निडर बालक हकीकतराय
Nidar Balak Hakikatray_Hindi story for kids

धर्म वो ही अच्छा है जो मानव को जीने का अधिकार देता है

भारत में जिस समय मुगलों का शासन स्थापित हो चुका था भारत की प्राचीन शिक्षा पद्धति गुरुकुल व्यवस्था को समाप्त किया जा रहा था। हिंदू बच्चों के पढ़ने-लिखने के लिए कोई भी व्यवस्था नहीं थी।  मुगलों ने फारसी शिक्षा और अपनी धार्मिक शिक्षा को बढ़ाने के लिए मकतब यानी मदरसे खोलने शुरू किए ,इन मकतब में हिंदुओं के बच्चे भी पढ़ने आते थे।

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 ऐसे ही एक मकतब में निडर बालक हकीकतराय पढ़ता था एक दिन वह मकतब में पढ़ने आया उसकी कक्षा में से मौलवी साहब किसी काम से बाहर चले गए ,पीछे कक्षा खाली थी बच्चे आपस में बातें करने लगे । बातों बातों में मुस्लिम बच्चों और हकीकतराय में बहस हो गई हकीकत राय ने अपने हिंदू धर्म की बातें बताई जो मुस्लिम बच्चों को अच्छी नहीं लगी और उन्होंने उसके साथ गलत व्यवहार किया थोड़ी देर बाद में मौलवी साहब पुनः अपनी कक्षा में आए बच्चों को लड़ता देख पूछा तो सभी मुस्लिम बच्चों ने एक साथ हकीकतराय की शिकायत की और कहा कि उसने अपने हिंदूधर्म की बड़ाई की। मौलवी साहब ने हकीकत राय को सजा भी दी और भविष्य में ऐसा नहीं करने का कहा कुछ दिन बाद बोली साहब ने हकीकत राय को इस्लाम धर्म स्वीकार करने का कहा परंतु हकीकतराय ने इस्लाम धर्म स्वीकार करने से मना कर दिया । उसने घर आकर अपनी मां से बात की। मां ने मकतब जाने से मना कर दिया। 

तो मौलवी साहब ने उस पर दबाव बनाया और कहा कि अगर इस्लाम नहीं बने तो तुम्हें मार दिया जाएगा। हकीकतराय ने कहा कि चाहे में इस्लाम धर्म में आऊं या हिंदू धर्म में रहूं, मुझे एक बार ही मरना है और मैं अपने धर्म को छोड़कर तुम्हारा धर्म स्वीकार नहीं करूंगा।धर्म वो ही अच्छा है जो मानव को जीने का अधिकार देता है|

हकीकतराय को इस्लाम स्वीकारने का दबाव

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हकीकतराय को इस्लाम स्वीकारने का दबाव

 कुछ दिनों बाद मौलवी साहब और वहां के मुस्लिम शासक ने हकीकतराय को मारने का आदेश दे दिया।  हकीकतराय को अंत समय में कहा गया कि या तो इस्लाम स्वीकार करो नहीं तो यह जल्लाद आज तुम्हें तलवार से काट देंगे | हकीकतराय ने निडर होकर कहा “मैं इस्लाम स्वीकार नहीं करूंगा” |

मौलवी साहब ने जल्लाद को तलवार चलने को कहा परंतु जल्लाद उस मासूम के ऊपर तलवार चला नहीं पाया उसके हाथ से तलवार गिर गई।

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हकीकतराय ने इस्लाम स्वीकार नहीं किया

 इस पर हकीकतराय ने तलवार उठाकर उसे वापस दी और कहा कि “भाई, तुम अपना कर्तव्य पालन करो। दूसरी बार उस जल्लाद ने बेमन से हकीकतराय के ऊपर तलवार चलाई और उसका गला कट गया।

 हकीकतराय ने मृत्यु स्वीकार की, पर इस्लाम धर्म स्वीकार नहीं किया।

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अंत में हकीकतराय को तलवार से काट दिया गया

 शिक्षा:– धर्म वो ही अच्छा है जो मानव को जीने का अधिकार देता है।