नागौर के महाराजा बखतसिंह का न्याय
राजस्थान के जोधपुर रियासत के पास एक छोटा सा परगना था नागौर । वहां पर उस समय बख्तसिंह का शासन था , बख्तसिंह बहुत ही न्याय प्रिय शासक थे इस कारण उनकी ख्याति पूरे राजस्थान में फैली हुई थी। भारत में उस समय अंग्रेजों का राज था और बख्तसिंह अंग्रेजों के बनाए कानून के अनुसार न्याय नहीं करते थे।
जयपुर रियासत के राजा ने जब बख्तसिंह के न्याय प्रियता की बात सुनी तो उन्होंने बख्तसिंह की परीक्षा लेनी की योजना बनाई । जयपुर के राजा ने अपने दो सिपाहियों को अच्छी तरह सीखा बुझा कर नागौर भेजा। वे दोनों सिपाही राजा के सिखाए अनुसार नागौर आ गए । नागौर शहर में एक हलवाई की पुरानी प्रसिद्ध दुकान थी । दोनों सिपाहियों ने अपना वेश बदल दिया और उस हलवाई की दुकान पर आकर बैठ गए। हलवाई ने उनको पहचाना नहीं, वे दोनों सिपाही दिनभर वहीं बैठे रहे और उस हलवाई की दिनभर की हो रही कमाई को देखने लगे , हलवाई की दुकान पर बहुत सारे लोग आते मिठाइयां लेते और पैसे देकर चले जाते । शाम होने तक उन्होंने हलवाई की जितनी कमाई हुई उसका ठीक-ठीक अनुमान लगा लिया । जब रात होने पर हलवाई दुकान बंद करके जाने लगा तो उसने अपने सारे दिन की कमाई को गिन कर जब में रख ली और घर की ओर रवाना हो गया। थोड़ी दूर आगे जाने पर वे दोनों सिपाही उसके पीछे-पीछे गए और पास में जाकर जोर-जोर से चिल्लाने लगे “देखो इस हलवाई ने हमारे रूपये ले लिए ! देखो इसने हमारे रूपये ले लिए, हम अनजान है , इस शहर में नये है इस आदमी ने हमारे साथ धोखा करके हमसे रूपए ले लिए”हलवाई इस बात को समझ नहीं पाया।
थोड़ी देर में नागौर के राजा का एक सिपाही वहां आया और उसने पूछा कि क्या हो गया? जयपुर के राजा के सिपाहियों ने अपनी झूठी कहानी उसको सुनाई। नागौर राजा के सिपाही ने उनसे पूछा कि आपके कितने रूपए थे ? उन्होंने कहा कि हमारे 420 रुपए थे । जब हलवाई से पूछा कि अब तुम बताओ तुम्हारी जेब में कितने पैसे हैं हलवाई ने रूपए बाहर निकाल कर सिपाही को दिए और कहा कि उसे ठीक से याद नहीं क्योंकि ये मेरे दिन भर की कमाई है, जिसे लेकर घर जा रहा हूँ।उस सिपाही ने रुपये गिना तो वास्तव में उतने ही थे जितने उन दोनों सिपाहियों ने बताए थे । जब बात नहीं सुलझ पाई कि पैसे किसके हैं, तो सिपाही इन तीनों को लेकर राजा बख्तसिंह के दरबार में गया।
राजा को जाकर पूरी कहानी सुनाई। राजा ने कहा कि एक कड़ाही मंगाकर उसमें पानी गर्म किया जाए। सब लोग देखने लगे कि इससे क्या होगा थोड़ी देर बाद में राजा ने उस गर्म पानी में सारे रूपए डाल दिए । अपने रुपए गर्म पानी में डालते देख हलवाई रोने लगा और कहा कि महाराज, ये मेरी कमाई है, ये सब गल जाएंगे। थोड़ी देर में राजा ने कहा कि देखो पानी के ऊपर घी और तेल की चिकनाई तैरने लगी है इसका मतलब ये रुपए हलवाई के ही हैं। वे दोनों सिपाही तो आश्चर्यचकित रह गए और अपनी गलती स्वीकार कर ली।जब वे दोनों वापस जयपुर दरबार के पास पहुंचे तथा सारी कहानी सुनाई तो राजा भीबख्तसिंह के न्याय करने के तरीके को जानकर आश्चर्य में पड़ गया।