ईमानदारी का पाठ
जापान के टोक्यो नगर में एक बालक रहता था , उसका नाम सियाओ था उसके पिता एक स्कूल में अध्यापक थे | बालक सीयाओ का मन पढ़ने लिखने में नहीं लगता था | वह अपने पिताजी से सदैव दुकान खुलवाने के लिए कहता था किंतु उसके पिताजी उसे कहते कि “बेटा पहले पढ़ना चाहिए फिर कुछ काम करना चाहिए।”
बालक सियाओ कुछ जिद्दी स्वभाव का था इसलिए उसके पिताजी ने उसे एक दिन अपने मित्र की कपड़े की दुकान पर ले गए | दुकानदार से सियाओ के विषय में उन्होंने बातचीत की| दुकानदार ने बोला “सीयाओ अभी छोटा है | इस बात पर सियाओ ने तपाक से कहा “सिर्फ पढ़ने के लिए छोटा हूं दुकान के लिए नहीं “ दुकानदार को सियाओ की बात अच्छी लगी और उसने अपनी दुकान पर रख लिया |

सियाओ कपड़े का काम सीखने लगा। वह बड़ी लगन से काम करता, इस कारण दुकानदार भी बहुत खुश था | एक दिन एक महिला अपने लिए साड़ी खरीदने आई | बालक सियाओ ने उसे बहुत प्रकार की साड़ियां दिखलाई , अंत में एक साड़ी जो अंदर से थोड़ी कटी हुई थी उस महिला को पसंद आ गई पर उस महिला को इस बात का पता नहीं था | उस महिला ने बालक सियाओ से कहा कि इसका दाम बताओ | बालक के सामने दुकानदार भी बैठा ही था वह सोच रहा था , देखें आज सियाओ इसका क्या दाम बताता है? सियाओ ने उस साड़ी का दाम बताने की जगह कहा कि आपने जो साड़ी पसंद करी है वह तो कटी हुई है, आप कोई और चुन लीजिए| इस ईमानदारी की बात पर महिला तो बहुत प्रसन्न हुई वह दूसरी साड़ी लेकर चली गई किंतु दुकानदार सियाओ पर बहुत गुस्सा हुआ और उसे कहने लगा “ क्या ऐसे कपड़े बेचे जाते हैं? अब यह कटी हुई साड़ी कौन खरीदेगा? दूसरे ही दिन दुकानदार ने उसके पिता को बुलवाकर सारी बात बता दी | इस पर पिता बोले “इससे अधिक तो और कुछ नहीं हुआ? दुकानदार ने कहा “ नहीं , इससे अधिक और क्या होगा, मेरी एक साड़ी कटी हुई थी वह बिक जाती पर आपके पुत्र की ईमानदारी की वजह से वह नहीं बिक पाई “ तब सियाओ के पिता ने कहा “मेरा बेटा अब पक्का व्यापारी बन गया है अब आप रहने दीजिए , वह ईमानदारी का पाठ पढ़ चुका है “
पिता ने सियाओ को कपड़े की दुकान खुला दी , यही लड़का सियाओ अपनी ईमानदारी के बल पर जापान का प्रसिद्ध उद्योगपति और कपड़े का व्यापारी बना |
शिक्षा:- हमें अपने कार्य में हमेशा ईमानदारी बरतनी चाहिए इससे हमारी प्रगति होती है |