- घोड़ा और गाय
बात पुराने जमाने की है एक जंगल में एक घोड़ा और एक गाय साथ-साथ बड़े प्रेम से रहते थे। जंगल भी पूरा हरा- भरा था घास की कोई कमी न थी। अतः वे दोनों प्रेम से चरते -चरते काफी दूर तक निकल जाते थे। साथ -साथ उठते बैठते , बातें करते थे।
एक बार घोड़े को सूझा कि गाय को तंग करना चाहिए , जिससे कम से कम वह समझ सके कि घोड़ा भी कोई साधारण जानवर नहीं होता।
एक दिन वह सोचते सोचते एक आदमी के पास गया और उससे बोला “ क्या तुम्हें नहीं पता कि गाय बढ़िया मीठा दूध देती है, यदि उसे आप पकड़ ले तो आपको दोनों वक्त दूध मिल सकता है।
घोड़े की बात आदमी को जच गई , किंतु वह बोला “ गाय को पकडूँगा कैसे? वह तो बहुत तेज दौड़ती है उसके सींग भी लंबे होते हैं कंही वह मुझे मार न दे | घोड़ा कहने लगा “ भाई कैसे आदमी हो तुम भी, गाय से घबरा गए , वह भला मुझे से तेज दौड़ सकती है क्या ? आप मेरी पीठ पर बैठ जाना और फिर उसे पकड़ लेना |
घोड़े की बात आदमी को अब तो और भी अच्छी लगी अतः वह घोड़े की पीठ पर बैठकर गाय के पीछे दौड़ने लगा, थोड़ी ही देर में उसने गाय को पकड़ ली।
घोड़ा आदमी की मदद करके और गाय को पकड़वा कर खुश हुवा और फिर वापिस जंगल में जाने के लिए रवाना होने लगा, इतने में उसी आदमी ने घोड़े को गले में रस्सी डाल कर उसे बाँधते हुवे कहा कि अब तुम कहाँ चल दिए भाई, तुम भी तो मेरे सवारी के काम आ सकते हो , तुम भी अब यंही रहो |

यह सुन कर घोड़ा बहुत निराश हुवा और मन ही मन अपनी चालाकी पर पछताने लगा |
जिस घोड़े ने गाय को आदमी को पकड़ने को कहा था ,वह स्वयं भी गाय के साथ उस आदमी का दास बन गया, तब से गाय और घोड़ा आदमीं के साथ रहते आ रहे है |
तो मित्रों अगर आप भी घोड़े की तरह दूसरों को हानि पहुँचाने की सोचते हो तो तुम्हारी हानी भी निच्छित है |