मेजर डिक और साधू का चमत्कार

एक अंग्रेज अधिकारी के जीवन की वास्तविक घटना जिसके कारण वो सनातन के संतो के प्रति श्रद्धा रखने लगा |
📖 पूरी कहानी
Major Dick or Sadhu ka Chamatkar Hindi story for kids
जिस समय भारत में अंग्रेजों का शासन था उस समय मेजर डिक नाम से एक अंग्रेज अधिकारी था जो भारतियों, विशेष रूप से साधू- संत भिखारी आदि से बहुत चिढ़ता था| एक बार डिक के घर एक साधू भोजन के लिए आया और वो सीधा उसके घर के अंदर तक चला गया , हालाँकि डिक के घर के बाहर एक दो नौकर, चौकीदार भी था, एक कुत्ता भी था जो किसी भी अनजान के आते ही भौंकता था, पर आज न तो किसी चौकीदार ने उस साधू को रोका , न ही उसका कुत्ता भौंका|
साधू को अचानक से अपने घर के अंदर देख डिक तो आग बबूला हो गया, और उसने साधू को भद्दी-भद्दी गालियाँ दी और अपमानित करके घर से बाहर निकाल दिया|
फिर उसने अपने चौकीदार और नौकर को बुलाकर बहुत डांटा और कहा कि तुम लोगों ने उसे क्यों नहीं रोका?
नौकर और चौकीदार ने कहा कि इनको आते देखा तो था पर देखते ही हमारी तो सोचने समझने की शक्ति ही काम नहीं कर रही थी, ये साधू तो बहुत चमत्कारी है|
डिक ने अपने कुत्ते को भी डांटा पर कुत्ता चुपचाप सुनता रहा | पास में खड़ी उसकी पत्नी ने मेजर को समझाते हुवे कहा कि अगर ऐसे चमत्कारी साधू हो तो इतना गुस्सा क्यों कर रहे हो? मुझे कहते तो मैं उस को एक दो ब्रेड लाकर दे देती, किसी पर इतना गुस्सा अच्छा नहीं होता| मेजर को चमत्कार वाली बात पर विश्वाश नहीं हुवा |
साधू बहुत भूखा था और वहाँ से अपमानित होकर चला गया पर उसने डिक से अपने अपमान का बदला लेने का सोच लिया था |
लगभग महीने भर बाद में देश भर में प्लेग की बीमारी फ़ैलने लगी और एक रात मेजर अपने घर सो रहा था , सुबह जल्दी उसका नौकर चाय लेकर आता था पर आज वो नहीं आया तो मेजर उसके कमरे की तरफ गया तो नौकर जोर जोर से चिल्लाने लगा “साहब इधर मत आना , इधर प्लेग फ़ैल गया है सारा मोहल्ला घर खाली कर यंहा से चले गए है, आपको भी तुरंत शहर छोड़ना होगा|
मेजर डिक और उसकी पत्नी बिना कुछ सामान लिए ही वहां से डाक बंगले आये, वहां आकर चाय का आर्डर दिया , चाय आई पर चाय में केरोसिन जैसी बदबू आ रही थी , एक घूंट लेते ही दोनों को उल्टी सी होने लगी, वे बिना चाय ही रहे| थोड़ी ही देर में कप्तान स्मिथ डाक बगले आये और डिक से कहा कि तुम जल्दी से छावनी जाओ|
डिक ने कप्तान को कहा कि उसने सुबह से चाय भी नहीं पी है और न ही भोजन किया है |
कप्तान ने कहा कि खाने की व्यवस्था वो छावनी में करवा देंगे, तुरंत छावनी में जाओ |
कप्तान के आदेश के चलते मेजर डिक अपनी पत्नी के साथ छावनी आ गया |
कप्तान ने अपने घर से नौकर के साथ डिक के लिए खाना भेजा पर नौकर का रास्ते में ही किसी वाहन की टक्कर से खाना बिखर गया |
