कन्फ्यूशियस के शिष्य और किसान
चीन के बहुत प्रसिद्ध दार्शनिक हुवे जिनका नाम था कन्फ्यूशियस, इनके शिष्य थे , चांग-हो-चांग| एक बार चांग-हो-चांग देश का भ्रमण करने के लिए निकले , बहुत सारे शहरों , गाँव से घूमते हुवे एक गाँव में रुके | चांग-हो-चांग को किसी की भलाई करने , नये तरीके से किसी काम को करने के विचार देने का बहुत शौक था |
वे जिस गाँव में रुके , वंहा उनके पास एक किसान का खेत था , वह किसान रोज सुबह -शाम अपने खेत आता और अपने गहरे कुवें से पानी सींचता और फिर अपने पोधों और फसल को बाल्टी भर भर कर पिलाता था | दिन भर एक एक बाल्टी कुवें से खींचता फिर दूर दूर तक उस बाल्टी को भर पानी को ले कर जाता , ऐसा करते करते वह बहुत परिश्रम करता , पसीने से सारा शरीर भीग जाता पर वह इतनी मेहनत करके भी स्वस्थ था|
चांग-हो-चांग ने एक दो दिन उसको ये सब करते देखा तो उस पर दया आ गई , और फिर सोचने लगे कि ये बेचारा अभी भी पुराने तरीके से ही काम कर रहा है , लोग तो आजकल नये तरीके से सिंचाई कर रहे है , मुझे इसको भी नई तकनीक सिखानी चाहिए ताकि इसका समय बचे और परिश्रम भी कम करना पड़े |
चांग-हो-चांग को अपने खेत पर आता देख उस युवक ने प्रणाम किया और फिर बातचीत शुरू हुई तो चांग-हो-चांग ने कहा कि भाई ! तुम इस तरह से अगर अपने खेत को पानी पिलाते रहोगे तो तुम्हे तो बहुत मेहनत के कारण थकान होती होगी |
युवक ने अपना सिर हिलाते हुवे कहा “ हाँ महात्मा , मेरे तो पिता भी ऐसे ही काम करते थे |
चांग-हो-चांग ने कहा कि “ तुम अब कुछ नया तरीका काम में क्यों नहीं लेते हो ?
युवक ने उत्सुकता से पूछा “ वो भला क्या है ?
चांग-हो-चांग ने कहा कि ”तुम यदि लकड़ी की घिरनी बना कर कुवें के ऊपर बाँध दो और फिर उस पर रस्सी लपेट कर एक जगह खड़े खड़े ही बाल्टी को खिंच लो , इस से तुम्हें जोर कम लगाना पड़ेगा, फिर सब पोधों के लिए क्यारी बना दो और बाल्टी एक ही जगह खाली करते रहो, पानी धीरे धीरे सभी पोधों में चला जायेगा , तुम्हारा समय भी बचेगा और मेहनत भी कम करनी पड़ेगी |
युवक ने चांग-हो-चांग की ये तरकीब सुनी तो वह फूले नहीं समाया और फिर उसने थोड़े ही दिन में जैसा बताया वैसा ही कर दिया | अब युवक कम समय में और कम मेहनत में पहले जितना काम कर देता था |
उस युवक का समय और मेहनत तो कम हुई पर साथ साथ उसका हमेशा का जो व्यायाम होता था वह भी कम हो गया इस कारण उसका स्वास्थ्य दिन ब दिन कमजोर होने लगा पर उसने इसकी तरफ ध्यान नहीं दिया |

चार – छः माह बाद चांग-हो-चांग फिर गाँव से निकले तो उस युवक से मिले, हालाँकि युवक का शरीर अब पहले जैसा नहीं था , कुछ दुबला हो गया था | युवक ने उनका आभार जताया | चांग-हो-चांग ने अबकी बार उस युवक को भाप के इंजन की जानकारी दी जिससे उसको कुछ भी नहीं करना पड़ेगा , कुवें से पानी निकालने की मेहनत अब मशीन करेगी |
युवक ने फिर वैसा ही किया अब उसने अपने कुवें पर भाप से चलने वाली मोटर लगा दी और अब दिन भर खुद बैठा रहता और खेत में पानी मशीन से पिलाता रहता | परन्तु वह अब बीमार रहने लगा और उसका स्वास्थ्य गिरने लगा |
फिर कुछ महीनों के बाद चांग-हो-चांग का उस गाँव से गुजरना हुवा तो उन्होंने सोचा कि चलो उस युवक के खेत देख कर आयेंगे , अब तो बहुत अच्छी फसल होगी और फलदार पेड़ों पर फल भी आयें होंगे |
जब वे उसके खेत पहुंचे तो खेत तो सुखा पडा है और खेत पर वह युवक भी नहीं है , आस पास पूछने पर पता चल कि वह तो बीमार है और अपने घर पर ही है , चांग-हो-चांग अब उसके घर गये| वंहा जाकर देखा तो वो वास्तव में ही बीमार पड़ा था | चांग-हो-चांग ने उस से कहा कि भाई अब तो पहले जितनी मेहनत भी नहीं करनी पड़ती फिर तुम बीमार कैसे हो गये ?
पास में खड़ी उसकी पत्नी ने कहा “ महाराज आपके बताये गये नये तरीकों के कारण ही ये बीमार पड़े है , पहले अपने हाथ से मेहनत करते थे तो कभी बीमार नहीं पड़े , जब से काम करना छोड़ा है तब से बीमार होने लगे है | इनको देह आराम करने की बीमारी हो गई है अब इनको कोई ऐसी सीख दो कि पहले की तरह हाथ से ही सिंचाई करे |
चांग-हो-चांग को अब अपनी तकनीक पर संदेह होने लगा क्योंकि वह समय और श्रम तो बचाती है पर इन्सान को निक्कमा भी बनाती है, उन्होंने अपनी गलती स्वीकार की और उसको पुनः अपने अनुसार खेती करने को कहा |
वह युवक अब धीरे धीरे अपने पुराने तरीके से ही खेत की सिंचाई करने लग गया और उसका स्वास्थ्य पहले जैसा हो गया |
शिक्षा : तकनीक से इन्सान का शारीरिक बल कम होता जा रहा है |