नादिरशाह की सादगी
Nadirshah ki Sadagi_Hindi story for kids
इस कहानी के माध्यम से आप ईरान के शासक नादिरशाह की सादगी के बारे में जानेंगे |
ईरान के बादशाह नादिरशाह ने जिस समय भारत पर आक्रमण किया, उस समय की यह घटना है । नादिरशाह बहुत ही क्रूर था पर था साहसी। साथ ही उसे सादगी बहुत पसंद थी; वह अपने जीवन में भी इसका पालन करता था।

जिस समय दिल्ली पर मोहम्मदशाह शासन कर रहा था उस समय उसने करनाल के पास मुहम्मद शाह की सेना को हराया|

और फिर दिल्ली में बादशाह के शाही महल में मिलने गया। नादिर शाह मुगलों की थोथी शान और दिखावे की बादशाही जीवन शैली की बातें पहले सुन चुका था, दोनों बादशाह मिले, बातचीत चल रही थी, कुछ देर बाद नादिर शाह को प्यास लगी और उसने पानी लाने को कहा । नादिरशाह का पानी मांगना हुआ ही था कि एक साथ ढोल नगाड़े बजने लगे, जैसे कि कोई उत्सव हो, नादिर शाह इस बात को समझ नहीं पाया कि आखिर ये अचानक क्यों बजे। खैर थोड़ी ही देर में मुगलों के दस बारह सेवक हाजिर हुवे, जिसमे दो चार सुंदर लड़कियां भी थी, किसी के हाथ में रुमाल था तो किसी के हाथ में खासदान, दो लड़कियों ने हाथ में बड़ा सा चांदी का थाल पकड़ रखा था उसमें माणिक मोती जड़ा एक कटोरा जिसमें पानी भरा हुआ था, साथ ही दो सेवक उस थाल के ऊपर रेशमी वस्त्र से ढके ढके चल रहे थे।

नादिरशाह समझ नहीं पाया और सोचने लगा कि मैने तो सिर्फ पानी मांगा था पीने के लिए, ये सब तमाशा क्या हो रहा हैं, उसने पास में बैठे मोहम्मद शाह से पूछा कि यह सब क्या हैं?
मुहम्मद शाह ने खुश होते हुवे घमंड से उत्तर दिया कि ये तो शाह ए ईरान के लिए पानी की खिदमत की जा रही हैं। अब तो नादिरशाह और भी आश्चर्यचकित हो गया । उसने कहा कि अगर एक लोटा पानी लाने के लिए इतने सब लगे है और फिर इतनी व्यवस्था करनी पड़ती है तो मैं यह पानी नहीं पियूंगा।
उसने अपनी सेना के भिश्ती को पानी लाने को कहा, भिश्ती पानी की मशक ले कर हाजिर हुआ|

नादिरशाह ने अपने सिर के टोपे को उतारा और उसे भर कर अपनी प्यास बुझाई। और मोहम्मद शाह को कहा कि अगर हम भी तुम्हारे तरह पानी पीने लग गए तो ईरान से यहाँ तक नहीं पहुंच पाते।
मुहम्मद शाह हार तो पहले ही गया था, अब उसे अपनी झूठी शान-शौकत का नतीजा भी समझ आ गया।
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