अपना पूरा सामर्थ्य दिखाया पर दुर्भाग्य से पराजीत हो गया |
युद्ध के दौरान जब कौशल के सैनिकों को अपनी हार होती दिखी तो उन्होंने अपने शस्त्र डाल दिए और कौशल का राजा मैदान छोड़ कर भाग गया | काशी के राजा ने कौशल नरेश को पकड़ने के बहुत प्रयास किये पर सफल नहीं हुवा तो काशी नरेश ने सब जगह ढिंढोरा पिटवाया कि जो भी व्यक्ति कौशल नरेश को जीवित पकड़ कर लायेगा उसको एक लाख सोने की मोहरें पुरस्कार में दी जाएगी |
Udarata ki kahani Hindi story for kids
कौशल का राजा जंगल जंगल भटक रहा था , और भटकते भटकते वो मगध राज्य की सीमा में घने जंगलों में प्रवेश कर गया और वहां अपने दिन काट रहा था| उस वर्ष मगध में भयंकर अकाल पड़ा, प्रजा को अनाज और भोज्य पदार्थों की कमी हुई तो वे जंगलों की ओर आने लगे| जंगल में कौशल नरेश को छिपा देखा तो कुछ नागरिकों ने राजा को पहचान लिया|
मगध के नागरिक जो इस बात से अनजान थे कि कौशल के राजा हार कर भागे हुवे है और उनको काशी के राजा ने पकड़ने के लिए एक लाख सोने की मोहरें पुरस्कार में देने का वचन दे रखा है |
मगध के नागरिक तो उनको राजा जान कर उनसे मदद की प्रार्थना करने लगे कि “महाराज हम तो भूख प्यास से मर जायेंगे , आप हमें बचाने का कोई प्रयास कीजिये , कुछ अनाज या धन दे ताकि हमारा ये कठिन समय निकल जाये” |
राजा तो स्वयं विपत्ति में थे , वे अब इनका क्या भला कर सकते थे ?|
मगध नागरिकों की विनती सुन कर राजा की आँखों में आंसू आ गये | राजा ने मन में सोचा मेरा तो जीवन वैसे भी संकट में है और छिपकर जीने से भला है मेरा जीवन इनके काम आ जाये , मैं खुद जाकर काशी नरेश को पकड़वा दूँ और वो एक लाख मोहरें लेकर इनका संकट दूर कर देता हूँ |
अगले दिन कौशल का राजा अपना रूप और वेश बदल कर काशी नरेश के सामने हाजिर हुवे और कहा कि “आपने कौशल नरेश को जीवित पकड़ने के पुरस्कार की जो घोषणा कर रखी है वो अगर मुझे दो तो मैं उसे आपके सामने लाकर खड़ा कर सकता हूँ”|
काशी के राजा ने कहा कि वो तो पुरस्कार है जो ऐसा करेगा उसको ही मिलेगा सो तुम करो तो वो तुम्हे ही मिलेगा |
कौशल नरेश ने कहा कि “लाओ फिर वो पुरस्कार वाली एक लाख सोने की मोहरें , कौशल का राजा आपके सामने ही खड़ा है”|
कौशल के राजा का वास्तविक रूप और वेश देख कर काशी नरेश हैरत में पड़ गए |
जब काशी के राजा ने इसका कारण जानना चाहा तो कौशल नरेश ने मगध के नागरिकों के जीवन संकट को दूर करने के लिए अपने को बंदी बनाने की बात बताई |
कौशल नरेश का स्वयं विप्पति में होते हुवे भी दुसरे किसी राजा की प्रजा के दुखों को दूर करने के लिए बंदी बन जाना, ये जान कर काशी के राजा ने उसको माफ़ कर दिया और दुगुनी मोहरें देकर प्रजा की भलाई की|