धर्म का अभिप्रयाय
उस समय में श्रावस्ती नामक राज्य में चंद्रचूड नाम का राजा राज करता था उनके राज्य में धर्म के अर्थ को लेकर बहुत सारी बातें सुनाई जा रही थी| राजा इस बात से दुखी था कि आखिर धर्म का सही अर्थ क्या है?और यह बात कौन बता सकता है कुछ समय बाद महात्मा बुद्ध का उसके राज्य में आना हुआ | राजा ने महात्मा बुद्ध का बहुत स्वागत किया और उन्हें सम्मान दिया और फिर उनसे अपनी जिज्ञासा का समाधान जानना चाहा| महात्मा बुद्ध राजा के इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए जंगल की ओर ले गये , रास्ते में देखा कि एक गाँव में एक हाथी वाला हाथी लेकर आया है और सारे गाँव के लोग उसे देखने इकठ्ठा हुए है, उन सब के बीच चार अंधे भी उस हाथी को देखने आये थे |
महात्मा बुद्ध ने उन अँधे लोगों से पूछा कि क्या आप लोगों ने हाथी देखा? उन अंधों ने कहा कि नहीं हम तो अँधे है , हमें भी बता दो, हाथी कैसा होता है ?

महात्मा बुद्ध ने एक एक कर उन चार अँधे लोगो को हाथी के पास भेजा और उसको छू कर आने को कहा |
जब चारों अँधे हाथी को छू कर आ गये तो पूछा कि अब बताओ हाथी कैसा था ?
पहले अँधे आदमी ने बताया कि हाथी तो सूप जैसा होता है, क्योंकि उसने हाथी के कान छु कर अनुमान लगा लिया | जब दुसरे को पूछा कि तुम बताओ हाथी कैसा था ? उसने कहा कि हाथी तो सांप के जैसा होता है , उसने हाथी की सूंड को छू कर देखा था | तीसरे को जब पूछा तो उसने कहा कि हाथी तो खम्भे के जैसा होता है , क्योंकि इसने हाथी के पाँव छूकर देखे थे और जब चौथे अँधे को पूछा तो उसने कहा कि हाथी तो एक दम पत्थर के जैसा और नुकीला होता है क्योंकि इसने हाथी के दांत को छूआ था |
अब महात्मा बुद्ध ने राजा को कहा कि अब तुम समझे धर्म का क्या अर्थ है ? जिस प्रकार पूरे हाथी को जाने और देखे बिना उसके अंगों के आधार पर इन चार लोगों ने हाथी का अनुमान लगाया , ठीक इसी प्रकार धर्म से अनजान लोग अपने ज्ञान के आधार पर अपने अपने अर्थ बताते रहेंगे |
राजा को अब अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया था |