lalach buri bala he.
लालच बुरी बला है इस कहानी में जानेंगे कि कैसे लालच बुरी बला बन जाता है |
एक बार एक पंडित जी यमुना नदी के किनारे खड़े होकर सुबह-सुबह सूर्य भगवान को जल अर्पित कर रहे थे । कुछ ही दूरी पर नदी के अंदर एक घड़ियाल पंडित जी को देख रहा था। पंडित जी थोड़ा दूर खड़े थे और घड़ियाल वहां तक पहुंच नहीं सकता था, घड़ियाल ने युक्ति से काम लिया, वह नदी के अंदर गहराई में गया और बहुत सारे मोती और रत्न उठाकर ले आया और उसने पंडित जी के आसपास उसको फेंक दिया। पंडित जी ने जब यह सब देखा तो उनके मन में लालच आ गया, वे जल्दी-जल्दी उस रत्न मोतियों को उठाकर अपनी धोती में बांधने लगे। घड़ियाल यह सब देखकर बहुत खुश हुआ, उसे लगा कि अब पंडित जी को फसाने का अच्छा अवसर है। वह नदी के किनारे पर जाकर पंडित जी से हाथ जोड़कर बोला “पंडित जी! आपके दर्शन पाकर मुझे बहुत लाभ होता है, इस कारण आपको भेंट स्वरूप यह कुछ मोती और रत्न मेरी तरफ से रख लीजिए। पंडित जी खुशी के मारे उछल पड़े वे मान गए कि घड़ियाल कोई दैवीय चमत्कार है और भगवान ने उन्हें मेरे लिए भेजा है।
कुछ देर सोचने के बाद घड़ियाल बोला “पंडित जी! मैं नदी में त्रिवेणी की तरफ जाने वाला रास्ता भूल गया हूँ, आप अगर मुझे रास्ता दिखा दें तो आपकी बड़ी कृपा होगी और मैं इसके बदले में आपको मोतियों के पाँच हार भी दूंगा”।

पंडित जी ने मोतियों के पाँच हार सुना तो उनके विवेक और बुद्धि तो जैसे नष्ट ही हो गई। वे भूल चुके थे कि घड़ियाल एक मांसाहारी जीव है और वह उनको अपना भोजन भी बन सकता है।
जल्दबाजी में पंडित जी ने उन्हें रास्ता बनाने के बारे में बताने का साहस कर लिया और वे घड़ियाल की पीठ पर बैठ गए। घड़ियाल को अब वे त्रिवेणी की तरफ वाला रास्ता बताते हुवे खुश हो रहे थे और मन में पाँच हार के सपने देख रहे थे।
काफी दूर नदी के बीचो-बीच जाने पर घड़ियाल को अपनी चाल पर हँसी आ गई। घड़ियाल को हँसते देखा तो पंडित जी बोले “अरे भाई! तुम इतना हँस क्यों रहे हो? घड़ियाल बोला “आप पंडित है आप दूसरों को शिक्षा देते हैं किंतु आज तो आप स्वयं ही लालच में फंस गए”। इस कहानी में जाना कि कैसे लालच बुरी बला बन जाता है |
पंडित जी को अपनी मूर्खता और लालच पर सोचने का अवसर मिलता इससे पहले ही घड़ियाल ने उनको नीचे पटक और अपने पेट में गटक लिया।
शिक्षा :– लालच बहुत बुरी चीज है जो वस्तु हमारी नहीं होती उस पर हम अपना अधिकार समझ लेते हैं और विवेकहीन होकर मूर्ख कार्य कर लेते हैं। पंडित जी ने भी ऐसा ही किया अगर वे पहले मिले रत्न और मोती लेकर वहां से चले जाते तो उनका जीवन बच सकता था परंतु वे मोतियों के हार के लालच में अपना जीवन भी गंवा बैठे। तो इस कहानी में जाना कि कैसे लालच बुरी बला बन जाता है |
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