समाज सुधारक संत मारिओ बोरेली
- संत जिसने आवारा लड़कों का जीवन बदल दिया |
द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होते होते इटली के नेपल्स शहर के बहुत सारे नागरिक मारे गये | इन मारे गये नागरिकों के बहुत सारे बच्चे अनाथ हो गये , ये अनाथ बच्चे अब आवारा बन गये थे, वे सड़को पर ही आवारा घुमते, वहीँ सोते, भीख मांगते, चोरी करते, और अलग अलग तरह के गलत कार्य करने लग गये | ये बच्चे जैसे जैसे बड़े होते जा रहे थे , समाज और शहर के लिए समस्या बनते जा रहे थे | पुलिस और प्रशासन ने उनको सुधारने के बहुत प्रयास किये पर वे सब विफल रहे |

नेपल्स के एक चर्च के युवा पादरी मारिओ बोरेली ने भी ये समस्या जब सुनी तो उन्होंने अपने ही स्तर पर इनको सुधारने का प्रयास शुरू किया |
मारिओ बोरेली ने अपने पादरी वाले वस्त्र बदल कर साधारण कपड़े पहन लिए और उन लड़कों के साथ उठना बैठना शुरू कर दिया , और वहीँ रात रुकना शुरू किया | धीरे धीरे वे सब मारिओ के साथ घुल-मिल गये और कुछ अच्छे मित्र भी बन गये | कभी कभी मारिओ अपने चर्च जाता रहता था पर कोई इस तरफ ध्यान नहीं देता था क्योंकि वे खुद भी किसी का ध्यान नहीं रखते थे |
एक दिन मारिओ ने इन सब को कहा कि यार ! ये हमारी क्या जिंदगी है ? सडकों पर पड़े रहते है , क्यों न हम एक घर में रहना शुरू कर देते है ताकि हमरा एक परिवार हो |

मारिओ की बात उन सब लड़कों को अच्छी लगी पर घर की व्यवस्था कैसे की जाये ये जिम्मेदारी मारिओ को दे दी |
मारिओ ने शहर में एक पुराना चर्च अपने सब के लिए खुलवा दिया , सब मिल कर वंहा पहुचे | सब खुश हुवे कि चलो अब एक स्थायी जगह तो है रहने के लिए | सभी ने मिलकर उस चर्च की साफ सफाई की और अपनी जरुरत की वस्तुएं लाने लगे | थोड़े दिन बाद मारिओ ने एक फिर प्रस्ताव रखा कि यार कब तक हम भीख मांगते रहेंगे? क्यों नहीं हम अपना भोजन खुद ही बना कर खाएं |
ये बात भी उन सब ने मान ली , अब खाने पीने का सारा सामान कहाँ से आये , जिम्म्देदारी फिर मारिओ पर ही आई |
मारिओ ने अपने स्तर पर खाने पीने के लिए बर्तन , चूल्हा , स्टोव आदि की व्यवस्था कर दी , अब सब मिल बैठ कर खाना बनाते और साथ बैठ कर खाते और फिर अपना अपना काम करते थे |
बाकि सभी लड़के सोचते कि यार ये मारिओ तो बड़ा कबाड़ी है , पहले घर खोज लिया फिर खाने पीने की व्यवस्था करा दी , अब वे मारिओ को अपना नेता मानने लग गये और मारिओ के कहे अनुसार धीरे धीरे अपनी बुरी आदते छोड़ कर अच्छी आदते अपनाने लगे |
काफी महीने बीत जाने के बाद मारिओ को लगा कि अब इनको मेरा वास्तविक रूप और पहचान बता देनी चाहिए | एक दिन मारिओ वंहा से अपने चर्च गये और अपने पादरी के वस्त्र पहन कर वापिस आये |

पादरी के वस्त्र पहने देख सब दोस्त एक साथ चिल्लाये “नहीं मारिओ नहीं, ये नहीं चलेगा , तुझे ये अच्छे नहीं लगते , इतना भी नहीं बदल जाना”
मारिओ ने अब उनको बताया कि वो वास्तव में पादरी ही है और यही उसकी सही पहचान है, वो सब जो मैंने किया वो सिर्फ तुम्हें अच्छा जीवन देने के लिए किया, मैं अभी भी तुम्हारे साथ ही हूँ, अब तुम सब एक अच्छा जीवन जियो और अपने जैसे और लड़कों का जीवन सुधारो|
मारिओ ने उन लड़कों को स्कुल में भर्ती करवाया और इस प्रकार नेपल्स की बहुत बड़ी समस्या का समाधान कर दिया और आवारा समूह को सुधार कर सभ्य नागरिक बना दिया फिर इन सबने बड़े होकर अलग अलग क्षेत्रों में अपना दायित्व निभाया |
शिक्षा : किसी उच्च कार्य को करने के लिए अपने सुख त्यागने पड़ते है |

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