सत्य से शक्ति
बगदाद में एक मुस्लिम फ़क़ीर रहते थे उनका नाम हम्बल था वे बहुत ही सदाचारी और सत्य बोलने वाले थे, झूठी बातें उन्हें बुरी लगती थी और वह धर्म के नाम पर झूठी बातें बोलने वाले लोगों के बारे में जनता को बताते रहते थे।
कुछ धर्मांध लोगों ने बगदाद के खलीफा से फ़क़ीर हम्बल की शिकायत करी, फ़क़ीर हम्बल के बारे में बताई बातें सुनकर बहुत नाराज हुए अतः एक दिन उन्हें पकड़वाकर अपनी न्यायालय में बुला लिया।
खलीफा हम्बल को अपने किए गए कार्य के लिए सजा देना चाहता था और वह यह सच्ची बातों के खिलाफ था खलीफा के अनुसार जो धर्म गुरुओं ने जो कहा है वो एकदम सत्य है जबकि हंबल का कहना था कि कुरान में लिखी गई बातें हैं और धर्म के प्रचारकों द्वारा बताई जाने वाली बातें अलग-अलग है और उसमें बहुत सारी झूठी बातें हैं, पर खलीफा ने संत की बात नहीं मानी।
फ़क़ीर हम्बल खलीफा की क्रूरता पर बहुत दुखी थे वे असमंजस में भी थे कि अब क्या किया जाए?
जब फ़क़ीर हम्बल थोड़ी देर वहां खड़े रहे तो एक सिपाही ने उनके कान में आकर कहा कि हजरत आप बहुत दुखी नजर आ रहे हैं और परेशान है इसका क्या कारण है ?
हंबल ने कहा कि मुझ पर कुरान का अपमान करने का आरोप लगाया गया है और मैंने तो कुरान की शिक्षाएं ही दी है फिर मैं अपराधी कैसे हुआ ?

उस सिपाही ने कहा कि हजरत आपको परेशान नहीं होना चाहिए आप तो सत्यवादी हैं, अब आप मेरी बात सुनो मैं एक चोर था और मैंने एक बार चोरी की, खलीफा ने मुझे 1000 कोड़े की सजा सुनाई थी मैं वास्तव में चोर था फिर भी मैंने चोरी स्वीकार नहीं की और कोड़े की मार सहन करता रहा इस कारण मैं सबके सामने चोर नहीं बना और आखिर मुझे छोड़ दिया गया ।
जब मैं झूठ के लिए अपने कलेजे को इतना मजबूत कर सकता था तो फिर आप सत्य से क्यों डरते हैं?
यह बात हम्बल को बहुत अच्छी लगी उनके मन में भय का जो भूत बैठ गया था वह भाग गया और उसे अंधकार में भी एक प्रकाश की किरण दिखाई देने लगी वह बोले तुम ठीक कह रहे हो , तुमने समय पर मुझे सचेत कर दिया मैं तुम्हारा सदैव आभारी रहूंगा ।
सिपाही ने कहा आप महान है मुझ में तो ऐसी कोई बात नहीं है और वह वहां से चला गया ।
उस रात फ़क़ीर को जेल में रखा गया और वो बड़ी गहरी नींद में सोए ,अब उनके मन में सत्य के लिए पूरी हिम्मत थी ।
बड़े सवेरे सिपाही ने उन्हें देखा तो वे गहरी नींद में सो रहे थे , फ़क़ीर को जागते हुए सिपाही बोला आज आपको नींद कैसे आ गई जबकि आपको तो सजा मिलने वाली है ? हम्बल ने मुस्कुराते हुए कहा हां सत्य के लिए सजा भी मिली तो खुशी से स्वीकार होगी ।
सुबह होने पर फ़क़ीर को खलीफा के सामने फिर हाजिर किया गया खलीफा ने फ़क़ीर से कई प्रश्न पूछे सबके जवाब उन्होंने बिना किसी डर के दिए । वे सोच चुके थे कि मृत्यु से ज्यादा क्या ही सजा मिलेगी? कुछ ही समय बाद खलीफा ने हम्बल को 1000 बेंत लगाने का आदेश दे दिया , किंतु हम्बल यह आदेश सुनकर दुखी नहीं हुए ।
खलीफा के नौकर हम्बल पर बेंत बरसाए जा रहे थे , हम्बल बेंतों की मार से बेहोश हो गए किंतु असत्य स्वीकार नहीं किया।
कुछ देर बाद खलीफा को अपनी गलती का अहसास हुआ तो वह उस जगह आया और अपनी गलती स्वीकार करते हुए संत से क्षमा मांगने लगा ।
संत ने बेहोशी की अवस्था में खलीफा को क्षमा कर दिया किंतु थोड़ी देर बाद में मर गए ।
खलीफा अपने किए हुए पर पछता रहा था उसने सत्य को नहीं पहचाना पर अब सत्य की बात कहने वाला हम्बल इस दुनिया से जा चुका था ।
शिक्षा इस घटना से हमें यह शिक्षा मिलती है कि संत / फ़क़ीर हमेशा सत्य को स्वीकार करता है और असत्य के लिए अपना जीवन न्योछावर कर देता है किसी भय के कारण असत्य को स्वीकार नहीं करेगा।
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