Bejuban maa ki kuku ko seekh wali kahani बेजुबान माँ की कुकू को सीख

पूरी कहानी

Bejuban maa ki kuku ko seekh wali kahani बेजुबान माँ की कुकू को सीख

“ रोक्सी आ , जल्दी आ “ भाग, भाग “ कुकू के बुलाते ही रोक्सी अपनी दूम हिलाती हुई उसके पीछे पीछे दौड़ाने लगी | रोक्सी के दो छोटे छोटे पिल्लै भी साथ साथ उठते पड़ते आ रहे थे |
सर्दी के दिन थे | सुहानी धूप में बगीचा चमक रहा था | रोक्सी और कुकू बड़ी देर तक बगीचे में गेंद खेलते रहे | काफी देर बाद कुकू थक गया तो हलकी धूप में लेट गया और रोक्सी अपने पिल्लो को दूध पिलाने लग गई , रोक्सी बेजुबान थी पर अपने पिल्लो को बहुत प्यार कर रही थी , कभी चाटती कभी मुहँ से दबा कर अपने छिपका रही थी |
कुकू लेटे-लेटे आकाश की तरफ देख रहा था , एकाएक उसके पैर में गुदगुदी होने लगी , वह झट से उठा देखा तो एक छोटी सी गिलहरी थी जो भाग गई |

Bejuban maa ki kuku ko seekh wali kahani 

“अरे गिलहरी “ रुक ! अभी तुझे पकड़ लूँगा “ ऐसे बोलते हुवे कुकू उसके पीछे भागा पर गिलहरी पेड़ पर चढ़ चुकी थी , कुकू पेड़ पर चढ़ गया पर वह नीचे कूद गई |
थोड़ी देर अपनी कोशिश करने पर कुकू को कुछ याद आई , वह तुरंत अपने घर की तरफ भगा और अपने हाथ में एक चूहेदानी लेकर आया , उसमें कुछ मूंगफली के दाने , और कुछ रोटी के टुकड़े डाल कर उसको पेड़ के नीचे रख दिए |

रोक्सी ये सब देख रही थी पर वह अपने पिल्लों को दूध पिलाने में लगी थी | कुकू चूहेदानी रख कर रोक्सी के पास आया और बोला “ रोक्सी आज इस गिलहरी को पकड़ना है “
रोक्सी ने जोर से भों -भों किया और फिर दूर जाकर बैठ गई |
कुकू और रोक्सी काफी समय तक इंतजार करते रहे ताकि गिलहरी उस चूहेदानी में आ जाये तो पकड़ कर घर ले जाये पर पर वो चंचल गिलहरी पेड़ पर ही फुदकती रही |

इतने में कुकू की माँ ने जोर से आवाज दी “ अरे ओ कुकू बेटा ! आजा ओ खाना खा लो “|
हाँ माँ , आया ! कुकू ने माँ को जवाब दिया |
कुकू ने रोक्सी को कहा “देख रोक्सी तू ध्यान रखना , वो गिलहरी जैसे ही चूहेदानी में फंस जाये तो मुझे बता देना , मैं अभी खाना खा कर आता हूँ “
रोक्सी ने भों-भों करके उसका जवाब दिया पर सामने नहीं देखा |
कुकू खाने खाने के बाद कुछ देर टीवी देखने लग गया , इतने में रोक्सी भागती हुई कुकू के पास आई और अपना मुंह ऊपर करके रोने जैसी आवाजे निकालने लगी |
कुकू बोला, “ क्या है, रोक्सी , गिलहरी चूहेदानी में आ गई क्या ?
रोक्सी तो अब कुकू की पेंट अपने मुंह में पकड़ कर उसे खींचने लगी पर कुकू समझ नहीं पाया |
फिर रोक्सी ने कुकू का हाथ पकड़कर उधर बगीचे की तरफ ले जाने की कोशिश करने लगी। कुकू ने सोचा , शायद गिलहरी पकड़ी गई |
कुकू चलने लगा तो रोक्सी के पैर भी जल्दी-जल्दी उठे, वो बार -बार कुकू को देख देख रोने जैसी भोंक रही थी |
थोड़ी ही देर में दोनों को एक पिल्ला सामने आता दिखा और फिर पेड़ के नीचे पहुंचे तो देखा एक पिल्ला वहां है ही नहीं |
अब कुकू को समझ में आया कि रोक्सी क्यों रो रही थी ? इधर -उधर देखने के बाद जब पिल्ला कहीं नहीं दिखा तो कुकू बाहर की तरफ देखने के लिए जाने लगा , तो रोक्सी भाग कर उस चूहे दानी के पास गई , पीछे पीछे कुकू भी गया |

Bejuban maa ki kuku ko seekh wali kahani 


कुकू ने वहां जाकर देखा कि उसका एक पिल्ला तो बेचारा उसमें फसा हुवा है और वो इसी कारण जोर जोर से भों-भों कर रही थी |
उसनें बड़ी सावधानी से उसके पिल्लै को बाहर निकाला , जैसे ही पिल्ला बाहर आया रोक्सी तो जोर जोर से रोने लगी और अपने पिल्लै को चाटने लगी |
कुकू ये सब देख कर भावुक हो गया | थोड़ी देर बाद उसने ऊपर पेड़ की तरफ देखा कि रोक्सी जोर से भोंकी जैसे वो कुकू को कह रही हो , उस गिलहरी को नहीं पकड़ना उसकी माँ बेचारी इंतजार ही करती रहेगी |
कुकू ने अब मन ही मन में सोच लिया था कि अब किसी बेजुबान जीव को पकड़ के नहीं रखेगा |
एक बेजुबान माँ के प्यार ने कुकू को बेजुबानों को अपनी आजादी से जीने सबक सिखाया |

कहानी से सीख: Moral Of story

  • इस कहानी में हमें यह सीख मिलती है कि हर प्राणी आजाद रहना चाहता है , उसे अपने आवास स्थल पर आराम से रहने दो|  
  • जानवर भले ही बेजुबान होते है पर उनमें भी भावनाएं होती है , अपनी संतान से वो भी उतना ही प्रेम करते है जितना मनुष्य अपनी संतान से करता है |

कहानी से सीख: Moral Of story

इस कहानी का सार ये है कि हमें अपने बच्चों को हर जीव के प्रति दया भाव रखने की सीख देनी चाहिए और अपने मनोरंजन के लिए किसी भी जीव को पिंजरे में पकड़ कर नहीं रखे , जीवों के लिए भोजन ,पानी , आवास की जिम्मेदारी ले |

किसी ने कहा भी है कि :-

प्रकृति ने मुझे कभी नहीं कहा: गरीब मत बनो; और न ही कहा: अमीर बनो; उसकी पुकार हमेशा थी: स्वतंत्र बनो”।

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