डिजिटल गवर्नेंस और DBT:
भ्रष्टाचार मुक्त भारत व अंत्योदय | UPSC Essay
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
(सभी सुखी हों, सभी रोगमुक्त और समृद्ध हों—यही कल्याणकारी राज्य का सनातन ध्येय है।)
1: प्रस्तावना: 15 पैसे से शत-प्रतिशत पहुँच का ऐतिहासिक परिवर्तन
1980 के दशक में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने देश की प्रशासनिक लाचारी को उजागर करते हुए एक ऐतिहासिक वक्तव्य दिया था: “केंद्र जब दिल्ली से 1 रुपया भेजता है, तो ज़मीन पर गरीब तक केवल 15 पैसे ही पहुँच पाते हैं।” शेष 85 पैसे मध्यस्थों, प्रशासनिक रिसाव (Leakage) और संस्थागत भ्रष्टाचार की बलि चढ़ जाते थे। यह स्थिति भारतीय लोकतंत्र के उस मूल दर्शन पर करारा प्रहार थी, जिसे संविधान सभा ने ‘कल्याणकारी राज्य’ (Welfare State) के रूप में अंगीकार किया था।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 38 और 39 (नीति निर्देशक तत्व – DPSP) स्पष्ट रूप से राज्य को यह निर्देश देते हैं कि वह सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करे तथा संसाधनों का संकेंद्रण रोके। साथ ही, अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार) के व्यापक आयामों में ‘गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार’ शामिल है। गरिमापूर्ण जीवन तब तक असंभव है जब तक कि राज्य की लोक-कल्याणकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी रिश्वत या बिचौलिए के अंतिम व्यक्ति तक न पहुँचे।
डिजिटल तकनीक और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer – DBT) ने इस दशकों पुरानी प्रशासनिक लाचारी को समाप्त कर भारत में ‘अंत्योदय’ (पंक्ति के अंतिम व्यक्ति का उत्थान) की अवधारणा को एक व्यावहारिक यथार्थ बना दिया है।
2: प्रशासनिक सुचिता और भ्रष्टाचार-मुक्ति का डिजिटल मॉडल
ई-गवर्नेंस केवल प्रक्रियाओं का कम्प्यूटरीकरण नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक सुचिता (Administrative Integrity) और नियम-आधारित निष्पक्षता की स्थापना का माध्यम है। DBT और डिजिटल गवर्नेंस मॉडल ने पारंपरिक नौकरशाही के स्वविवेक (Discretionary Powers) को सीमित कर भ्रष्टाचार के अवसरों को न्यूनतम कर दिया है।
(क) JAM ट्रिनिटी: पारदर्शी वितरण का मेरुदंड जनधन, आधार और मोबाइल (JAM Trinity) की जुगलबंदी ने भारत की सामाजिक कल्याण वास्तुकला को नया आकार दिया है:
- जनधन योजना: इसने करोड़ों असंगठित एवं वंचित नागरिकों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा।
- आधार: इसने प्रत्येक नागरिक को एक अद्वितीय जैव-मीट्रिक पहचान प्रदान की, जिससे पहचान की जालसाजी असंभव हो गई।
- मोबाइल कनेक्टिविटी: इसने वास्तविक समय (Real-time) सूचना और वित्तीय लेनदेन की सुविधा सीधे नागरिक के हाथ में दी।
(ख) ‘घोस्ट बेनिफिशियरी’ और मध्यस्थों का उन्मूलन पारंपरिक प्रणाली में राशन कार्ड, पेंशन और छात्रवृत्ति सूची में लाखों ‘फर्जी’ (Ghost) और ‘दोहरे’ (Duplicate) नाम दर्ज होते थे, जिनका पैसा बिचौलिए डकार जाते थे। आधार-आधारित बायोमीट्रिक सत्यापन ने इन फर्जी लाभार्थियों को व्यवस्था से पूरी तरह बाहर कर दिया है।
लीकेज रोकथाम के प्रत्यक्ष आंकड़े:
DBT मिशन के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, केंद्र सरकार की 300 से अधिक योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के खातों में स्थानांतरित किया जा रहा है। इस पारदर्शी व्यवस्था के कारण अब तक 2.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि गलत हाथों और रिसाव में जाने से बचाई जा चुकी है।
3: अंतिम व्यक्ति तक पहुँच: डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)
भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), जिसे विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने वैश्विक मॉडल स्वीकार किया है, अंतिम व्यक्ति तक सेवाओं की पहुँच (Last-Mile Delivery) सुनिश्चित करने में मील का पत्थर साबित हुआ है।
(क) वित्तीय समावेशन और समावेशी विकास
- UPI एवं AEPS (Aadhaar Enabled Payment System): ग्रामीण भारत में जहां बैंक शाखाओं का अभाव था, वहां ‘बिज़नेस कॉरेस्पोंडेंट्स’ (Bank Mitras) और AEPS ने माइक्रो-एटीएम के माध्यम से अंगूठा लगाते ही नकदी वितरण संभव बनाया है।
- e-RUPI (उद्देश्य-आधारित वाउचर): e-RUPI के माध्यम से लक्षित और कैशलेस भुगतान सुनिश्चित किया गया है। उदाहरण के लिए, यदि खाद या दवा के लिए वाउचर दिया गया है, तो उसका उपयोग केवल उसी कार्य के लिए संभव है।
