कुत्ते की लापरवाही और मृत्यु का रहस्य


काल्पनिक कहानी: जानिए क्यों कहते हैं ‘कुत्ते की मौत मारा गया’? | बाल कहानियां



Kutte Ki Maut Mara Gaya Story in Hindi | बच्चों की मजेदार कहानियां


बहुत प्राचीन समय की बात है , भगवन ने इस श्रृष्टि की जब रचना की तो बहुत प्रकार के जीव-जंतु , पेड़ -पौधे, कीड़े-मकौड़े , आदि उत्पन्न किये , तथा सभी लोकों के जीव या प्राणियों के लिए के लिए ये विकल्प के साथ अधिकार दिया कि वो चाहे जब तक इसी शरीर में अनंत काल तक अमर रह सकता है , और चाहे तो मृत्यु का वरण कर सकता है, ये सब के साथ लागू होगा अतः इस विकल्प को सोच समझ कर निर्णय लेने के बाद भगवान के पास सूचना पहुंचानी होगी | सूचना पहुंचते ही यह अधिकार तुरन्त प्रभाव से लागू कर दिया जायेगा फिर कोई संशोधन नहीं किया जायेगा |

इस बात को लेकर पृथ्वी लोक के जीवों में विचार-विमर्श होने लगा, आखिर एक दिन मनुष्यों, जलीय-जीवों, पशु-पक्षियों ने मिल कर एक सभा का आयोजन किया , इस सभा का सभापति मगरमच्छ को बनाया गया | कई दिन तक बहस चली , कुछ जीव मृत्यु के पक्ष में थे जबकि मनुष्य और उसके पालतू जीव अमरता के पक्ष में थे , अंत में जब निर्णय नहीं हुवा तो जनमत का सहारा लिया गया , इस जनमत में मनुष्य और अमरता लेने वालों के पक्ष में मत अधिक आये और वो जीत गये और मृत्यु चाहने वालों का प्रस्ताव मत गिर गया |

Kutte Ki Maut Mara Gaya Kahani -

मगरमच्छ और अन्य कई जीवों ने अपना विरोध प्रकट किया कि फिर हमारे भोजन का क्या होगा , हमें तो भूखे ही रहना होगा पर विजयी दल ने उनकी दलील पर कोई ध्यान नहीं दिया |

जब अमरता के पक्ष में जीत तय हो गई तो इसकी सूचना भगवान तक पहुंचानी थी तो मनुष्यों ने अपने सबसे वफादार जीव कुत्ते को ये सन्देश देकर भगवान के पास जाने के लिए नियुक्त किया , कुत्ते को समझाया गया कि वहां जाकर ये सन्देश ऐसे सुना देना है “ पृथ्वी लोक के सभी जीवों को अमरता चाहिए”|

कुत्ता सन्देश लेकर रवाना हो गया , काफी दूरी तय करी, जंगल,नदी-नाले पार करता आगे बढ़ रहा था कि उसको कुछ सुगन्ध आने लगी| अपनी सूंघने की शक्ति का सहारा लेकर वह इधर-उधर भटका तो देखा नदी के किनारे कुछ हड्डियों का ढेर पड़ा है , कुत्ता कई दिन का भूखा था, हड्डियों को देखते ही उसके मुहँ में पानी आ गया , उसका धैर्य टूट गया और वह उन हड्डियों पर टूट पड़ा| हड्डियां इतनी स्वादिष्ट लगी उसको कि वह भूल चूका था कि उसे भगवान के पास सन्देश पहुँचाना है , पेट भर जाने के बाद नदी से पानी पी आता और फिर हड्डियाँ चबाने लगता |

Kutte Ki Maut Mara Gaya Kahani -

नदी में बैठा मगरमच्छ ये सब देख रहा था , उसे कुत्ते की नादानी और लापरवाही पर हँसी आ रही थी , परन्तु उसके दिमाग में एक अनोखा विचार आया , उसने सोचा ये ही मौका है , ये चुके तो फिर चुके ही चुके |
मगरमच्छ तुरंत मेढक के पास गया और बोला कि तुम तुरंत भगवान के पास जाओ और जाकर कहना कि” पृथ्वी लोक के सभी जीवों को मृत्यु चाहिए”|

मेढक पानी में छलांगे लगाता हुवा और फिर कभी धरती पर फुदकता हुवा भगवान के दरबार में जा पहुंचा और जाकर जैसा मगरमच्छ ने कहा था वैसा ही सन्देश सुना दिया कि “पृथ्वी लोक के सभी जीवों को मृत्यु चाहिए”|

Kutte Ki Maut Mara Gaya Kahani -


भगवान ने कहा , “जैसा आपका निर्णय वैसा ही होगा” यह सुनते ही मेढक तो वापिस अपने घर के लिए रवाना हो गया और भगवान् ने तुरन्त अपने कार्मिकों को पृथ्वीलोक लिए मृत्यु का अधिकार देने का आदेश दिया कि मृत्यु को पृथ्वी लोक पर भेज दिया जाये |
आदेश जारी होते ही मृत्यु को पृथ्वी लोक के लिए भेज दिया गया |
उधर कुत्ता कई दिन हड्डियाँ चबाता रहा , जब वो ख़त्म हो गई तो उसे याद आया कि वो तो सन्देश पहुँचाने के लिए जा रहा था , और वो भागा और भगवान के दरबार में पहुंचा और हांफते-हांफते बोला -“पृथ्वी लोक के सभी जीवों को अमरता चाहिए”|
भगवान् ने कहा “ये कैसे हो सकता है, तुम से पहले मेढक आकर गया और उसने तो मृत्यु की मांग रखी है”|
कुत्ते ने कहा ” नहीं ये झूठ है , मेढक तो हार वाले पक्ष में था”|
भगवान ने कहा ” मगर वो तो तुमसे पहले आ कर गया”
कुत्ते ने अपनी पूंछ हिलाई , निवेदन किया कि वो मेढक झूठा है , सभा ने अमरता का प्रस्ताव पास किया है”|
भगवान ने कहा “तुम्हारी मांग समय से नहीं आई इसलिए हमने तो मृत्यु को पृथ्वी लोक के लिए आदेश देकर रवाना कर दिया , अब तक तो उसने वहां नियक्ति भी ले ली होगी , अब कुछ नहीं हो सकता है”|
इस प्रकार मौत इस भूलोक पर आगई |

जब कुत्ता वापिस पहुंचा तो उसे सभी जीवों ने खूब मारा, मरे हुवे को भी कई लोग और मार आते और उस दिन से ये कहावत चल पड़ी ,😀😀😀😀😀😀 कुत्ते की मौत मारा गया |

💡 कहानी की सीख (Moral of the Story)

“आलस और जिम्मेदारी के प्रति लापरवाही हमेशा भारी नुकसान पहुंचाती है। जब हमें कोई महत्वपूर्ण काम सौंपा जाए, तो रास्ते के लालच और भटकाव को छोड़कर सबसे पहले अपने कर्तव्य को पूरा करना चाहिए, क्योंकि समय बीत जाने के बाद पछताने से कुछ हासिल नहीं होता।”

युवाओं और बच्चों के लिए आसान शब्दों में:

  • बच्चों के लिए: खेल और मजे से पहले हमेशा अपने जरूरी काम को पूरा करना चाहिए, नहीं तो नुकसान उठाना पड़ता है।
  • युवाओं के लिए: जीवन में मिलने वाले बड़े मौकों को लापरवाही और तात्कालिक सुख (Short-term pleasure) के चक्कर में कभी नहीं गंवाना चाहिए।

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