सफाई का महत्व और हमारी जिम्मेदारी (Essay in Hindi)
स्वच्छता और छात्र जीवन: यह जिम्मेदारी तुम्हारी है!
एक अच्छे नागरिक के गुण: आस-पास सफाई रखने का महत्व
प्यारे बच्चो ! तुम्हें कहाँ पर खेलना, पढ़ना और रहना पसंद है ? तुम कहोगे साफ-सुथरे स्थान पर। तुम ठीक कह रहे हो। सभी को साफ-सुथरे स्थान पसंद हैं, किन्तु बहुत कम ऐसे हैं जो अपने आस-पास सफाई रखते हों। सफाई पसंद करना अच्छी बात है और स्थान साफ-सुथरा न रखना बुरी बात है। तो मेरी सलाह यह है कि तुम अच्छी बात सीखो और आलसी लोगों की नकल मत करो।
मैं तुम्हें आज यह बताना चाहता हूँ कि अपने आस-पास सफाई रखने की जिम्मेदारी तुम्हारी है। तुम कहोगे दूसरों की जिम्मेदारी तुम्हारे सिर पर क्यों थोपी जा रही है, किन्तु मैं बतलाना चाहता हूँ कि यह जिम्मेदारी तुम्हारी है और केवल तुम्हारी है। यदि प्रत्येक लड़का अपना-अपना घर और अपने-अपने सामने का स्थान साफ रखेगा तब पूरा मुहल्ला या गाँव साफ रहेगा। मैं तो केवल तुम्हारी व्यक्तिगत जिम्मेदारी बतला रहा हूँ। यदि प्रत्येक लड़का अपनी-अपनी जिम्मेदारी समझे तो बात बन जाएगी।
तुम प्रतिदिन अपने मुहल्ले के पार्क में खेलने जाते होगे। यदि तुम पार्क में खेलते हो तो इसे साफ-सुथरा रखने की जिम्मेदारी तुम्हारी है न कि किसी और की। अपने-अपने स्कूलों में, जहाँ तुम प्रतिदिन पढ़ने जाते हो, प्रत्येक लड़का अपने बैठने का स्थान साफ रखेगा तब पूरा स्कूल साफ रहेगा। जब खेलने और पढ़ने का स्थान साफ रहेगा तब तुम्हारा स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, खेलने-पढ़ने में मन लगेगा और अच्छी आदत बनेगी।
सफाई पसंद बनने की आदत डालना प्रत्येक बच्चे का कर्त्तव्य है। खेलने के स्थान पर ईंट-पत्थर इकट्ठा न करना, पढ़ने के कमरे में कागज के टुकड़े न फेंकना और रहने के स्थान पर प्रतिदिन झाड़ू लगाना सफाई रखने के लिए आवश्यक है। जो बच्चे ऐसा नहीं करते वे पास-पड़ोस में गन्दगी फैलाते हैं।
क्या तुमने कभी कुत्तों को बैठते देखा है? और यदि देखा है तो क्या सीखा है? कुत्ता किसी स्थान पर बैठने के पूर्व अपनी पूँछ से उस स्थान को साफ करता है और तब बैठता है। यदि एक जानवर में सफाई की आदत है तो आदमी में यह अच्छी आदत होनी ही चाहिए।
तुमने शायद सुना होगा कि ‘एक मछली सारे तालाब को गन्दा करती है’। यदि एक मछली सड़ जाती है तो उसकी बदबू से सारा तालाब महकने लगता है। ठीक इसी प्रकार एक गन्दगी फैलाने वाला लड़का अपने पास-पड़ोस को गन्दा रखेगा। तो क्यों न तुम सब अपने आस-पास सफाई रखने की आदत डालो।
अपने माता-पिता के साथ, भाई-बहन के साथ या दोस्त के साथ यदि कहीं बाहर जाओ, किसी से मिलने जाओ या किसी स्थान पर सैर-सपाटे के लिए जाओ, तब वहाँ देखो कि सफाई कैसे रखी जाती है। जिन गलियों, मुहल्लों या सड़कों से गुज़रो, वहाँ की सफाई से अपने पास-पड़ोस की सफाई की तुलना करो। यदि तुलना में सफाई कम है तो तुम अपने घर वापस लौटने पर अपने घर और मुहल्लों की सफाई पर और अधिक ध्यान दो।
एक बात सदा ध्यान में रखने की है, और वह यह कि प्रत्येक लड़का अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाए। इससे यह होगा कि पूरा मुहल्ला साफ रहेगा। यदि कुछ बच्चे अपनी जिम्मेदारी निभायें और कुछ न निभायें तो बात बिगड़ेगी। ‘सात-पाँच की लाठी, एक आदमी का बोझ’ की कहावत शायद तुमने सुनी हो। इसका मतलब यह है कि यदि पाँच या सात व्यक्ति अपनी-अपनी लाठियाँ लेकर साथ चलें तो वह किसी एक व्यक्ति के लिए बोझ नहीं बनेगी, और यदि वे सब अपनी लाठियाँ किसी एक व्यक्ति को ढोने के लिए दे दें, तो वह उसके लिए भारी बोझ बन जायेगी।
सफाई रखने के मामले में भी ऐसा ही है। यदि मुहल्ले में सभी सफाई पर ध्यान न दें और किसी एक व्यक्ति के भरोसे छोड़ दिया जाय, तो सफाई रखना बहुत ही कठिन हो जायेगा।
जहाँ सफाई रहती है वहाँ देवता निवास करते हैं, ऐसा लोगों का विश्वास है। मैं तुम्हें इतना विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि साफ-सुथरे स्थान पर काम करने में मन लगता है और स्वास्थ्य ठीक रहता है। सड़ी-गली गलियों में, जहाँ नालियों की दुर्गन्ध से नाक फटती है, वहाँ मन घुटने लगता है, काम करने की बात तो अलग रही। साथ ही दुर्गन्धित वायु में साँस लेने से स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है।
सफाई जीवन का आवश्यक अंग है। यदि तुम चाहते हो कि तुम स्वस्थ वातावरण में रहो, खेलो-कूदो-पढ़ो, तो तुम्हें अपने आस-पास सफाई रखनी ही होगी और इसकी जिम्मेदारी तुम्हारी है। अपने-अपने मुहल्लों में तुम टोलियाँ बना लो और अपने खाली समय में मुहल्ले को साफ-सुथरा रखने का प्रयास करो। जो गन्दगी फैलाते हैं, उन्हें समझाओ कि वे ऐसा न करें।
यदि तुम्हारे मकान के सामने कुछ खुला मैदान है, तो तुम उसे सुन्दर ढंग से सजाने का प्रयास करो, ताकि अन्य लोग भी तुम्हारा अनुकरण करने के लिए प्रेरित हों। जिस कमरे में सुबह-शाम पढ़ने बैठते हो, वहाँ यदि कभी धूपबत्ती या अगरबत्ती जला दिया करो तो सुगन्धि फैलेगी। लॉन में फूल लगाओगे तो सुगंध भी मिलेगी और वह सुंदर भी लगेगा।
सुबह-शाम का कुछ समय बागवानी में लगाने से न केवल सफाई बनी रहेगी, बल्कि शारीरिक श्रम भी हो जायेगा जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। यदि तुम इन बातों पर ध्यान दोगे तो तुम्हारा पास-पड़ोस साफ-सुथरा रहेगा और तुम सब में उत्तम नागरिक गुणों का विकास होगा।