नक़ल का फल
पुराने ज़माने की बात है , अरब देश में आदिल नाम का एक व्यापारी रहता था , वह बड़ा ही मेहनती इन्सान था | एक बार उसने सुना कि इथोपिया नामक देश के लोगों के पास चांदी बहुत है , तो उसने इथोपिया जाकर व्यापर करने की सोची |
आदिल एक दिन अपने बीस – पच्चीच ऊँटों पर प्याज के बोरे भर इथोपिया के लिए निकल गया , कई दिनों की यात्रा के बाद वह इथोपिया पहुँच गया | इथोपिया के लोग प्याज से अनजान थे उन लोगों ने कभी भी प्याज नहीं खाया था | जब आदिल ने उन लोगों को प्याज के बारे में बताया और उनको प्याज खिलाये तो वे लोग बहुत खुश हुवे और सब ने प्याज खरीदने की इच्छा जाहिर की |

आदिल व्यापरी था , उसने उन लोगों से कहा कि “तुम्हारे यंहा चांदी बहुत है और मेरे यंहा प्याज बहुत है तुम जितना प्याज लेना चाहो लेलो और उसके बराबर तौल में चांदी मुझे दे दो “||
वंहा के लोग राजी- राजी प्याज के बदले चांदी देने को तैयार हो गये , फिर क्या था ? आदिल ने अपने प्याज से भरे सारे ऊँट खाली कर वापिस चाँदी से भर लिए | प्याज के बदले चांदी पा कर आदिल फूले नहीं समा रहा था , वह काफी धनवान बन कर अपने देश लौट आया |
जब हाफिज के मालामाल होने का समाचार एक अन्य अरब व्यापारी इसाक ने सुना तो वह ईर्ष्या के भाव से जल गया , अब उसने भी इथोपिया जाने की ठानी । उसने पप्याज से भी बढ़िया वस्तु लहसुन अपने ऊंट पर लादी और इथोपिया जा पहुंचा। इथोपिया के लोगों ने जब लहसुन देखा ओर चखा तो चकित हो गए और बहुत प्रसन्न हुए ,इथोपिया वासियों ने इसाक का सारा लहसुन तो ले लिया परंतु बदले में क्या दें यह प्रश्न उठा उन्होंने विचार किया कि चांदी तो क्या ही दे वह तो सब जगह बहुत है किंतु चांदी से भी बढ़िया चीज तो प्याज है जो उन्होंने आदिल से लिए थे उन्होंने इस इसाक से जितना लहसुन लिया उसका आधा वजन तौल के प्याज दे दिए । इसाक यह सब देखकर बहुत हैरान और परेशान हुआ वह अपने भाग्य को रोता हुआ अपने देश लौट आया।
शिक्षा _ इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी किसी दूसरे की नकल नहीं करनी चाहिए नकल करने पर हमें वैसा फल नहीं मिलता |