A Symbol of Human Love: Napoleon Bonaparte
नेपोलियन मानव प्रेम का प्रतीक
फ़्रांस का बादशाह Napoleon Bonaparte नेपोलियन बड़ा ही शूरवीर , देशप्रेमी , और उदार प्रवृति का इन्सान था|
एक बार Napoleon Bonaparte लड़ाई के दिनों में आस्ट्रिया की राजधानी वियना तक अपनी सेना सहित पहुँच गया | उसने अपने एक दूत को अपना झंडा देकर आस्ट्रिया एक बादशाह के पास संधि का प्रस्ताव भिजवाया, पर जैसे ही उसका दूत नगर में पहुंचा लोगों ने घेर कर दूत को मार डाला |
Napoleon Bonaparte को जब यह सूचना मिली तो वह क्रुद्ध हो उठा और उसने अपनी सेना को उनके नगर पर हमला करने के लिए आदेश दे दिया |
Napoleon Bonaparte का आदेश पाते ही उसके सैनिकों ने वियना नगर को चारों तरफ से घेर लिया और देखते ही देखते कोहराम मच गया , बंदूके , तोप की आवाज से सारा नगर दहल गया |
अचानक वियना के किल्ले का दरवाजा खुला और एक दूत विअना का झंडा लेकर सुलह के लिए आता हुवा दिखाई दिया| Napoleon Bonaparte ने दूत को देखा तो अपनी सेना को तुरंत युद्ध रोकने का आदेश दे दिया , कुछ देर में तोप , तलवारें शांत हो गई |
Napoleon Bonaparte ने दूत को आदर सम्मान दिया और दूत ने निवेदन किया कि आपकी सेना नगर के बीच में जिस जगह बार-बार गोले गिरा रही है , उसके पास ही बादशाह का राज भवन है उसमें उनकी एक पुत्री बहुत ही गंभीर बीमार है बादशाह उसकी सेवा कर रहे है , अगर उस जगह तोप के गोले गिराना बंद नहीं किये तो बादशाह को मज़बूरी में अपनी बीमार पुत्री को छोड़ कर दूसरी जगह जाना पड़ेगा |
जब दूत Napoleon Bonaparte से ये निवेदन कर रहा था उस समय नेपोलियन के सेनापति भी पास ही खड़े थे वो बोलने लगे ” बादशाह , हमारी जीत होने वाली है , जिस जगह गोले गिरा रहे है उस जगह गिराने जरुरी है उसे रोका नहीं जा सकता”|
नेपोलियन ने अपने सेनापतियों की बात को नजरंदाज करते हुवे कहा ” ये सच है कि हमारी जीत होने वाली है , और उस जगह गोले गिराने भी बंद नहीं करने है पर मानवता नाम की भी कुछ भावना होती है , और इस समय मानवता की भावना ये कह रही कि बीमार राजकुमारी की रक्षा की जाये”|
और फिर नेपोलियन ने गोले गिराने बंद करा दिया , हालाँकि उस युध्द में नेपोलियन की हार हुई पर क्या सच नहीं कि उसने मानवता के नाते आस्ट्रिया देश ही नहीं उसके बादशाह के हृदय को भी जीता |
नेपोलियन सिर्फ बादशाह का ही नहीं बल्कि अपने छोटे से नागरिक का मूल्य समझता था, नेपोलियन को जब अंग्रेज सेनाओं ने गिरफ्तार कर लिया और फिर उसको बंदी बना कर सेंट हेलना द्वीप एक पानी के जहाज से ले जा रहे थे , उस जहाज को चलाने वाले मलाह से बहुत प्रेम से बात करी और अंत में उस से कहा कि भाई कल तुम भोजन हमारे साथ ही करना |
साधारण से मलाह के लिए ये अनहोनी बात थी क्योंकि जहाज के अफसर उसको खाने की टेबल से पास तक नहीं आने देते थे | मलाह ने नेपोलियन से कहा कि “आपकी उदारता के लिए मैं आपका शुक्रगुजार हूँ पर क्या जहाज से अफसर मुझे आपके साथ बैठकर खाने की इजाजत देंगे”|
नेपोलियन ने खुद जहाज के अफसरों से इसकी इजाजत ली और फिर मलाह से साथ बैठ कर खाना खाया |
नेपोलियन की मानवता मूल्य और उदारता की कहानी अमर है |