(ख) महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय DBT ने भारतीय ग्रामीण समाज में जेंडर-डायनामिक्स को बदला है। पीएम किसान सम्मान निधि, एलपीजी सब्सिडी (पहल योजना), और मनरेगा भुगतान का पैसा सीधे महिलाओं के बैंक खातों में जाने से परिवार में उनकी निर्णय क्षमता और वित्तीय स्वायत्तता में वृद्धि हुई है।
4:व्यावहारिक चुनौतियाँ एवं अंधकारमय पहलू (Structural Challenges)
यद्यपि डिजिटल गवर्नेंस ने क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं, किंतु इस व्यवस्था की निष्पक्ष आलोचना करना एक प्रशासनिक एवं नीतिगत आवश्यकता है।
(क) डिजिटल विभाजन (Digital Divide) नीति आयोग और TRAI की रिपोर्टों के अनुसार, भारत में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच इंटरनेट घनत्व (Teledensity) और बैंडविड्थ उपलब्धता में भारी अंतर है। लैंगिक स्तर पर भी महिलाओं के पास स्मार्टफोन की पहुँच पुरुषों की तुलना में कम है।
(ख) तकनीकी निष्कासन त्रुटियाँ (Exclusion Errors) डिजिटल व्यवस्था की सबसे दुखद चुनौती यह है कि कभी-कभी वृद्धों, शारीरिक श्रम करने वाले श्रमिकों (जिनकी उंगलियों के निशान घिस जाते हैं), या सुदूर जनजातीय क्षेत्रों के लोगों का बायोमीट्रिक सत्यापन (Biometric Mismatch) विफल हो जाता है। इसके कारण वास्तव में ज़रूरतमंद व्यक्ति राशन या पेंशन से वंचित (Excluded) हो जाता है।
(ग) निजता और डेटा सुरक्षा के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ (2017) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने निजता को अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार घोषित किया। नागरिकों के संवेदनशील वित्तीय और बायोमीट्रिक डेटा का सुरक्षित रख-रखाव तथा साइबर सुरक्षा सुदृढ़ करना एक बड़ी चुनौती है।
5: सुधार के उपाय / आगे की राह (Way Forward)
भ्रष्टाचार-मुक्त भारत और शत-प्रतिशत समावेशी विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित बहुआयामी दृष्टिकोण आवश्यक हैं:
- “High-Tech with High-Touch” दृष्टिकोण:
तकनीक को साध्य न मानकर केवल साधन माना जाए। जहाँ बायोमीट्रिक या नेटवर्क विफलता हो, वहाँ मैनुअल सत्यापन, अपवाद प्रबंधन (Exception Handling Register), और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सत्यापन को वैध विकल्प बनाया जाना चाहिए ताकि कोई भी भूखा न रहे।
- सशक्त शिकायत निवारण तंत्र (Institutionalized Grievance Redressal):
प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर DBT और ई-गवर्नेंस से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए एक पारदर्शी लोकपाल या ‘डिजिटल शिकायत अधिकारी’ की नियुक्ति अनिवार्य की जानी चाहिए।
- डिजिटल साक्षरता का प्रसार (PMGDISHA):
प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (PMGDISHA) का दायरा बढ़ाकर विशेषकर महिलाओं और वृद्धों को डिजिटल रूप से सक्षम बनाया जाए।
- डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम का कठोर कार्यान्वयन:
नागरिकों के डेटा की सुरक्षा और निजता बनाए रखने के लिए तकनीकी अवसंरचना में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन और ऑडिटिंग को सख्त किया जाए।
- निष्कर्ष: ‘विकसित भारत @2047’ का विज़न
डिजिटल गवर्नेंस और DBT केवल वित्तीय लेनदेन को सुव्यवस्थित करने के उपकरण नहीं हैं, बल्कि ये प्रशासनिक नैतिकता (Administrative Ethics), नागरिक सशक्तीकरण और सामाजिक न्याय की स्थापना के स्तंभ हैं।
जब तक राज्य कल्याणकारी योजनाओं का पूर्ण लाभ बिना किसी रुकावट के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने में सक्षम नहीं होता, तब तक स्वतंत्रता और लोकतंत्र के अर्थ अधूरे हैं। डिजिटल तकनीक ने 15 पैसे के उस पुराने दर्द को मिटाकर 100% वितरण की दक्षता हासिल करने का मार्ग प्रशस्त किया है।
यदि हम ‘डिजिटल डिवाइड’ और ‘निष्कासन त्रुटियों’ को मानवीय संवेदनशीलता के साथ हल कर लेते हैं, तो यह व्यवस्था ‘विकसित भारत @2047’ के सपने को साकार करने और भारत को सुशासन (Good Governance) के क्षेत्र में विश्वगुरु बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
“प्रशासन का अंतिम उद्देश्य केवल शासन करना नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति के आँसू पोंछना है।”
External Linking Suggestions:
1. **Direct Benefit Transfer (DBT) Mission Portal:**
https://dbtbharat.gov.in/ (आधिकारिक DBT बचत एवं योजना आंकड़ों के संदर्भ हेतु)
2. **NITI Aayog – Digital Public Infrastructure Insights:**
(नीति आयोग की रिपोर्ट एवं विकास सूचकांक हेतु)नीति आयोग की रिपोर्ट एवं विकास सूचकांक हेतु)