ये बात जब डिक और कप्तान को पता लगी तो डिक और उसकी पत्नी को अपने घर ही भोजन करने के लिए बुला लिया |
खाने की टेबल पर अब डिक और उसकी पत्नी खाना खाने बैठे, नौकर शोरबे की प्लेट लेकर आ रहा था , इतने में उसे ठोकर लगी और गर्म गर्म शोरबा डिक के उपर और टेबल से टकराने के कारण टेबल पर रखा सारा खाना नीचे गिर गया , डिक अब रंगा बिल्ला सा दिख रहा था |
Major Dick or Sadhu ka Chamatkar Hindi story for kids
कप्तान ने तुरंत नौकर को होटल से खाने लेने के लिए भेजा, खाना आया , जैसे ही पैकेट खोला , उस खाने में बदबू ही बदबू| आखिरकार खाना फेंका गया और डिक और उसकी पत्नी ने पानी पी कर रात गुजारी |
रात को सोते समय डिक की पत्नी ने कहा कि हमें उस साधू से माफ़ी मांग लेनी चाहिए , पर डिक ने कहा कि उस से क्या माफ़ी मांगे वो तो एक भिखारी था , ऐसे तो यंहा खूब घुमते रहते है|
दुसरे दिन तक उस शहर की सारे होटल , दुकानें बंद हो चुकी थी , डिक और उसकी पत्नी रेलवे स्टेशन गये ताकि वहां कोई भोजन मिल जाये पर वहां भी कुछ नहीं मिला और स्टेशन मास्टर ने बताया कि वो अगर अगले स्टेशन चले जाये तो वहां भोजन मिल सकता है| डिक के दुर्भाग्य से उस स्टेशन जाने वाली गाड़ी भी छूट गई |
थक हार डिक और उसकी पत्नी वापिस छावनी की तरफ जाने लगे तो रास्ते में एक मिठाई की दुकान दिखी , वहां से मिठाई ले ली और आगे जाकर एक बरगद के पेड़ के नीचे बैठ कर खाने लगे तो उस मिठाई से शौच के जैसी दुर्गन्ध आने लगी , मिठाई फेंक दी और रवाना हो गये |
थोड़ा आगे चलने पर देखा कि वो ही साधू सामने आ रहे है मेजर का तो सारा घमंड चकनाचूर हो गया, पास आते ही साधू ने कहा , “माफ़ करना! आप को अब इस शहर में भोजन नहीं मिलेगा , आप किसी और शहर चले जाये तो अच्छा रहेगा |
मेजर डिक अब साधू के सामने हाथ जोड़े खड़ा था और उसकी पत्नी माफ़ करने की मन्नत कर रही थी |
साधू ने दोनों को अपने साथ पास ही अपने आश्रम चलने को कहा , दोनों वहां गये , उनको आसन्न पर बिठा कर केले की पत्तल पर गर्म गर्म भोजन परोसा गया , दोनों ने भरपेट भोजन किया| उस आश्रम में ना तो कोई सामान था , ना कोई भोजन बनाने वाला ,न चूल्हा फिर भी गर्म और ताजा भोजन खा कर डिक ने साधू के चमत्कार को नमस्कार किया और फिर वो साधू संतो का आदर करने लगा |
क्तियों से कई प्रकार के चमत्कार बता थे , आज भी कुछ साधक देखने
शिक्षा :- प्राचीन भारत में ऐसे साधू या साधक थे जो परा-श को मिल रहे है | अतः सच्चे साधक के प्रति श्रद्धा का भाव रखे |
🌟 इस कहानी से सीख
- आधुनिक ज्ञान-विज्ञान में विश्वाश होना चाहिए पर परा-विज्ञान के बारे में भी जानना चाहिए |
- सनातन धर्म में परा-शक्तियों के गूढ़ रहस्यों के प्रमाण आज भी भारत में मौजूद है |
- साधू -संतो के प्रति श्रद्धा भाव रखना चाहिए |
✨ “ईश्वर अपना अस्तित्व उसके बनाये संसार में प्रमाणित करता रहता है