Pyari Bahin sonu ki Kahani: Hindi story for kids
प्यारी बहिन सोनू की कहानी
Pyari Bahin sonu ki Kahani: Hindi story for kids
राघव अपने माता-पिता का सबसे बड़ा लड़का था , और दादा-दादी का लाडला भी था , बचपन में उसकी सब बात मान ली जाती थी इस कारण अब वो कुछ जिद्दी हो गया है और बात-बात पर गुस्सा भी करता है |
राघव की एक छोटी प्यारी सी बहिन है , नाम है सोनू , बहुत ही सुंदर और मासूम , सबके साथ खेलना और सबसे बातें करना उसे पसंद है , अभी वो स्कुल नहीं जा रही है , पर राघव के साथ-साथ वो तैयार हो जाती है , पापा का थैला लेकर पर फिर दादी उसे घुमाने के बहाने ले जाती है और वापिस ले आती है |
राघव स्कुल से आने के बाद अपने दोस्तों के साथ खेलने पास के पार्क में जाने को घर से निकला ही था कि सोनू ने भी साथ चलने के लिए अपने जुत्ते पहने |
राघव को सोनू का साथ चलना बिलकुल पसंद नहीं था , उसने तुरंत उसे धमकाया “देख सोनू , मेरे साथ नहीं चलना है , तू घर पर ही खेल |
पर सोनू ने प्यार कहा “क्यों भैया . मैं भी खेलूंगी उधर पार्क में “
“चुपचाप घर में ही खेल , समझी , नहीं तो मरूँगा अभी ” राघव ने धमकाते हुवे कहा |
“नहीं, तू भी घर पर ही खेल ” सोनू ने कहा |
राघव में उसके बाल पकड़ कर खींचे |
सोनू का मुंह उतर गया और वो रोने लग गई |
वह रोने लगी तो मम्मी दौड़कर आई और पूछा, ” क्या हो गया मेरी बेटी को?”
सोनू ने रोते रोते कहा कि भैया मुझे अपने साथ पार्क में नहीं ले जा रहा खेलने के लिए|
मम्मी ने राघव को डाँटते हुवे कहा , क्यों रे राघव , ये भी खेलेगी , ले जा इसे भी|
“नहीं मम्मी, इसके लग जाएगी बॉल की फिर रोएगी, ये इधर उधर भागती रहती है” राघव ने कहा |
कोई बात नहीं , तू बड़ा है , इसका ध्यान रखना , मम्मी ने राघव को समझाया |
राघव ने बहुत बहाने बनाये पर मम्मी के आगे उसकी एक न चली और आखिर वह सोनू को साथ ले जाने को राजी हो गया पर बिना मन के |
सोनू और राघव दोनों पार्क में आ गये और राघव अपने दोस्तों के साथ खेलने में व्यस्त हो गया , सोनू भी चिंकी के साथ खेल रही थी |
काफी समय बाद राघव अपने दोस्तों के साथ खेलते-खेलते किसी बात पर बहस करने लगा और उसने गुस्से से बॉल को फेंक दिया |
बॉल पार्क से बाहर गई और गली में चल रहे एक बुजुर्ग दादा के सिर पर लग गई , बॉल लगते ही दादा तो गिर गये |
Pyari Bahin sonu ki Kahani: Hindi story for kids
राघव को जैसे ही पता चला वो तो वहां से भाग गया पर सोनू दौड़ कर दादा के पास गई और उसने दादा को पुकारा |
छोटी से बच्ची की आवाज सुनकर दादा आंखे झेंपते हुवे बैठे और बोले ” हाँ बेटी , क्या कह रही हो “|
आपको लगी तो नहीं , वो बॉल मेरी थी पर भैया ने फेंक दी थी , सोनू ने डरते हुवे कहा |
दादा ने कहा ” नहीं, लगी तो नहीं , पर ऐसे बॉल नहीं फेंकते है , अच्छा वो रही तुम्हारी बॉल”|
दादा जब उठ कर चलने लगे तो सोनू ने दादा से सॉरी कहा और उनके पाँव छुवे |
दादा ने उसे आशीर्वाद दिया |
बॉल लेकर अब वो वापिस पार्क में गई तो सब बच्चे भाग चुके थे |
सोनू सीधे घर आई तो देखा राघव अपने कमरे में छुप कर बैठा है , जैसे ही उसने सोनू को देखा तो बड़े प्यार से पुकारा ” ओ सोनू , घर पर मत किसी को कुछ मत कहना , नहीं तो कल फिर खेलने नहीं ले जाऊंगा”|
सोनू ने कहा , “तुम तो आज भी नहीं ले जा रहे थे वो तो मम्मी ने कहा तब ले गये थे , पर पहले ये बताओ कि तुम भाग क्यों गये थे ?
राघव ने कहा , “वो दादा मारते मुझे”
“पर उन्होंने मुझे तो नहीं मारा” सोनू ने कहा |
तुम तो लड़की हो ना, लड़कियों को नहीं मारते” राघव ने अपने को होशियार समझते हुवे कहा |
“तो फिर तुम तो मुझे मार देते हो ” सोनू ने कहा |
“अच्छा बाबा , आज से कभी नहीं मारूँगा , राघव ने कहा |
ठीक है फिर , आज मेरी वजह से तुम बच गये , पहले दादा से , अब मम्मी से | पर तुम पहले मेरे सिर पर हाथ रख कर कहो कि आज से तुम गुस्सा नहीं करोगे और मुझे हमेशा पाने साथ खेलाने लेकर जाओगे |
राघव ने सिर पर हाथ रख कर कहना शुरू किया ही था कि मम्मी आ गई , उसने सब सुना और फिर तो राघव की सारी बात सोनू ने बता दी |
मम्मी ने राघव को और समझाया और उसे माफ़ कर दिया |
अब राघव हमेशा सोनू के साथ ही खेलता है , कभी उस पर गुस्सा नहीं होता , ना ही कभी उसे मारता है |
तो देखा बच्चों , आपने पढ़ी एक प्यारी सी कहानी , अगर आप भी अपनी बहिन को मारते हो तो राघव की तरह छोड़ देना और सोनू की तरह हमेशा अच्छी आदतों का अनुसरण करना |