परीक्षा में नकल और हमारा नैतिक व्यवहार (निबंध)
"एक बार की नकल से मिली सफलता, आपके पूरे भविष्य को अंधकार में धकेल सकती है। जानिए क्यों महानता शॉर्टकट से नहीं, बल्कि सच्ची मेहनत से मिलती है!"
परीक्षा में नकल करने के नुकसान और एक आदर्श छात्र के कर्तव्य
प्यारे बच्चो! क्या आपने कभी शांत दिमाग से यह सोचने का प्रयास किया है कि परीक्षा में नकल करने की प्रवृत्ति आपके चरित्र को कितना नुकसान पहुँचाती है?
क्या नकल से सफलता संभव है? छात्रों के लिए एक सीख
मान लीजिए, कल आपने इम्तिहान में नकल करने की कोशिश की। आपने सोचा कि आप बहुत चालाकी से काम ले रहे हैं, लेकिन शिक्षक (मास्टर जी) की पारखी नजरों से आप बच नहीं सके और पकड़े गए। पकड़े जाने के बाद ग्लानि महसूस करने के बजाय, आप उल्टे अपने शिक्षक से ही चिढ़ गए और उनका अनादर करने लगे। जरा रुकिए और ठंडे दिमाग से सोचिए—क्या आपका यह व्यवहार किसी भी दृष्टि से ठीक था?
आखिर किसी विद्यार्थी को इम्तिहान में नकल करने की जरूरत क्यों पड़ती है? इसका सीधा सा कारण यह है कि उसने समय रहते अपनी पढ़ाई ठीक से नहीं की। एक अच्छे और अनुशासित विद्यार्थी का सबसे पहला और बड़ा कर्तव्य यह होता है कि वह मन लगाकर पढ़े, शिक्षक द्वारा पढ़ाए गए पाठों को याद रखे और निरंतर अभ्यास करे। यदि आपने अपनी पढ़ाई में पूरी मेहनत और रुचि दिखाई होती, तो परीक्षा भवन में आपको किसी शॉर्टकट या नकल का सहारा लेने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। अच्छे विद्यार्थी मेहनत के बल पर आगे बढ़ते हैं, न कि धोखे के बल पर।
परीक्षा में जो भी प्रश्न पूछे जाते हैं, वे आपके पाठ्यक्रम और पढ़ाए गए पाठों के आधार पर ही होते हैं। जब कोई छात्र साल भर मौज-मस्ती में समय गंवा देता है, तो वह प्रश्नों का उत्तर देने में असमर्थ हो जाता है और यहीं से नकल करने की बुरी आदत का जन्म होता है।
एक पुरानी और बहुत ही सटीक कहावत है—“जैसा बोओगे, वैसा ही काटोगे।” आप जितनी मेहनत करेंगे, आपको उतना ही उत्तम फल मिलेगा। भला कोई बबूल का पेड़ बोकर मीठे आम के फल की इच्छा कैसे कर सकता है? जब आपका कर्म (पढ़ाई न करना) ही सही नहीं था, तो आप अच्छे परिणाम की उम्मीद कैसे रख सकते हैं?
अब एक और स्थिति पर विचार करते हैं। मान लीजिए कि आपने परीक्षा में नकल की और आप पकड़े जाने से बच निकले। आपने सारे उत्तर सही-सही लिख दिए और अच्छे अंकों से पास भी हो गए। पर क्या आप सचमुच इसे अपनी सफलता मानते हैं? गलत तरीका हमेशा गलत ही रहेगा। बिना पढ़े पास होने का मतलब है कि आपके पास उस विषय का कोई वास्तविक ज्ञान नहीं है। इस कमी के कारण अगली कक्षा में आपको और अधिक कठिनाई और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
इतना ही नहीं, इस अस्थायी सफलता से आपकी आदत और खराब हो जाएगी। आप सोचने लगेंगे कि अगली बार भी नकल करके बच निकलेंगे। यह प्रवृत्ति अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसी है। छात्र जीवन का जो अमूल्य समय आपको ज्ञान अर्जित करने के लिए मिला है, उसे आप व्यर्थ गंवा रहे हैं और साथ ही अपने भीतर एक मानसिक बीमारी (बुरी आदत) पाल रहे हैं।
याद रखिए, नकल करके आप एक बार बच सकते हैं, दो बार बच सकते हैं, लेकिन हर बार नहीं! जिस दिन आप पकड़े जाएंगे, उस दिन भारी मानसिक और सामाजिक नुकसान होगा। संभव है कि आपको परीक्षा से निष्कासित (सस्पेंड) कर दिया जाए, फेल कर दिया जाए या भविष्य की परीक्षाओं में बैठने पर प्रतिबंध लगा दिया जाए। तब नुकसान किसका होगा? भविष्य किसका बर्बाद होगा? निश्चित रूप से केवल और केवल आपका!
इस निबंध का दूसरा सबसे दुखद पहलू यह है—पकड़े जाने पर शिक्षक का अनादर करना। यह तो वही बात हुई कि ‘एक तो चोरी, ऊपर से सीनाजोरी!’ नकल करना अपने आप में एक नैतिक अपराध है। यदि किसी भूलवश ऐसा हो भी गया था, तो अपनी गलती को सहजता से स्वीकार करना चाहिए था और भविष्य में ऐसा न करने का संकल्प लेना चाहिए था। एक सच्चा शिक्षक विद्यार्थी की वास्तविक पश्चाताप की भावना को देखकर उसे क्षमा भी कर सकता है। परंतु इसके विपरीत नाराजगी दिखाना या उग्र होना यह दर्शाता है कि आप नकल को अपना अधिकार समझने लगे हैं!
परीक्षा हॉल में शिक्षक का भी एक कर्तव्य होता है। उनका कर्तव्य है कि वे परीक्षा की शुचिता (पवित्रता) बनाए रखें और किसी भी छात्र को अनुचित साधनों का उपयोग न करने दें। जब उन्होंने आपको पकड़ा, तो वे केवल अपना कर्तव्य निभा रहे थे। किसी को उसके कर्तव्य पालन से रोकना या उसके प्रति अभद्र व्यवहार करना एक और गंभीर सामाजिक अपराध है।
यदि आपकी इस अशिष्टता के कारण आपको विद्यालय या परीक्षा से बाहर कर दिया जाता है, तो आपका पूरा साल बर्बाद हो जाएगा। इस कृत्य से न केवल आपको, बल्कि आपके माता-पिता और पूरे परिवार को भारी मानसिक कष्ट और समाज में लज्जा का सामना करना पड़ेगा। समाज और परिवार के लोग आपको फिर आदर की दृष्टि से नहीं देखेंगे।
इसलिए प्यारे बच्चो, समय के महत्व को समझें। शॉर्टकट के छलावे में न आएं। अपना काम पूरी ईमानदारी, लगन और मेहनत के साथ करें। भूलकर भी कभी परीक्षा में नकल करने की चेष्टा न करें, क्योंकि सच्ची सफलता का कोई विकल्प नहीं होता।