Hindi story for kids
देश भगत झलकारी बाई की कहानी
hindi story for kids देशभक्त झलकारी बाई की हिंदी कहानी 1857 की क्रांति
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अपने राज्य को अंग्रेजों से बचाने के लिए सब प्रयास किये और जब उनके किल्ले को चारों तरफ से घेर लिया, धीरे धीरे किल्ले की दीवारें गिराई जाने लगी और अंत में जब ये पता चला कि अब अंग्रेज सेना किसी भी समय किल्ले में प्रवेश कर उसे पकड़ सकती है तो जो किल्ले के अंदर साथी थे उनमें विचार विमर्श हुवा कि अब क्या किया जाना चाहिए?
परिस्थिति को देखते हुवे तय हुवा कि रानी लक्ष्मी बाई को किसी भी तरह किल्ले में से सुरक्षित बाहर निकाल कर
कालपी तक पहुँचाना है|
रानी के जाने के बाद किस प्रकार अंग्रेज सेना को गुमराह किया जाये ताकि रानी सुरक्षित कालपी पहुँच जाये तो ये उत्तरदायित्त्व रानी की एक वीरांगना सैनिक झलकारी बाई को दी गई|
रात को अँधेरे में रानी को अपने घोड़े पर साधारण कपड़ो से कालपी के गुप्त रास्ते से कुछ सैनिकों के साथ चुपके से रवाना कर दिया | झलकारी ने रानी के वस्त्र धारण कर सुबह होने से पहले अंग्रेज अधिकारिओं के समक्ष जाकर अपने को आत्मसमर्पण कर दिया और कहा कि मैं ही रानी लक्ष्मी बाई हूँ मुझे गिरफ्तार कर लो”
अचानक से सुबह सुबह अँधेरे में ऐसे आकर समर्पण करना, उस अंग्रेज अधिकारी को विश्वाश नहीं हुवा पर आश्चर्य भी हुवा कि वो रणचंडी इतनी आसानी से खुद को समर्पित कर दे ये असंभव है|
Hindi story for kids
देश भगत झलकारी बाई की कहानी
अंग्रेज अधिकारी को संदेह हो गया कि ये रानी नहीं हो सकती तो सवेरा होने पर रानी की पहचान करने के लिए स्थानीय लोगों को बुलाया गया| झलकारी कद काठी शक्ल सूरत और बात करने के अंदाज से रानी के जैसी ही थी | वो बार बार चिल्ला चिल्ला कर कह रही थी “मैं ही लक्ष्मीबाई हूँ” |
पहचानने के लिए आये लोगों में से सबने उसको रानी लक्ष्मी बाई ही बताया पर एक गद्दार निकला उसने कहा कि ये रानी नहीं है रानी तो रात को ही ये किल्ला छोड़ जा चुकी है|
झलकारी जोर जोर से कहती रही कि “मैं ही लक्ष्मी बाई हूँ मुझे गिरफ्तार करो”
अंग्रेजो से अपने को रानी साबित कराने और उनको इस बात में उलझाये रखा तब तक आधा दिन बीत चूका था, यही झलकारी का उद्देश्य था |
अंग्रेजो ने तुरंत पता कराया तो ये मालूम हुवा कि ये रानी नहीं है , रानी तो कालपी जा चुकी है |
झलकारी की वीरता और उसके अंग्रेजों के समक्ष बात करने के अंदाज से प्रभावित हो कर उस समय के अंग्रेज अधिकारी ने कहा था कि “यदि भारत की एक प्रतिशत नारियां भी झलकारी जैसी हो जाये तो हमें सात दिन में ही ये देश छोड़ना पड़े”|
ऐसी थी वो झलकारी जिसने अपने देश के लिए प्राण संकट में डालकर अपनी रानी को सुरक्षित पहुंचा दिया, हालाँकि वे दोनों अपने देश के लिए वीरगति को प्राप्त हुई पर अपने राष्ट्र के लिए प्राण देने वाली ये वीरांगनाएँ हमेशा याद की जाती रहेगी |